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महाकुंभनगर. आधुनिक पीढ़ी को भगवान शिव से जुड़े विभिन्न पहलुओं के पीछे छिपे विज्ञान से अवगत कराने और उन पहलुओं की दैनिक जीवन में प्रासंगिकता के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से शैव-फैशन शो कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान की प्रवक्ता, साध्वी तपेश्वरी भारती ने बताया कि सेक्टर-नौ में स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के शिविर में हुए शैव-फैशन शो के लिए दिल्ली से आए मॉडलों ने शिवमय गीत संगीत पर महादेव के विभिन्न स्वरूपों को मंच पर बखूबी दर्शाया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में साध्वी डॉक्टर निधि भारती ने भगवान शिव के विभिन्न आभूषणों एवं वेशभूषा जैसे कि उनकी जटाजूट, त्रिशूल, बाघम्बर वस्त्रों इत्यादि के पीछे छिपे विज्ञान और उनकी आध्यात्मिक प्रासंगिता उजागर की। साध्वी तपेश्वरी भारती ने बताया कि कार्यक्रम में भगवान महादेव के तांडव पर आधारित अनोखे व्यायाम भी सिखाये गए। उन्होंने कहा, “महाकुंभ के महापर्व में आधुनिक पीढ़ी को भगवान शिव के प्रतीकों के पीछे छिपे सनातन विज्ञान से परिचित कराने की सख़्त जरूरत है ताकि वे सभी ध्यान के विज्ञान के जरिए तृतीय नेत्र से उस शिव-तत्व का दर्शन कर सकें और फिर उसी ज्ञान से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को अपनाकर अपने जीवन को आनंदमय बना सकें।” इस कार्यक्रम का समापन आनंद नृत्य के साथ हुआ जिसमें भगवान शिव के विभिन्न नामों का रॉक-धुनों के साथ अनूठा मिश्रण देखने को मिला। दर्शकों ने भगवान शिव के भजनों का खूब आनंद लिया।
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विदेशी चंदा मिलने का रास्ता साफ: सूत्र
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत लाइसेंस प्रदान किया है ताकि वह विदेश से धन प्राप्त कर सके। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। मंदिर का प्रबंधन फिलहाल एक अदालत कर रही है, जिसने एक प्रबंधन समिति गठित की है।
सूत्रों ने बताया कि इस मंदिर को एफसीआरए, 2010 के तहत लाइसेंस दिया गया है। मौजूदा प्रबंधन समिति ने एफसीआरए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इस मंदिर का प्रबंधन पहले पुजारियों का एक परिवार करता था और यह निजी प्रबंधन के अधीन था।
गृह मंत्रालय ने उचित आवेदन और अदालत की मंजूरी के बाद एफसीआरए के तहत विदेशी धन प्राप्त करने का लाइसेंस दिया है। सूत्रों ने बताया कि आवेदन के अनुसार, मंदिर को अपने खजाने में काफी विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई और वह विदेश से दान स्वीकार करने का इच्छुक है। कानून के अनुसार, विदेशी दान प्राप्त करने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों को एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना होता है। -
नई दिल्ली। 76वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की 148 सदस्यीय महिला टुकड़ी ने ‘नारी शक्ति’ का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस टुकड़ी का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट ऐश्वर्या जॉय एम ने किया। यह महिला टुकड़ी देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात इकाइयों से चुनी गई है जो उग्रवाद विरोधी, नक्सलवाद विरोधी और कानून व्यवस्था की ड्यूटी में सक्रिय हैं। इसमें भारत के हर कोने से महिलाएं शामिल हैं जो एक ‘मिनी इंडिया’ की झलक दिखाती हैं।
दिल्ली पुलिस की ऑल-विमेन बैंड ने भी दूसरी बार गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया। इस बैंड का नेतृत्व बैंड मास्टर रूयांगुनुओ केंस ने किया। दिल्ली पुलिस के ब्रास और पाइप बैंड में चार महिला सब-इंस्पेक्टर और 64 महिला कांस्टेबल शामिल थीं। दिल्ली पुलिस की मार्चिंग टुकड़ी जिसने 16 बार सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी का पुरस्कार जीता है का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) ऋषि कुमार सिंह ने किया।वहीं रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की 92 सदस्यीय टुकड़ी ने ‘वीर सैनिक’ धुन पर मार्च करते हुए सलामी दी। इस टुकड़ी का नेतृत्व डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर आदित्य ने किया। आरपीएफ ने अपनी सतर्कता, शक्ति और सेवा का प्रदर्शन किया। भारतीय रेलवे की सुरक्षा में उनकी अहम भूमिका है। अब तक आरपीएफ के 1087 जवान ड्यूटी पर अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। उनका आदर्श वाक्य है – ‘सेवा ही संकल्प’।इसके बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ऊंटों पर सजी-धजी टुकड़ी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इन ऊंटों को रंग-बिरंगे परिधानों में सजाया गया था। राजस्थान और कच्छ के कठिन इलाकों में यह ऊंट ‘मरुस्थल के जहाज’ कहे जाते हैं। - महाकुंभनगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज दौरे पर शनिवार को दक्षिण भारत की श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती जी महाराज से भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि “श्रृंगेरी पीठ के पूज्य शंकराचार्य के प्रयागराज पधारने से बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है। आपके आगमन से महाकुंभ को पूर्णता मिल रही है।” एक आधिकारिक बयान के अनुसार शंकराचार्य की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दक्षिण रीति से स्वागत किया गया और उन्हें कुंभ के स्वरूप के रूप में नारियल भेंट किया गया। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी शंकराचार्य को शॉल ओढ़ाकर और फल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती जी महाराज से भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “लंबे अंतराल के बाद दक्षिण की श्रृंगेरी पीठ का महाकुंभ के महाआयोजन में आगमन हो रहा है। इससे महाकुंभ की शोभा और अधिक बढ़ गई है।” उन्होंने कहा, “यह आनंद का विषय है कि इस महाकुंभ में श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य पांच दिन का प्रवास करेंगे, यह हमारे लिए आशीर्वाद की तरह है।” योगी ने कहा, “प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन आपका आभारी है। कुंभ जैसे आयोजन को भव्य और दिव्य बनाने में आपकी उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।” इस दौरान मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य को महाकुंभ की व्यवस्था, संतों की भागीदारी और वैश्विक स्तर पर लोगों के आगमन से जुड़ी सभी जानकारियां प्रदान कीं। बयान में कहा गया कि श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री द्वारा महाकुंभ के विषय में दी गई जानकारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने महाकुंभ में की गई व्यवस्थाओं और सुविधाओं की प्रशंसा की। अपनी सेवा में जुटे लोगों को भी उन्होंने आशीर्वाद दिया। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को दक्षिण पीठ की परंपरा के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 48 वर्ष पहले गुरु के गुरु कुंभ में अमावस्या के समय एक दिन का स्नान करने के लिए यहां आए थे, लेकिन औपचारिक रूप से दक्षिण से कोई शंकराचार्य 150 वर्षों के बाद महाकुंभ में सम्मिलित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच दिन के प्रवास के अवसर पर वह शास्त्रार्थ के साथ ही अमावस्या पर शंकराचार्यों के साथ त्रिवेणी संगम स्नान में भी सम्मिलित होंगे। उन्होंने अपने प्रवास और इसके बाद कार्यक्रमों के विषय में भी बताया। इस पर मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य से काशी प्रवास के अवसर पर शास्त्रार्थ सभा और प्रवचन करने का भी निवेदन किया। जिस पर शंकराचार्य ने भी अपनी सहमित दी। वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में कार्यक्रम को लेकर भी शंकराचार्य की ओर से सहमति प्रदान की गई।इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेक्टर-19 स्थित श्री कल्याण सेवा आश्रम, अमरकंटक के आश्रम भी पहुंचे और यहां उन्होंने सद्गुरुदेव बाबा कल्याण दास जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की और उनके साथ व्यक्तिगत चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महाकुंभ में सरकार के द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सुविधाओं के विषय में भी उनसे बातचीत की। करीब 10 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अपने अगले कार्यक्रम की ओर बढ़ गए। मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में कल्याण सेवा आश्रम वर्ष 1977 से जन सेवा, समाज सेवा आध्यात्मिक एवं धार्मिक गतिविधियों को अपना उद्देश्य बनाकर निरंतर कार्य कर रहा है।
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श्रीनगर,। वर्षों की कड़ी मेहनत व समर्पण और कुछ इंजीनियरिंग चमत्कारों के बाद आखिरकार कश्मीर की रेल संपर्कता का सपना शनिवार को उस समय सच हो गया जब विशेष रूप से डिजाइन की गई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यहां पहुंची और संचालन परीक्षण पूरा किया। ट्रेन अपने पहले परीक्षण के तहत जम्मू के कटरा से श्रीनगर स्टेशन पर पहुंची। यह शुक्रवार को जम्मू पहुंची थी। पूर्वाह्न 11:30 बजे जैसे ही वंदे भारत एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुंची, इसका स्वागत नारों और भारतीय रेलवे की प्रशंसा के साथ किया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग और रेलवे अधिकारी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, उनमें से कई लोग ट्रेन में सवार अधिकारियों का स्वागत करने के लिए मालाएं लेकर आए थे। यहां स्टेशन पर कुछ देर रुकने के बाद ट्रेन अपना परीक्षण पूरा करने के लिए बडगाम स्टेशन के लिये रवाना हो गई। उत्तर रेलवे के मुख्य क्षेत्र प्रबंधक (श्रीनगर) साकिब यूसुफ ने कहा कि संचालन परीक्षण का पूरा होना एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिहासिक कदम है। यह कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के हमारे प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दर्शाता है।” यूसुफ ने कहा कि परीक्षण का उद्देश्य यह भी पता लगाना था कि ट्रेन विभिन्न खंडों पर कितना समय लेगी।
उन्होंने कहा कि परीक्षण का सफल समापन पिछले 10 वर्षों में लाइन को पूरा करने के लिए की गई कड़ी मेहनत का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कटरा से ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने कटरा-बारामूला खंड पर ट्रेन सेवा संचालन के लिए हरी झंडी दे दी थी। कटरा में होने वाले उद्घाटन समारोह की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। रेलवे ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना के 272 किलोमीटर हिस्से पर काम पूरा कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने पिछले साल आठ जून को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का अनावरण किया था। ट्रेन में जलवायु संबंधी विशेषताएं शामिल हैं। इसमें उन्नत ताप प्रणालियां शामिल हैं जो पानी व जैव-शौचालय के टैंकों के जल को जमने से रोकती हैं। -
महाकुंभनगर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को महाकुंभ मेले को एकता का संदेश देने वाला तथा देश और दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बताते हुए कहा कि सनातन धर्म एक विराट वट वृक्ष की तरह है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म एक विराट वट वृक्ष है और इसकी तुलना किसी झाड़ और झंखाड़ से नहीं होनी चाहिए। एक बयान के मुताबिक प्रयागराज दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने शनिवार को अखिल भारतीय अवधूत भेष बारह पंथ-योगी महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। योगी ने कहा, ''दुनिया के अंदर अन्य संप्रदाय हो सकते हैं, उपासना विधि हो सकती है, लेकिन धर्म तो एक ही है और वह है सनातन धर्म। यही मानव धर्म है। भारत में जितनी भी उपासना विधियां हैं वह अलग पंथ और संप्रदाय से भले ही जुड़ी हों, लेकिन निष्ठा और आस्था सब की सनातन धर्म से जुड़ी हुई है। सबका उद्देश्य तो एक ही है। इसलिए महाकुंभ के इस पावन आयोजन पर हम सबको पूरी दुनिया से आए लोगों को एक ही संदेश देना है, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी का कहना है कि महाकुंभ का संदेश, एकता से ही अखंड रहेगा देश।'' उन्होंने कहा कि याद रखना, भारत सुरक्षित है तो हम सब सुरक्षित हैं। भारत सुरक्षित है तो हर पंथ, हर संप्रदाय सुरक्षित है और अगर भारत के ऊपर कोई संकट आएगा तो सनातन धर्म पर संकट आएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म पर संकट आएगा तो भारत के अंदर कोई भी पंथ और संप्रदाय अपने आप को सुरक्षित महसूस ना करे। वह संकट सबके ऊपर आएगा, इसलिए संकट की नौबत आने ना पाए, इसके लिए एकता का संदेश आवश्यक है। योगी ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि इस महाकुंभ के आयोजन से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति के दिन कोटि-कोटि श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती की पावन त्रिवेणी के संगम पर डुबकी लगाकर अभिभूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार कहते हैं की यह सदी भारत की सदी है, भारत की सदी का मतलब हर एक क्षेत्र में भारत को विकास की बुलंदियों को छूना है। लेकिन, प्रत्येक क्षेत्र में देश उन बुलंदियों को तब छू सकेगा जब उस क्षेत्र से जुड़े हुए प्रतिनिधि अपने दायित्वों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करेंगे। जो राजनीति में हैं वह राजनीति के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, सीमा पर सेना देश की सुरक्षा का काम कर रही है और धार्मिक जगत से जुड़े हुए हमारे पूज्य संत भी अपना दायित्व निभा रहे हैं। योगी ने कहा,'' आपने देखा होगा कि किस तरह से पवित्र भाव के साथ महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। कोटि-कोटि श्रद्धालु आ रहे हैं। आज यहां पर वर्तमान में दो करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं। सभी सड़कों पर लोगों की भीड़ मौजूद है। यह सिलसिला लगातार चलेगा। पिछले 10 दिनों के अंदर महाकुंभ के पावन त्रिवेणी संगम में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं और अगले 35 दिन के अंदर यह संख्या 45 करोड़ पहुंचने वाली है। योगी ने चेताया कि आज जितना सकारात्मक माहौल है, उतनी ही चुनौतियां भी हैं। देश की एकता को, समाज की एकता को कहीं भी खंडित नहीं होने देना है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग हमें बांटना चाहते हैं, भाषा के नाम पर बांटने का काम कर रहे हैं। उन लोगों के किसी भी षड़यंत्र में हमारे पूज्य संतों को नहीं पड़ना है। कोई ऐसी नकारात्मक टिप्पणी हम लोग अपने स्तर पर ना करें।'' एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न तीर्थ स्थलों से आए श्री महंत, आचार्य और योगेश्वर का सम्मान किया। उन्होंने जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, परमात्मानंद महाराज और निर्मलानंद महाराज को शॉल ओढ़ाकर और गोरखनाथ जी की प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया। इनके साथ ही सतुआ बाबा, सुदर्शनाचार्य महाराज, स्वामी धीरेंद्र और स्वामी जितेंद्रनाथ का भी सम्मान किया गया। उन्होंने रामानुजाचार्य, श्रीधराचार्य, शेरनाथ महाराज, उमेशनाथ महाराज, कृष्णनाथ महाराज, समुद्रनाथ महाराज, संख्यनाथ महाराज, रामनाथ महाराज, श्री महंत सोमवरनाथ महाराज और मिथिलेशनाथ महाराज का भी अभिनंदन किया।
- प्रयागराज ।उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से आयोजित महाकुंभ में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पर पहुंचेंगे। इसे लेकर रेल, बस अड्डों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ाई गई है। मौनी अमावस्या पर जहां रेलवे 150 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है तो वहीं बस अड्डों से कई बसों का संचालन किया जाएगा। प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सहलूयित को देखते हुए स्लीपिंग पॉड की सुविधा दी जा रही है।स्लीपिंग पॉड के प्रभारी योगेंद्र पांडे ने बताया कि स्लीपिंग पॉड जनता के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हैं, जिसमें आगंतुकों के लिए फोन, लैपटॉप चार्ज करने की व्यवस्था है। इसके अलावा आगंतुकों के आराम के लिए पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था की गई है। महाकुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर ये 70 स्लीपिंग पॉड बनाए गए हैं। इनमें कई सिंगल स्लीपिंग पॉड, महिलाओं के लिए पिंक स्लीपिंग पॉड और डबल स्लीपिंग पॉड के साथ-साथ फैमिली पॉड भी शामिल हैं।यहां आने वाले श्रद्धालु भी राज्य सरकार की व्यवस्था से काफी खुश हैं। एक श्रद्धालु ने बताया कि यहां आकर काफी अच्छा लगा। महाकुंभ वाकई अद्भुत है। हर किसी को इसे देखना चाहिए। तैयारियां बहुत बढ़िया हैं, और यहां सब कुछ खूबसूरती से व्यवस्थित है।
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नई दिल्ली। आज पूरा देश हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मना रहा है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक राष्ट्रीय पर्व की धूम है। पंजाब के वाघा-अटारी बॉर्डर पर पूरी आन-बान-शान के साथ तिरंगा फहराया गया जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे। इस मौके पर बीएसएफ कमांडेंट हर्ष नंदन जोशी ने सभी नागरिकों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। कमांडेंट हर्ष नंदन जोशी ने जवानों को मिठाई खिलाई और उनका मुंह मीठा कराया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी को भी देश की सुरक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी चाहे वह पड़ोसी देश ही क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा कि बीएसएफ के जवान उनके परिवार के सदस्य जैसे हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है।
वहीं चेन्नई के मरीना बीच पर गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी मौजूद हैं। बता दें, इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का विषय “स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास” है जिसका उद्देश्य देश की प्रगति और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करना है।मुंबई के मीरा भायंदर वसई विरार पुलिस आयुक्तालय के परिमंडल 3 के प्रांगण में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डीसीपी जयंत बजबले ने झंडा फहराया। कार्यक्रम में विभिन्न पुलिस स्टेशनों के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक और स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे। सभी ने मिलकर इस अवसर पर देशभक्ति का उत्सव मनाया और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया। समारोह के दौरान डीसीपी ने पुलिसकर्मियों और नागरिकों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। -
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं ने गणतंत्र दिवस की देशवासियों को शुभकामनाएं दीं हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संविधान को हर भारतीय का सुरक्षा कवच बताया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के न्याय, स्वाधीनता, समानता और भाईचारे के मूल्यों पर आधारित हमारा संविधान भारतीय गणतंत्र का गौरव है धर्म, जात, क्षेत्र, भाषा से परे हर भारतीय का सुरक्षा कवच है इसका सम्मान और रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।”
वहीं वायनाड सांसद प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज ही के दिन हमारा संविधान लागू हुआ था जिसने हर एक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा की गारंटी दी। हमारा संविधान एक-एक भारतीय के अधिकारों का रक्षा कवच है। हमारे संविधान की रक्षा के लिए हमारा संकल्प चट्टान की तरह मजबूत है।” सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक्स पोस्ट पर इस दिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने एक वीडियो संदेश भी जारी किया। ओम बिरला ने अपने वीडियो संदेश में कहा “प्रिय देशवासियों, 76वें गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में भारत का आधुनिक गणतंत्र अधिक समर्थ और समृद्ध हुआ है। देश ने तरक्की के अनेक आयाम छुए हैं। देश का प्रत्येक नागरिक आज संकल्प ले कि हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी को बढ़ाएंगे। हम स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता के हमारे आदर्शों को और अधिक मजबूत बनाएंगे जिससे हमारा गणतंत्र और अधिक समृद्ध हो। आज के दिन हम अपने उन मनीषियों को भी याद करें जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में भूमिका निभाई, तथा संविधान निर्माण और राष्ट्र के विकास में अथक योगदान दिया।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 26 जनवरी को नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत की। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने शहीदों की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित किया और देश के वीर सैनिकों को याद किया।
प्रधानमंत्री द्वारा पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद इंटर-सर्विसेज गार्ड के कमांडर अमित राठी ने 21 गार्ड्स और 6 बगुलरों के साथ सलामी शस्त्र और शोक शस्त्र के आदेश दिए। लास्ट पोस्ट की धुन पूरे माहौल को भावुक बना दिया इस दौरान सभी अधिकारियों ने शहीदों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखा।इस साल, 40 वर्षों बाद फिर से एक पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के द्वारा कर्तव्य पथ तक पारंपरिक बग्गी में ले जाया गया। कर्तव्य पथ पर पहुंचने पर राष्ट्रपति और मुख्य अतिथि का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने वहां उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ का भी अभिवादन किया।इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो भी मौजूद थे जो इस वर्ष के मुख्य अतिथि हैं। राष्ट्रगान की धुन के साथ स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराया। 21 तोपों की सलामी के बाद परेड शुरू हुई। इंडोनेशिया के जवान भी इस परेड में शामिल हुए। उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी थे जो इस वर्ष के समारोह के मुख्य अतिथि हैं। परंपरा के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट, ‘राष्ट्रपति के अंगरक्षक’ द्वारा कर्तव्य पथ तक ले जाया गया। 40 वर्षों से बंद परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए वे ‘पारंपरिक बग्गी’ में सवार होकर समारोह में पहुंचे।
उनके आगमन पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ का भी कर्तव्य पथ पर स्वागत किया। राष्ट्रगान के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया जिसके बाद स्वदेशी 105-एमएम लाइट फील्ड गन का उपयोग करके 21 तोपों की सलामी दी गई।इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने पर ध्यान केंद्रित किया गया और “जन भागीदारी” पर जोर दिया गया। इस उत्सव में भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता, समानता, विकास और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक मंत्रालय के 300 कलाकारों के साथ वाद्य यंत्र बजाते हुए परेड निकली। कलाकारों द्वारा शहनाई, नादस्वरम, मशक बीन, बांसुरी, शंख और ढोल जैसे पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों की मदद से “सारे जहां से अच्छा” बजाया गया। समारोह में वैश्विक स्पर्श जोड़ते हुए 152 सदस्यों वाली इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बलों की मार्चिंग टुकड़ी और 190 सदस्यों वाली इंडोनेशिया की सैन्य अकादमी का सैन्य बैंड भी परेड में शामिल हुआ। -
देहरादून. उत्तराखंड में जल्द लागू होने वाले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अधिनियम में सैनिकों के लिए “प्रिविलेज्ड वसीयत” का प्रावधान किया गया है जिसके तहत वे अपनी वसीयत अपने हाथ से लिख या मौखिक रूप से निर्देशित करके भी तैयार कर सकते हैं। राज्य में सशस्त्र बलों में उत्कृष्ट योगदान देने की परंपरा के मद्देनजर किए गए प्रिविलेज्ड वसीयत के प्रावधान के अनुसार सक्रिय सेवा या तैनाती पर रहने वाले सैनिक, वायुसैनिक या नौसैनिक अपनी वसीयत को सरल और लचीले नियमों के तहत भी तैयार कर सकते हैं-चाहे वह हस्तलिखित हो, मौखिक रूप से निर्देशित की गई हो, या गवाहों के समक्ष शब्दशः प्रस्तुत की गई हो। इस प्रावधान का मूल उद्देश्य यह है कि कठिन व उच्च-जोखिम वाली परिस्थितियों में तैनात सैनिक भी अपनी संपत्ति-संबंधी इच्छाओं को प्रभावी ढंग से दर्ज करा सकें। उदाहरण के लिए अगर कोई सैनिक स्वयं अपने हाथ से वसीयत लिखता है, तो उसके लिए हस्ताक्षर या साक्ष्य (अटेस्टेशन) की औपचारिकता आवश्यक नहीं होगी, बशर्ते यह स्पष्ट हो कि वह दस्तावेज उसी की इच्छा से तैयार किया गया है। इसी तरह, यदि कोई सैनिक मौखिक रूप से दो गवाहों के समक्ष अपनी वसीयत की घोषणा करता है तो उसे भी 'प्रिविलेज्ड वसीयत' माना जाएगा। हालांकि, यह एक माह बाद स्वतः अमान्य हो जाएगी यदि वह व्यक्ति तब भी जीवित है और सक्रिय सेवा जैसी उसकी विशेष सेवा-स्थितियां समाप्त हो चुकी हैं। उत्तराखंड में यूसीसी अधिनियम को लागू करना प्रदेश में 2022 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक है। मार्च में दोबारा सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन पर मुहर लगा दी गयी थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को गठित विशेषज्ञ समिति ने लगभग डेढ़ साल की मेहनत से तैयार अपनी रिपोर्ट दो फरवरी 2024 को राज्य सरकार को सौंपी जिसके बाद मार्च 2024 में राज्य विधानसभा ने इसे पारित कर दिया। उसके बाद 12 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी जिसके बाद वह अधिनियम बन गया। यूसीसी अधिनियम लागू होने के बाद उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का ऐसा पहला राज्य होगा जहां सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। मुख्यमंत्री पहले ही इसे जनवरी में लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। यूसीसी अधिनियम की नियमावली को भी हाल में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की मंजूरी मिल चुकी है और ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही इसे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। 'प्रिविलेज्ड वसीयत' को भविष्य में सैनिक द्वारा एक नयी प्रिविलेज्ड वसीयत, या साधारण वसीयत बनाकर रद्द या संशोधित भी किया जा सकता है। यूसीसी अधिनियम में वसीयत बनाना किसी के लिए अनिवार्य नहीं है और यह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है। हालांकि, जो व्यक्ति अपनी संपत्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित करना चाहता है, उसके लिए अधिनियम में एक सुरक्षित और सरल व्यवस्था की गयी है।
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नयी दिल्ली. गोवा की 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी, 150 महिलाओं को पुरुष प्रधान क्षेत्र ढाक वादन में प्रशिक्षित करने वाले पश्चिम बंगाल के ढाक वादक और कठपुतली का खेल दिखाने वाली पहली भारतीय महिला उन 30 गुमनाम नायकों में शामिल हैं जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। सरकारी बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। गोवा के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लीबिया लोबो सरदेसाई ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए 1955 में एक जंगली इलाके में भूमिगत रेडियो स्टेशन ‘वोज दा लिबरडाबे (वॉयस ऑफ फ्रीडम)' की स्थापना की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरदेसाई को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की। पुरस्कार पाने वालों में पश्चिम बंगाल के 57 वर्षीय ढाक वादक गोकुल चंद्र डे भी शामिल हैं जिन्होंने पुरुष-प्रधान क्षेत्र में 150 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ा। डे ने ढाक प्रकार का एक हल्का वाद्ययंत्र भी बनाया, जो वजन में पारंपरिक वाद्ययंत्र से 1.5 किलोग्राम कम था। उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और पंडित रविशंकर तथा उस्ताद जाकिर हुसैन जैसी हस्तियों के साथ कार्यक्रम किए। पद्मश्री सम्मान की सूची में शामिल महिला सशक्तीकरण की मुखर समर्थक 82 वर्षीय सैली होलकर ने लुप्त हो रही माहेश्वरी शिल्प कला को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पारंपरिक बुनाई तकनीकों में प्रशिक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश के महेश्वर में हथकरघा स्कूल की स्थापना की। रानी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत से प्रेरित और अमेरिका में जन्मीं सैली होलकर ने बुनाई की 300 साल पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए अपने जीवन के पांच दशक समर्पित कर दिए।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि देश का संविधान भारतवासियों की सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है तथा यह ‘‘विलक्षण ग्रंथ'' सभी नागरिकों को एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है। राष्ट्रपति ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में जो आज व्यापक परिवर्तन हुआ वो संविधान में निर्धारित रूपरेखा के बिना संभव नहीं हो सकता था। मुर्मू ने कहा, ‘‘भारत के गणतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब हमारी संविधान सभा की संरचना में भी दिखाई देता है। उस सभा में देश के सभी हिस्सों और सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व था। सबसे अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि संविधान सभा में सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, हंसाबेन मेहता और मालती चौधरी जैसी 15 असाधारण महिलाएं भी शामिल थीं।'' राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में जब महिलाओं की समानता को एक सुदूर आदर्श समझा जाता था तब भारत में महिलाएं, राष्ट्र की नियति को आकार देने में सक्रिय योगदान दे रही थीं। मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज इसलिए बन पाया है, क्योंकि नागरिकों की निष्ठा, सदियों से, हमारी नैतिकता-परक जीवन-दृष्टि का प्रमुख तत्व रही है। हमारा संविधान, भारतवासियों के रूप में, हमारी सामूहिक अस्मिता का मूल आधार है जो हमें एक परिवार की तरह एकता के सूत्र में पिरोता है।'' उनके अनुसार, पिछले 75 वर्षों से संविधान ने देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘आज के दिन, हम, संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव आंबेडकर, सभा के अन्य प्रतिष्ठित सदस्यों, संविधान के निर्माण से जुड़े विभिन्न अधिकारियों और ऐसे अन्य लोगों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जिनके कठिन परिश्रम के फलस्वरूप हमें यह विलक्षण ग्रंथ प्राप्त हुआ।'' उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के बाद के ये 75 वर्ष हमारे युवा गणतंत्र की सर्वांगीण प्रगति के साक्षी हैं। राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख किया, ‘‘स्वाधीनता के समय और उसके बाद भी देश के बड़े हिस्से में घोर गरीबी और भुखमरी की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, हमारा आत्म-विश्वास कभी डिगा नहीं। हमने ऐसी परिस्थितियों के निर्माण का संकल्प लिया जिनमें सभी को विकास करने का अवसर मिल सके। हमारे किसान भाई-बहनों ने कड़ी मेहनत की और हमारे देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मजदूर भाई-बहनों ने अथक परिश्रम करके हमारे अवसरंचना और विनिर्माण क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के बल पर आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व के आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही है। आज का भारत, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व की स्थिति हासिल कर रहा है। संविधान में निर्धारित रूपरेखा के बिना यह व्यापक परिवर्तन संभव नहीं हो सकता था।'' -
महाकुंभ नगर. विश्व के सबसे बड़े अध्यात्मिक समागम प्रयागराज महाकुंभ में 73 देशों के राजनयिक पहली बार यहां संगम में स्नान करने आ रहे हैं जिसमें युद्ध में उलझे रूस और यूक्रेन के राजदूत भी शामिल हैं। मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने यह पुष्टि की है कि एक फरवरी को 73 देशों से राजनयिक महाकुंभ का महात्म्य देखने आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इसके लिए पत्र भी लिखा है। उन्होंने बताया कि इस पत्र में लिखा गया है कि दुनियाभर के राजनयिक महाकुंभ नगर में बड़े हनुमान जी और अक्षयवट के दर्शन भी करना चाहते हैं। जिन देशों के राजनयिक आ रहे हैं, उनमें जापान, अमेरिका, रूस, यूक्रेन, जर्मनी नीदरलैंड, कैमरून, कनाडा, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, पोलैंड और बोलिविया शामिल हैं। पत्र के मुताबिक, ये सभी विदेशी राजनयिक नाव के जरिए संगम पहुंचेंगे और पवित्र संगम में स्नान करेंगे। यहां से वे अक्षयवट और बड़े हनुमान मंदिर का दर्शन करने जाएंगे और इसके बाद डिजिटल महाकुम्भ अनुभव केंद्र में महाकुंभ से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करेंगे। विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारी इस आयोजन को सुचारू बनाने की तैयारी में जुटे हैं। विदेशी राजनयिकों के लिए टूर गाइड की व्यवस्था भी की गई है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का स्वागत कर सम्मानित महसूस कर रहा है, जो गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि जब भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था, तब इंडोनेशिया अतिथि देश था और रविवार को देश जब गणतंत्र के रूप में 75 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा, तब सुबियांतो मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “भारत (इंडोनेशिया के) राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का स्वागत कर सम्मानित महसूस कर रहा है।” मोदी ने कहा कि उन्होंने और सुबियांतो ने भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। चर्चा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने और खासतौर पर रक्षा विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखला के क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई।
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नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने शनिवार को इस साल के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। बिहार की जानी मानी दिवगंत लोक गायिका शारदा सिन्हा और जापान के व्यवसायी ओसामु सुजुकी समेत तीन को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं देश के पहले सिख सीजेआई जगदीश सिंह खेहर भी पद्म विभूषण पाने वाले सात शख्सियतों में शामिल हैं।
इसके अलावा 19 शख्सियतों को (चार मरणोपरांत) पद्म भूषण और 113 लोगों को (छह मरणोपरांत) पद्म श्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। पद्म भूषण पाने वालों में प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रहे विवेक देबरॉय (मरणोपरांत), जाने माने गायक पंकज उदास (मरणोपरांत), फिल्म निर्माता शेखर कपूर, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (मरणोपरांत) प्रमुख नाम हैं।साथ ही बिहार के जाने माने लोक सेवक और पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल (मरणोपरांत), जानेमाने व्यवसाई पवन गोयनका, क्रिकेटर आर. आश्विन सहित 113 शख्सियतों को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। देश के जानेमाने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी को मेडिसिन के क्षेत्र में पद्म विभूषण देने की घोषणा की गई है। उनके पास लगभग 50 साल का अनुभव है। उन्होंने कुरनूल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से जनरल मेडिसिन में एमडी की पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीएम की डिग्री हासिल की।
वहीं देश के पहले सिख सीजेआई न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जगदीश सिंह खेहर को सार्वजनिक मामलों (पब्लिक अफेयर्स) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। 4 जनवरी 2017 को जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने सुप्रीम कोर्ट के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश के रूप में इतिहास रचा। जानी मानी कथक नृत्यांगना और कोरियोग्राफर कुमुदिनी रजनीकांत लाखिया को कला (डांस) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने 1967 में भारतीय नृत्य और संगीत के क्षेत्र में कदम्ब स्कूल ऑफ डांस एंड म्यूजिक की स्थापना की। कर्नाटक के लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम को कला (म्यूजिक) के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले उन्हें 1987 में पद्म श्री और 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
कर्नाटक संगीत के साथ-साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित एक प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. लक्ष्मीनारायण सुब्रमण्यम को कला के क्षेत्र में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। संगीत में उनका करियर 1973 में शुरू हुआ, और तब से उन्होंने 200 से ज्यादा रिकॉर्डिंग अपने नाम की है। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकारों जैसे येहुदी मेनुहिन, स्टीफन ग्रेपेली, रग्गिएरो रिक्की, जीन-पियरे रामपाल, हर्बी हैनकॉक, जॉर्ज हैरिसन और अन्य के साथ काम किया। साल 1988 में उन्हें पद्म श्री और 2001 में पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले थे।
भारत के सर्वकालिक महान लेखकों में से एक एम.टी. वासुदेवन नायर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। जापान के दिवंगत व्यवसायी ओसामु सुजुकी को व्यापार और उद्योग (ट्रेड एंड इंडस्ट्री) के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। वह एक जापानी व्यवसायी थे और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष रहे। देश की प्रसिद्ध दिवंगत लोक गायिका शारदा सिन्हा को कला (संगीत) के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। शारदा सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज से न केवल भोजपुरी और मैथिली संगीत को नई पहचान दिलाई, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया।
पद्म भूषण :
कर्नाटक के ए. सूर्य प्रकाश जो प्रसार भारती के पूर्व चेयरपर्सन रहे हैं उन्हें साहित्य और शिक्षा-पत्रकारिता के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। कर्नाटक से आने वाले अभिनेता अनंत नाग को कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। दिल्ली के बिबेक देबरॉय (मरणोपरांत) जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष रहे हैं, उन्हें साहित्य और शिक्षा-पत्रकारिता के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।असम से आने वाले जतिन गोस्वामी को कला के क्षेत्र में, केरल से आने वाले जोस चाको पेरियाप्पुरम को मेडिसिन के क्षेत्र में, दिल्ली से आने वाले कैलाश नाथ दीक्षित को पुरातत्व के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे मनोहर जोशी (मरणोपरांत) को पब्लिक अफेयर्स के क्षेत्र में, तमिलनाडु से आने वाले उद्योगपति नल्ली कुप्पुस्वामी चेट्टी को व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में, आंध्र प्रदेश से आने वाले नंदामुरी बालकृष्ण को कला के क्षेत्र में, केरल से आने वाले पीआर श्रीजेश को खेल के क्षेत्र में, गुजरात से आने वाले कैडिला हेल्थकेयर के चेयरपर्सन पंकज पटेल को व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।महाराष्ट्र से आने वाले भारतीय पार्श्व गायक पंकज उधास (मरणोपरांत) को कला के क्षेत्र में, यूपी से आने वाले रामबहादुर राय जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष हैं, उन्हें साहित्य और शिक्षा-पत्रकारिता के क्षेत्र में, यूपी से आने वालीं दुर्गा वाहिनी की संस्थापक साध्वी ऋतंभरा को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।तमिलनाडु से आने वाले अभिनेता एस अजित कुमार को जो कला के क्षेत्र में, महाराष्ट्र से आने वाले फिल्म निर्माता शेखर कपूर को कला के क्षेत्र में, तमिलनाडु से आने वाली अभिनेत्री शोभना चंद्रकुमार को कला के क्षेत्र में, बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम रहे सुशील कुमार मोदी (मरणोपरांत) को जनसम्पर्क के क्षेत्र में, भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर और उद्यमी विनोद धाम को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।
पद्म श्री :
विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवा के लिए 113 व्यक्तियों को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। इनमें अद्वैत चरण गडनायक (कला) ओडिशा, अच्युत रामचन्द्र पालव (कला) महाराष्ट्र, अजय वी भट्ट (विज्ञान और इंजीनियरिंग) अमेरिका, अनिल कुमार बोरो (साहित्य एवं शिक्षा) असम, अरिजीत सिंह (कला) पश्चिम बंगाल, अरुंधति भट्टाचार्य (व्यापार और उद्योग) महाराष्ट्र, अरुणोदय साहा (साहित्य एवं शिक्षा) त्रिपुरा, अरविन्द शर्मा (साहित्य एवं शिक्षा) कनाडा, अशोक कुमार महापात्रा (मेडिसिन) ओडिशा, अशोक लक्ष्मण सराफ (कला) महाराष्ट्र, आशुतोष शर्मा (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग) उत्तर प्रदेश, अश्विनी भिड़े देशपांडे (कला) महाराष्ट्र, बैजनाथ महाराज (अन्य – अध्यात्मवाद) राजस्थान, बैरी गॉडफ्रे जॉन (कला) एनसीटी दिल्ली, बेगम बतूल (कला) राजस्थान, भरत गुप्त (कला) एनसीटी दिल्ली, भेरू सिंह चौहान (कला) मध्य प्रदेश, भीम सिंह भावेश (सामाजिक कार्य) बिहार, भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्यथारा (कला) कर्नाटक, बुधेन्द्र कुमार जैन (मेडिसिन) मध्य प्रदेश, सी एस वैद्यनाथन (सार्वजनिक मामले) एनसीटी दिल्ली, चैतराम देवचंद पवार (सामाजिक कार्य) महाराष्ट्र शामिल हैं। इस सूची में चंद्रकांत शेठ (मरणोपरांत) (साहित्य एवं शिक्षा) गुजरात, चंद्रकांत सोमपुरा (अन्य – वास्तुकला) गुजरात, चेतन ई चिटनिस (विज्ञान और इंजीनियरिंग) फ्रांस, डेविड आर सिम्लीह (साहित्य और शिक्षा) मेघालय, दुर्गा चरण रणबीर (कला) ओडिशा, फारूक अहमद मीर (कला) जम्मू और कश्मीर, गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ (साहित्य एवं शिक्षा) उत्तर प्रदेश, गीता उपाध्याय (साहित्य एवं शिक्षा) असम, गोकुल चंद्र दास (कला) पश्चिम बंगाल, गुरुवयूर दोराई (कला) तमिलनाडु, हरचंदन सिंह भट्टी (कला) मध्य प्रदेश, हरिमन शर्मा (अन्य – कृषि) हिमाचल प्रदेश, हरजिंदर सिंह श्रीनगर वाले (कला) पंजाब, हरविंदर सिंह (खेल) हरियाणा, हसन रघु (कला) कर्नाटक, हेमन्त कुमार (चिकित्सा) बिहार, हृदय नारायण दीक्षित (साहित्य एवं शिक्षा) उत्तर प्रदेश, ह्यूग और कोलीन गैंटज़र (मरणोपरांत) (जोड़ी) (साहित्य और शिक्षा – पत्रकारिता) उत्तराखंड, इनिवलाप्पिल मणि विजयन (खेल) केरल, जगदीश जोशीला (साहित्य एवं शिक्षा) मध्य प्रदेश, जसपिंदर नरूला (कला) महाराष्ट्र, जोनास मासेटी (अन्य – अध्यात्मवाद) ब्राज़ील, जोयनाचरण बथारी (कला) असम, जुमदे योमगाम गैमलिन (सामाजिक कार्य) अरुणाचल प्रदेश, के. दामोदरन (अन्य – पाककला) तमिलनाडु, के एल कृष्णा (साहित्य एवं शिक्षा) आंध्र प्रदेश, के ओमानकुट्टी अम्मा (कला) केरल, किशोर कुणाल (मरणोपरांत) (सिविल सेवा) बिहार, एल हैंगथिंग (अन्य – कृषि) नागालैंड, लक्ष्मीपति रामसुब्बैयर (साहित्य एवं शिक्षा-पत्रकारिता) तमिलनाडु भी शामिल हैं।
इनके अलावा ललित कुमार मंगोत्रा (साहित्य और शिक्षा) जम्मू और कश्मीर, लामा लोबजंग (मरणोपरांत) (अन्य – अध्यात्मवाद) लद्दाख, लीबिया लोबो सरदेसाई (सामाजिक कार्य) गोवा, एम डी श्रीनिवास (विज्ञान और इंजीनियरिंग) तमिलनाडु, मदुगुला नागफनी सरमा (कला) आंध्र प्रदेश, महाबीर नायक (कला) झारखंड, ममता शंकर (कला) पश्चिम बंगाल, मंदा कृष्णा मडिगा (सार्वजनिक मामले) तेलंगाना, मारुति भुजंगराव चितमपल्ली (साहित्य और शिक्षा) महाराष्ट्र, मिरियाला अप्पाराव (मरणोपरांत) (कला) आंध्र प्रदेश, नागेंद्र नाथ रॉय (साहित्य और शिक्षा) पश्चिम बंगाल, नारायण (भुलई भाई) (मरणोपरांत) (सार्वजनिक मामले) उत्तर प्रदेश, नरेन गुरुंग (कला) सिक्किम , नीरजा भाटला (चिकित्सा) एनसीटी दिल्ली, निर्मला देवी (कला) बिहार, नितिन नोहरिया (साहित्य और शिक्षा) संयुक्त राज्य अमेरिका, ओंकार सिंह पाहवा (व्यापार) और उद्योग) पंजाब, पी दत्चानमूर्ति (कला) पुडुचेरी, पंडी राम मंडावी (कला) छत्तीसगढ़, परमार लवजीभाई नागजीभाई (कला) गुजरात, पवन गोयनका (व्यापार और उद्योग) पश्चिम बंगाल, प्रशांत प्रकाश (व्यापार और उद्योग) कर्नाटक, प्रतिभा सत्पथी (साहित्य और शिक्षा) ओडिशा को भी पद्म श्री दिया गया है।पद्म श्री से सम्मानित अन्य हस्तियां-पुरीसाई कन्नप्पा संबंदन (कला) तमिलनाडु, आर अश्विन (खेल) तमिलनाडु, आर जी चंद्रमोगन (व्यापार और उद्योग) तमिलनाडु, राधा बहिन भट्ट (सामाजिक कार्य) उत्तराखंड, राधाकृष्णन देवसेनापति (कला) तमिलनाडु, रामदरश मिश्रा (साहित्य और शिक्षा) ) एनसीटी दिल्ली, रणेंद्र भानु मजूमदार (कला) महाराष्ट्र, रतन कुमार परिमू (कला) गुजरात, रेबा कांता महंत (कला) असम, रेंथली लालरावना (साहित्य और शिक्षा) मिजोरम, रिकी ज्ञान केज (कला) कर्नाटक, सज्जन भजंका (व्यापार और उद्योग) पश्चिम बंगाल, सैली होलकर (व्यापार और उद्योग) मध्य प्रदेश, संत राम देसवाल (साहित्य और शिक्षा) हरियाणा, सत्यपाल सिंह (खेल) उत्तर प्रदेश, सीनी विश्वनाथन (साहित्य और शिक्षा) तमिलनाडु, सेथुरमन पंचनाथन (विज्ञान और इंजीनियरिंग) संयुक्त राज्य अमेरिका, शेखा शेखा अली अल-जबर अल-सबा (चिकित्सा) कुवैत, शीन काफ निज़ाम (शिव किशन बिस्सा) (साहित्य एवं शिक्षा) राजस्थान, श्याम बिहारी अग्रवाल (कला) उत्तर प्रदेश, सोनिया नित्यानंद (चिकित्सा) उत्तर प्रदेश, स्टीफन नैप (साहित्य एवं शिक्षा) संयुक्त राज्य अमेरिका, सुभाष खेतुलाल शर्मा (अन्य – कृषि) महाराष्ट्र, सुरेश हरिलाल सोनी (सामाजिक कार्य) गुजरात, सुरिंदर कुमार वासल (विज्ञान और इंजीनियरिंग) दिल्ली, स्वामी प्रदीप्तानंद (कार्तिक महाराज) )अन्य – अध्यात्मवाद) पश्चिम बंगाल, सैयद ऐनुल हसन (साहित्य और शिक्षा) उत्तर प्रदेश, तेजेंद्र नारायण मजूमदार (कला) पश्चिम बंगाल, थियाम सूर्यमुखी देवी (कला) मणिपुर, तुषार दुर्गेशभाई शुक्ला (साहित्य और शिक्षा) गुजरात से शामिल हैं।
इस सूची में वदिराज राघवेंद्राचार्य पंचमुखी (साहित्य और शिक्षा) आंध्र प्रदेश, वासुदेव कामथ (कला) महाराष्ट्र, वेलु आसान (कला) तमिलनाडु, वेंकप्पा अंबाजी सुगतेकर (कला) कर्नाटक, विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी महाराज (अन्य – अध्यात्मवाद) बिहार, विजयलक्ष्मी देशमने (चिकित्सा) ) कर्नाटक, विलास डांगरे (चिकित्सा) महाराष्ट्र, और विनायक लोहानी (सामाजिक कार्य) पश्चिम बंगाल के नाम भी हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत 19वीं किस्त का इंतजार कर रहें किसानों के लिए एक बड़ा अपडेट है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, 19वीं किस्त 24 फरवरी को जारी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार से किसानों के खाते में ये किस्त जारी करेंगे। बता दें कि इस योजना के तहत किसानों के खातों में 2 हजार रुपये जमा किए जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली बार 5 अक्टूबर को महाराष्ट्र के वाशिम से इस योजना की 18वीं किस्त जारी की थी। उस समय उन्होंने 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 20,000 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स में पहले ही यह अनुमान लगाया गया था कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Yojana) की 19वीं किस्त फरवरी, 2025 में जारी हो सकती हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अब किस्त जारी होने की तारीख का भी ऐलान कर दिया है।बिहार की राजधानी पटना में कर्पूरी ठाकुर की 101वीं जयंती के कार्यक्रम में पहुंचे कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त जारी होने की तारीख की घोषणा की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं बिहार के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई देता हूं। यहां कृषि और किसानों के लिए बेहतरीन काम हो रहा है। प्रधानमंत्री 24 फरवरी को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त के वितरण के लिए बिहार आएंगे…”प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को हर साल 6,000 रुपये की मदद तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। 24 फरवरी 2019 को शुरू हुई यह योजना लाखों किसानों के जीवन में आर्थिक सहारा बनी है।19वीं किस्त पाने के लिए किसानों को 31 दिसंबर से पहले फार्मर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य था। इस समय सीमा के तहत जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, उनके खाते में किस्त नहीं आएगी।पीएम किसान सम्मान निधि की लाभार्थी सूची में आपका नाम है या नहीं, ऐसे करें चेक1. पीएम किसान ऑफिशियल (PM Kisan official website) की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाए।2. Beneficiary list नाम से आ रही टैब पर क्लिक करें। यह टैब आपको पेज के सीधे हाथ पर कोने में दिखेगा।3. वेबसाइट के पेज पर नीचे जाए और विवरण चुनें जैसे राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव का सेलेक्शन करें।4. अंत में Get report के टैब पर क्लिक करें।–इसके बाद आप लाभार्थी किसानों की सूची में है या नहीं इसकी जानकारी आपके स्क्रीन पर आ जायेगी। -
नई दिल्ली। भारत अपना 76वां गणतंत्र दिवस मनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रविवार को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर दुनिया भारत की सैन्य शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक बार फिर से अनुभव करने वाली है। इसी के साथ देश संविधान के लागू होने का ‘प्लेटिनम जुबली’ भी 26 जनवरी को मनाएगा। हमेशा की तरह गणतंत्र दिवस की परेड मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस बार की परेड बेहद खास होने वाली है क्योंकि इतिहास में पहली बार देश की तीनों सेनाओं यानी थलसेना (Indian Army), नौसेना (Navy) और वायुसेना (Air force) की एक ही झांकी होगी।
इस बार गणतंत्र दिवस 2025 की क्या है थीम?इस वर्ष समारोह का मुख्य विषय संविधान की 75वीं वर्षगांठ है, लेकिन झांकियों का विषय ‘स्वर्णिम भारत : विरासत और विकास’ है। परेड दिल्ली में विजय चौक से शुरू होकर कर्तव्य पथ से होते हुए लाल किले तक जाएगी।परेड से पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। परेड सुबह राष्ट्रीय सलामी के साथ शुरू होगी और 90 मिनट तक जारी रहेगी, जो भारत की विरासत और विकास यात्रा को दर्शाएगी।परेड की शुरुआत 300 कलाकार करेंगे। जानकारी के अनुसार इस बार परेड में 31 झांकियां, 18 मार्चिंग कंटिजेंट और 15 बैंड शामिल होंगे। परेड में कुल 5,000 कलाकार कर्तव्य पथ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। रविवार को विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 16 झांकियां और केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संगठनों की 15 झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी।इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो होंगे चीफ गेस्टइंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। परेड में इंडोनेशिया का एक मार्चिंग दस्ता और बैंड का एक दल भी भाग लेगा। सुबियांतो गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने वाले इंडोनेशिया के चौथे राष्ट्रपति होंगे। इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में, भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।पहली बार भारत की तीनों सेना की होगी ज्वाइंट झांकीइस गणतंत्र दिवस पर देश संविधान के लागू होने का ‘प्लेटिनम जुबली’ मनाएगा। इसलिए यह गणतंत्र दिवस अपने आप नें बहुत खास है, मगर इसी के साथ इतिहास में पहली बार देश की तीनों सेनाओं यानी थलसेना (Indian Army), नौसेना (Navy) और वायुसेना (Air force) की एक ही झांकी होगी। यह इस गणतंत्र दिवस को और भी खास बनाती है। देश की सेनाओं की जवाइंट झांकी निकालने का मकसद तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और समझ को बढ़ावा देना है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, झांकी में युद्ध के मैदान का परिदृश्य दिखाया जाएगा, जिसमें स्वदेशी अर्जुन युद्धक टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के साथ थल, जल और वायु में समन्वित अभियान का प्रदर्शन किया जाएगा। तीनों सेनाओं की झांकी का विषय ‘सशक्त और सुरक्षित भारत’ होगा।कर्तव्य पथ पर भारत करेगा अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शनदेश अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन ब्रह्मोस, पिनाक और आकाश सहित कुछ अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा। साथ ही, सेना की युद्ध निगरानी प्रणाली ‘संजय’ और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक मिसाइल ‘प्रलय’ पहली बार परेड में शामिल की जाएगी।अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि टी-90 ‘भीष्म’ टैंक, सारथ (पैदल सेना ले जाने वाला वाहन बीएमपी-2), ‘शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम’ 10 मीटर, नाग मिसाइल सिस्टम, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर सिस्टम ‘अग्निबाण’ और ‘बजरंग’ (हल्का विशिष्ट वाहन) भी परेड का हिस्सा होंगे।अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, डीआरडीओ ‘रक्षा कवच -बहु-क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ बहु-स्तरीय सुरक्षा’ विषय पर एक झांकी पेश करेगा।फ्लाईपास्ट पर रहेगी सबकी निगाहेंफ्लाईपास्ट में भारतीय वायुसेना के 40 विमान और भारतीय तटरक्षक बल के तीन डोर्नियर विमान शामिल होंगे। सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, सी-295, सी-17 ग्लोबमास्टर, पी-8आई, मिग-29 और एसयू-30 सहित अन्य विमान भी समारोह का हिस्सा होंगे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करेंगी। 26 जनवरी का दिन इसलिए भी खास है कि संविधान के लागू होने के 75 साल पूरे हो रहे हैं। संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया था। -
नई दिल्ली। इसरो 29 जनवरी को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना 100वां मिशन लॉन्च करेगा। इस ऐतिहासिक मिशन के तहत जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट को लॉन्च किया जाएगा जो एनवीएस-02 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसरो ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी जानकारी दी है।
जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट, जीएसएलवी श्रृंखला की 17वीं उड़ान होगी और यह स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण की 11वीं उड़ान होगी। एनवीएस-02 उपग्रह भारतीय नेविगेशन प्रणाली (एनएवीआईसी) का हिस्सा है जो दूसरी पीढ़ी का उपग्रह है। इसका उद्देश्य भारत और इसके आसपास 1500 किलोमीटर की दूरी तक सटीक स्थिति, वेग और समय सेवाएं प्रदान करना है।एनवीएस-02 उपग्रह तकनीकी रूप से अत्याधुनिक है। इसका वजन 2,250 किलोग्राम है और यह 3 किलोवाट तक की पावर संभाल सकता है। इसमें नेविगेशन के लिए एल1, एल5 और एस बैंड पेलोड शामिल हैं जो इसकी सेवाओं को और बेहतर बनाएंगे। इसके अलावा, यह उपग्रह एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड को सपोर्ट करता है जिससे इसकी विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी।एनएवीआईसी प्रणाली दो प्रकार की सेवाएं प्रदान करेगी। पहली, मानक पोजिशनिंग सेवा (एसपीएस) जो 20 मीटर से बेहतर स्थिति सटीकता और 40 नैनोसेकंड से बेहतर समय सटीकता देगी। दूसरी प्रतिबंधित सेवा (आरएस) जो केवल विशेष उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।यह मिशन इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 10 अगस्त 1979 को श्रीहरिकोटा से पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएलवी) मिशन के बाद, 46 वर्षों में इसरो 100 मिशनों का एक बड़ा सफर तय करने जा रहा है।जीएसएलवी-एफ15 और एनवीएस-02 उपग्रह के साथ भारत की नेविगेशन प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने आज शनिवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक अहम बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों ने स्वास्थ्य, डिजिटल बुनियादी ढांचा और रक्षा सहयोग सहित कई क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों में इंडोनेशिया की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही, उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।बैठक के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2025 को भारत-आसियान पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा और पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने याद किया कि इंडोनेशिया भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा था और इसे ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक बताया।प्रधानमंत्री ने भारत और इंडोनेशिया के बढ़ते व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया । इसके अलावा, दोनों देश फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।बैठक में साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और कट्टरपंथ से मुक्ति के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए गए। पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर जोर दिया।उन्होंने रामायण, महाभारत और बाली यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत साझा है। उन्होंने प्रम्बनन हिंदू मंदिर के संरक्षण में भारत की भागीदारी की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स में इंडोनेशिया की सदस्यता का स्वागत करते हुए वैश्विक दक्षिण देशों के हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। -
नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की अगली बैठक 27 जनवरी को होगी। इस बीच, जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्षी सांसदों द्वारा हंगामा किए जाने के कारण बैठक को दो बार स्थगित करना पड़ा और इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
पाल ने बताया कि विपक्षी सांसदों के नारेबाजी और शोर-शराबे के कारण बैठक सुचारू रूप से नहीं चल सकी। इसके बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रस्ताव रखा कि हंगामा करने वाले सांसदों को निलंबित कर दिया जाए जिसे समिति के सदस्यों ने समर्थन दिया। बैठक के एजेंडे में बदलाव के आरोपों पर स्पष्टीकरण देते हुए पाल ने कहा कि यह बदलाव विपक्षी नेताओं के अनुरोध पर किया गया था। विपक्ष चाहता था कि कश्मीरी धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक को बैठक में आमंत्रित किया जाए। मीरवाइज और उनके प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में भाग लिया और बिल के कुछ प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखे।दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले बिल को जल्दबाजी में पारित करने के आरोपों का खंडन करते हुए पाल ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने स्वयं इस बिल को विस्तृत चर्चा के लिए जेपीसी को भेजने का अनुरोध किया था। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और अवैध कब्जों जैसी समस्याओं का समाधान करना है। इसमें संपत्तियों का डिजिटलीकरण, बेहतर ऑडिट, पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध कब्जे को हटाने के लिए कानूनी तंत्र विकसित करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं।जेपीसी से उम्मीद है कि वह बजट सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। गौरतलब है कि बजट सत्र दो चरणों में 31 जनवरी से शुरू होगा और 4 अप्रैल तक चलेगा। वहीं केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। -
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) राजीव कुमार ने आज शुक्रवार को सोशल मीडिया पर फैल रहे ‘प्रदूषण’ पर चिंता व्यक्त की और इसे पर्यावरण प्रदूषण जितना ही गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी और झूठी खबरें सोशल मीडिया पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा रहीं हैं। राजीव कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ग्लोबल इलेक्शन ईयर 2024: रीइटरशन ऑफ डेमोक्रेटिक स्पेसेस’ नामक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान यह बातें कहीं।
राजीव कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए चुनाव प्रबंधन निकायों का एक कार्य समूह बनाया गया है। उन्होंने “दिल्ली घोषणा 2025” का जिक्र किया, जो निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी चुनाव सुनिश्चित करने की चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (algorithm) लोगों की सोच को एकतरफा बना रहे हैं और उन्हें अन्य विचारों से दूर कर रहे हैं। उन्होंने टेक कंपनियों से अपील की कि वे अपने एल्गोरिदम में बदलाव करें ताकि सही और स्पष्ट जानकारी सामने आए न कि झूठ और भ्रामक खबरें।मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि गलत जानकारी को फैलने से पहले ही रोका जाना चाहिए। इसे केवल तथ्य-जांच (fact-checking) पर छोड़ना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि फर्जी खबरों को फैलाना और फिर उसका समाधान बेचना व्यापारिक हितों का संकेत देता है जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है। राजीव कुमार ने सोशल मीडिया कंपनियों से आग्रह किया कि वे जिम्मेदारी से काम करें और भ्रामक सामग्री को रोकें।उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स को स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का मंच बने रहना चाहिए न कि झूठ और फर्जी खबरों का केंद्र। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सूचनाओं तक पहुंच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया है। लेकिन अब इन्हें गलत उपयोग करके लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस को भारत के जीवंत लोकतंत्र का उत्सव बताते हुए देशवासियों से मतदान के प्रति जागरूक और सक्रिय रहने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी और मतदान के अधिकार के महत्व पर जोर देते हुए कहा “राष्ट्रीय मतदाता दिवस हमारे जीवंत लोकतंत्र का उत्सव है। यह हर नागरिक को मतदान का अधिकार उपयोग करने और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने की शक्ति देता है। मैं चुनाव आयोग के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना करता हूं।”
गौरतलब है कि हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस, 1950 में स्थापित चुनाव आयोग के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर 1951-52 के पहले आम चुनावों को याद करते हुए बताया कि उस समय भारत के लोकतंत्र को लेकर कई संदेह व्यक्त किए गए थे। उन्होंने कहा, “कुछ लोग शंका कर रहे थे कि भारत का लोकतंत्र टिक पाएगा या नहीं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र इन शंकाओं को गलत साबित करते हुए मजबूत बना है। उन्होंने कहा, “भारत लोकतंत्र की जननी है।”प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने तकनीक का उपयोग कर लोगों की शक्ति को मजबूत किया है। उनकी यह प्रतिबद्धता प्रशंसा के योग्य है।” इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अधिक संख्या में मतदान करने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं देशवासियों से अनुरोध करता हूं कि वे बड़ी संख्या में मतदान करें और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें।” यह संदेश उनके हाल ही “मन की बात” रेडियो कार्यक्रम में भी शामिल था।2011 से हर साल मनाए जा रहे राष्ट्रीय मतदाता दिवस का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से नए मतदाताओं को मतदान के लिए प्रोत्साहित करना है। इस दिन का लक्ष्य मतदान के प्रति जागरूकता फैलाना और अधिक से अधिक नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है। यह दिवस मतदाताओं को उनकी भूमिका और जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए देश के भविष्य को आकार देने की दिशा में प्रेरित करता है। -
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर केंद्र सरकार ने 942 कर्मचारियों को बहादुरी और सेवा पदक से सम्मानित करने की घोषणा की। ये कर्मचारी पुलिस, आग सेवा, होम गार्ड, सिविल डिफेंस (HG&CD) और सुधारात्मक सेवाओं में कार्यरत हैं। इनमें से 5 कर्मचारियों को मरणोपरांत बहादुरी पदक दिया गया है जिनमें पुलिस उपाधीक्षक हिमायूं मुज़म्मिल(जम्मू और कश्मीर पुलिस), हेड कांस्टेबल गिरिजेश कुमार उद्दे (सीमा सुरक्षा बल), कांस्टेबल सुनील कुमार पांडेय (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल), हेड कांस्टेबल रवि शर्मा (सशस्त्र सीमा बल) और चयन ग्रेड फायरमैन सतीश कुमार रैना शामिल हैं।
कुल मिलाकर 95 बहादुरी पदक, 101 राष्ट्रपति पदक और 746 मेरिटोरियस सर्विस मेडल (MSM) दिए गए हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से उन कर्मियों को सम्मानित किया गया है जिन्होंने साहसिक कार्य किए और सेवा में उत्कृष्टता प्रदर्शित की। बहादुरी पदक उन कर्मियों को दिए गए हैं जिन्होंने जीवन और संपत्ति को बचाने, अपराधों को रोकने या अपराधियों को पकड़ने के दौरान असाधारण साहस का प्रदर्शन किया। इन 95 बहादुरी पदकों में से 28 कर्मी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, 28 जम्मू और कश्मीर, 3 उत्तर-पूर्व और 36 अन्य क्षेत्रों से हैं। इन बहादुरी पुरस्कारों में से 78 पुलिस सेवा के कर्मियों को और 17 आग सेवा के कर्मियों को सम्मानित किया गया है।वहीं राष्ट्रपति पदक कुल 101 कर्मियों को दिए गए हैं, जिनमें 85 पुलिस सेवा, 5 आग सेवा, 7 सिविल डिफेंस और होम गार्ड सेवा और 4 सुधारात्मक सेवा के कर्मी शामिल हैं। मेरिटोरियस सर्विस मेडल कुल 746 कर्मचारियों को दिया गया है जिनमें से 634 पुलिस सेवा, 37 आग सेवा, 39 सिविल डिफेंस और होम गार्ड सेवा, और 36 सुधारात्मक सेवा के कर्मी शामिल हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य उन कर्मचारियों की बहादुरी, समर्पण और सेवा को सम्मान देना है जिन्होंने देश की सुरक्षा और भलाई के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन उत्कृष्टता के साथ किया है।




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