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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए आगामी चुनाव में कुल 719 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरेंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक नामांकन प्रक्रिया के बाद कुल 981 उम्मीदवारों में से 719 के नामांकन स्वीकार किए गए हैं। 17 जनवरी को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी जबकि 18 जनवरी को नामांकनों की जांच की गई।
चुनाव आयोग ने बताया कि 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कुल 1,040 नामांकन दाखिल किए गए थे। इनमें से 477 नामांकन रद्द कर दिए गए। सबसे ज्यादा उम्मीदवार नई दिल्ली विधानसभा सीट पर हैं जहां 23 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, सबसे कम उम्मीदवार कस्तूरबा नगर और पटेल नगर सीटों पर हैं, जहां केवल 5-5 उम्मीदवार मैदान में हैं। नई दिल्ली विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ बीजेपी के प्रवेश वर्मा (पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे) और कांग्रेस के संदीप दीक्षित (पूर्व सीएम शीला दीक्षित के बेटे) चुनावी मैदान में हैं।कस्तूरबा नगर सीट पर सबसे कम नामांकन हुए जहां कुल 9 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। यहां से AAP ने रमेश पहलवान, बीजेपी ने नीरज बसोया, और कांग्रेस ने अभिषेक दत्त को उम्मीदवार बनाया है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं दिल्ली में चुनावी मुकाबला तेज हो रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। गौरतलब है कि दिल्ली में 5 फरवरी को एक ही चरण में मतदान होगा और मतगणना 8 फरवरी को होगी। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि बीजेपी ने 8 सीटें जीती थीं - प्रयागराज । महाकुंभ मेले के क्षेत्र में रविवार को भीषण आग लग गई। पुलिस के अनुसार, इस घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह घटना सेक्टर 19 में हुई। घटना के बाद काले धुएं के घने बादल उठते हुए देखे गए जिससे मेले में मौजूद श्रद्धालुओं और अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। महाकुंभ 2025 के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटना का वीडियो साझा किया गया।सोशल मीडिया अकाउंट महाकुंभ 2025 ने एक्स हैंडल पोस्ट में लिखा “बहुत दुखद! महाकुंभ में आग की घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। हम मां गंगा से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।”फिलहाल दमकलकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मेले में लोगों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने महाकुंभ मेले जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
- नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-चीन संबंध 2020 के बाद की सीमा स्थिति से उत्पन्न जटिलताओं से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं और संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किए जाने की जरूरत है। पिछले दशकों में चीन के साथ भारत के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले नीति-निर्माताओं की ‘‘गलत व्याख्या'', चाहे वह ‘‘आदर्शवाद या व्यावहारिक राजनीति की अनुपस्थिति'' से प्रेरित हो, ने चीन के साथ न तो सहयोग और न ही प्रतिस्पर्धा में मदद की है। मुंबई में नानी पालकीवाला व्याख्यान में उन्होंने कहा कि पिछले दशक में इसमें स्पष्ट रूप से बदलाव आया है। विदेश मंत्री ने कहा कि आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता दोनों पक्षों के बीच संबंधों का आधार बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किए जाने की आवश्यकता है। जयशंकर ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब भारत के अधिकतर देशों के साथ रिश्ते मजबूत हो रहे हैं, भारत को चीन के साथ संतुलन स्थापित करने में एक विशेष चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि दोनों देश उन्नति कर रहे हैं।'' विदेश मंत्री ने कहा कि निकटतम पड़ोसी और एक अरब से अधिक आबादी वाले दो समाजों के रूप में, भारत-चीन के बीच संबंध कभी भी आसान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सीमा विवाद, इतिहास के कुछ बोझ और भिन्न सामाजिक-राजनीतिक प्रणालियों ने इसे और भी तीखा बना दिया। पिछले नीति-निर्माताओं द्वारा गलत व्याख्या, चाहे वह आदर्शवाद से प्रेरित हो या व्यावहारिक राजनीति की गैरमौजूदगी से, वास्तव में चीन के साथ न तो सहयोग और न ही प्रतिस्पर्धा में मदद मिली है।'' उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दशक में इसमें स्पष्ट रूप से बदलाव आया है। अभी, संबंध 2020 के बाद की सीमा स्थिति से उत्पन्न जटिलताओं से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा कि भले ही इस पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किए जाने की आवश्यकता है। जयशंकर ने कहा कि भारत को ‘‘चीन की बढ़ती क्षमताओं की अभिव्यक्ति'' के लिए तैयार रहना होगा, खासकर उनके लिए जो सीधे भारत के हितों पर असर डालते हैं। जयशंकर ने तर्क दिया कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की व्यापक राष्ट्रीय क्षमता का अधिक तेजी से विकास आवश्यक है। पिछले साल 21 अक्टूबर को बनी सहमति के बाद, भारतीय और चीनी सेनाओं ने डेमचोक और देपसांग के दो शेष गतिरोध स्थलों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली।
- नयी दिल्ली. दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण रोधी उपाय हटाए जाने के बाद सभी स्कूलों को एक नोटिस जारी कर ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने 17 जनवरी को एक नोटिस में कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के चरण तीन के तहत उपायों को तत्काल प्रभाव से उठाने का फैसला किया है। इसमें कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप निजी और सरकारी दोनों स्कूलों में सभी कक्षाएं तत्काल प्रभाव से ऑफलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। डीओई ने नोटिस में कहा, ‘‘...डीओई, एनडीएमसी (नई दिल्ली नगर पालिका परिषद), एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) और दिल्ली छावनी बोर्ड के सभी सरकारी, सरकारी गैर सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को सूचित किया जाता है कि ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करें। इस प्रकार सभी स्कूलों में सभी कक्षाएं तत्काल प्रभाव से प्रत्यक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी।'' नियमित कक्षाओं के सोमवार से बहाल होने की उम्मीद है।
- महाकुंभ नगर. उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय ने महाकुंभ अध्ययन के लिए छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने मेला क्षेत्र में अनंत माधव मार्ग सेक्टर-सात स्थित दूरस्थ शिक्षा जागरूकता शिविर में शनिवार को इस पाठ्यक्रम की शुरुआत की। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात मिश्रा ने बताया कि शनिवार को महाकुंभ में दूरस्थ शिक्षा की प्रासंगिकता विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने महाकुंभ क्षेत्र में कुंभ अध्ययन में प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को प्रवेश दिलाने के लिए प्रचार अभियान चलाया जाएगा। दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के पूर्व निदेशक एस सी मिश्र इस प्रमाण पत्र कार्यक्रम के पहले विद्यार्थी बने। मिश्रा ने बताया कि शिविर में ही 100 से ज्यादा लोगों ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराया है।कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय ने पहली बार कुंभ अध्ययन में प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है। इसमें महाकुंभ से संबंधित सभी जानकारियां समाहित की गई हैं। महाकुंभ आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को इसमें प्रवेश लेना चाहिए जिससे उन्हें कुंभ के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया का ध्यान प्रयागराज के महाकुंभ पर है। ऐसे में मुक्त विश्वविद्यालय ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए उन सभी के लिए छह महीने का यह प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया है। इसमें कुंभ के आयोजन से लेकर सभी तथ्यों को समाहित गया है। कुलपति ने बताया कि इसका अध्ययन पूरा करने के बाद विश्वविद्यालय की तरफ से एक विशिष्ट प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इस प्रमाण पत्र कार्यक्रम से संबंधित जानकारी महाकुंभ में सभी सेक्टर में श्रद्धालुओं को कुंभ गाइड के माध्यम से पर्चा वितरित करके दी जाएगी।
- सूरत. उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने कहा कि पर्याप्त रोजगार अवसरों की कमी, अनसुलझी सीमा का मुद्दा और मानव विकास सूचकांक में स्थिति कुछ ऐसी कमजोरियां हैं, जिन्हें 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए दूर करने की जरूरत है। सूरत साहित्य महोत्सव-2025 में शुक्रवार को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत ऐट 2047'' विषय पर अपने विचार रखते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने कहा कि 2047 के भारत को अपनी प्रतिक्रिया प्रणाली को एकीकृत करना चाहिए, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में अपनी आंतरिक समस्याओं के साथ ही वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) का भी समाधान करना चाहिए, ताकि सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी ताकत हमारी भौगोलिक स्थिति, युवा, स्थिर आर्थिक विकास और सेवा क्षेत्र - फार्मा और आईटी- हैं, जो प्रगति कर रहे हैं। हमारी कमजोरियां क्या हैं? पहली, जलवायु परिवर्तन; दूसरी, हमारा विनिर्माण क्षेत्र मजबूत नहीं है; तीसरी, हमारे पास रोजगार के उतने अवसर नहीं हैं। हमारी सीमा, चाहे चीन के साथ हो या पाकिस्तान के साथ, अभी तक वहां स्थिरता नहीं आई है। हमें मानव विकास सूचकांक में सुधार करने की जरूरत है।'' लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने कहा, ‘‘समाज में आंतरिक संघर्षों पर काम करना, तनाव कम करना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना हमारी जिम्मेदारी है। तभी आंतरिक सुरक्षा भी बेहतर होगी।'' उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत का प्रतिक्रिया तंत्र एकीकृत होना चाहिए और आंतरिक समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, नेपाल और वामपंथी उग्रवाद से संबंधित मुद्दों को सुलझाना होगा, ताकि सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव बना रहे और भारत 2047 तक विकसित बन जाए। उप सेनाध्यक्ष ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है और यदि राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा एक साथ नहीं होंगी तो भारत कभी प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा के बिना बाह्य और आंतरिक सुरक्षा हासिल नहीं की जा सकती और पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, मानव और ऊर्जा सुरक्षा सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उप सेना प्रमुख ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया को विभिन्न गुटों में विभाजित किया जा रहा है और देश वैश्वीकरण के खिलाफ जाकर क्षेत्रीय गुट बना रहे हैं। सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भारत भी अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा, विश्व भर में संघर्षों, तथा हाइब्रिड, आर्थिक और साइबर युद्ध - सोशल मीडिया के माध्यम से विमर्श की लड़ाई से प्रभावित है, जो सभी को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम कोई रणनीति बनाते हैं तो अमेरिका, चीन और रूस जैसी महाशक्तियां हमारे लिए महत्वपूर्ण होती हैं।'' उन्होंने कहा कि जहां तक बाहरी सुरक्षा का सवाल है, भारत और चीन के बीच लंबी और अशांत सीमा है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को जन्म दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘आपने अक्टूबर-नवंबर 2024 में चीन के साथ हमारी वार्ता के बारे में अवश्य सुना होगा, जिसके कारण 2020 के गलवान गतिरोध के बाद हमारे बीच तनाव थोड़ा कम हुआ है और चीन इस क्षेत्र से चला गया है। वर्तमान में स्थिति लगभग सामान्य है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है।'' उन्होंने कहा कि चीन भारत के रणनीतिक पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश और म्यांमा में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक बाह्य सुरक्षा का सवाल है, भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों को 2047 तक पूरी तरह विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जहां तक आंतरिक सुरक्षा का सवाल है अनुच्छेद 370 और हाल के चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य हो गई है और वहां हाल में हुए चुनाव में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘अब वहां निर्वाचित सरकार है। यहां तक कि जब भी छिटपुट आतंकवादी घटनाएं होती हैं, तो सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, पुलिस और राज्य प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जहां तक पूर्वोत्तर का सवाल है, आप मणिपुर में हिंसा के बारे में जानते हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हमें उम्मीद है कि इसमें समय लगेगा, लेकिन हम जल्द से जल्द स्थिति को नियंत्रित कर लेंगे।'' उप सेना प्रमुख ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और आंतरिक सुरक्षा बलों ने वामपंथी उग्रवाद पर अच्छी तरह से नियंत्रण किया है और लाल गलियारे में अधिकतम विकास देखा गया है। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने कहा कि 2047 में भारत ऐसा देश होगा, जहां दुनिया भर के लोग रहना चाहेंगे और इसकी अर्थव्यवस्था 30 हजार अरब डॉलर से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें हर तरह से आंतरिक शांति मिलनी चाहिए और पर्यावरण, ऊर्जा, मानव और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी होना चाहिए।''
- भोपाल. मध्य प्रदेश में सीहोर जिले के ‘स्वामित्व योजना' के एक लाभार्थी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए उन्हें बताया कि इस कार्यक्रम (स्वामित्व योजना) के चलते उसके जीवन में कौने-कौन से सकारात्मक बदलाव आए। केंद्रीय योजना के तहत संपत्ति कार्डों के ई-वितरण के दौरान प्रधानमंत्री ने पिपलिया मीरा ग्राम पंचायत के लाभार्थी मनोहर मेवाड़ा से वर्चुअल माध्यम से बातचीत की। ‘स्वामित्व योजना' (एक तरह की भूमि योजना) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का स्पष्ट स्वामित्व स्थापित करना है, जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग करके भूमि के पार्सल को मैप किया जाएगा। मोदी ने मेवाड़ा से योजना के तहत मिले संपत्ति कार्ड से उनके जीवन में आये बदलाव के बारे में जानकारी ली। मेवाड़ा ने कहा कि जब उनके पास जमीन का स्वामित्व दिखाने के कागजात नहीं होंगे तो कोई भी बैंक उन्हें ऋण नहीं देगा। मेवाड़ा ने प्रधानमंत्री को बताया कि संपत्ति कार्ड मिलने के बाद उन्होंने एक ‘डेरी फार्म' शुरू करने के लिए आसानी से 10 लाख रुपये का ऋण मिल गया। लाभार्थी ने कहा कि उनका परिवार अब डेयरी से प्रति माह 30,000 रुपये कमाता है जिसमें से 16,000 रुपये ऋण चुकाने में खर्च हो जाते हैं। मोदी ने मेवाड़ा के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता है कि देश के हर नागरिक का सिर गर्व से ऊंचा हो और उसका जीवन आसान हो। मुख्यमंत्री मनोहर यादव सिवनी के पॉलिटेक्निक कॉलेज के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और लाभार्थियों को ई-स्वामित्व कार्ड वितरित किये। अलग-अलग जिलों में हुए ऐसे ही कार्यक्रमों में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया।
- नयी दिल्ली. मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु समेत देश के आठ प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री में 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की गिरावट आई है। बिक्री में गिरावट का मुख्य कारण महाराष्ट्र एवं हरियाणा में चुनाव और संपत्ति की बढ़ी हुई कीमतें हैं। रियल एस्टेट परामर्श मंच प्रॉपटाइगर डॉट कॉम की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।‘रियल इनसाइट रेजिडेंशियल: एनुअल राउंडअप 2024' शीर्षक से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस विश्लेषण में शामिल आठ में से तीन शहर महाराष्ट्र और हरियाणा में हैं जहां पर बीती तिमाही में विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए। हालांकि दिल्ली-एनसीआर को छोड़कर सालाना आधार पर बाकी सभी सात शहरों शहरों में घरों की बिक्री में गिरावट आई है। दिल्ली-एनसीआर में दिसंबर तिमाही में घरों की बिक्री 50 प्रतिशत बढ़कर 9,808 इकाई रही जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 6,528 था। चुनावों का असर नई आपूर्ति पर भी दिखा। बीते वर्ष की चौथी तिमाही में नयी परियोजनाएं पेश करने में 33 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका कारण राज्यों में चुनावों के कारण परियोजनाओं की मंजूरी की गति का धीमा होना है। आठ में से पांच शहरों में पिछली तिमाही के दौरान पेश नई परियोजनाओं की संख्या घटी है। संपत्तियों की खरीद-बिक्री या किराये पर लेन-देन की जानकारी देने वाले मंच हाउसिंग डॉट कॉम और प्रॉपटाइगर डॉटकॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ध्रुव अग्रवाल ने कहा, “अक्टूबर-दिसंबर में त्योहारों के दौरान बिक्री में तिमाही आधार पर वृद्धि हुई। इसके बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में बिक्री और नई पेशकश में पिछले साल के मुकाबले गिरावट देखी गई।” उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, प्रमुख राज्यों के चुनावों और देशभर में संपत्ति की कीमतों में वृद्धि जैसे कारणों से कंपनियों और खरीदारों, दोनों ने इंतजार करने का रुख अपनाया। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई क्षेत्र (एमएमआर) में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 33,617 घरों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 48,553 घरों की बिक्री हुई थी। पुणे में इस दौरान 31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,240 घरों की बिक्री हुई। वहीं बेंगलुरु में 23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 13,236 घरों की बिक्री हुई, हैदराबाद में 36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 13,179 घरों की बिक्री हुई और चेन्नई में पांच प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,073 घरों की बिक्री हुई।
- नयी दिल्ली. देश के आठ राज्यों में सामुदायिक स्तर पर किये गए रक्त सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले एक अध्ययन के अनुसार, ‘एनीमिया' के मामलों का एक बड़ा हिस्सा विटामिन बी12 की कमी और वायु प्रदूषण जैसे कारणों से जुड़ा पाया गया। हालांकि, एनीमिया आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाओं की कमी के कारण होता है।‘यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन' में प्रकाशित अध्ययन से यह भी पता चला कि आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया कुल मामलों के एक तिहाई से भी कम हैं। 'विटामिन बी12 इंडिया स्टडी' और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन), हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने कहा कि उनके निष्कर्षों से पता चलता है कि एनीमिया के कारण के रूप में आयरन की कमी मुख्य रूप से जिम्मेदार नहीं लगती। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, इसतरह ‘‘इन परिणामों का एनीमिया की रोकथाम और सुधार के लिए नीतिगत निहितार्थ हैं।'' अध्ययन के लेखकों के अनुसार, एनीमिया, एक रक्त विकार है जिसमें स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं अपर्याप्त होती हैं या खराब हो रही होती हैं। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और माना जाता है कि यह और भी बदतर होती जा रही है, जैसा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के रुझानों से पता चला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण सर्वेक्षण एनीमिया के कारण की जांच नहीं करते हैं, क्योंकि वे केवल उंगली से लिये गए रक्त के नमूने के आधार पर केशिका रक्त हीमोग्लोबिन को मापते हैं। अध्ययन दल ने 2019 के व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण का हवाला दिया, जिसमें नसों से लिए गए भारतीय बच्चों के रक्त के नमूनों में हीमोग्लोबिन के स्तर का विश्लेषण किया गया था, और एनीमिया की कम व्यापकता पाई गई थी। हालांकि, अध्ययन के लेखकों ने कहा कि आयरन की कमी को एनीमिया का प्रमुख कारण माना जाता है। इस अध्ययन के लिए, पूर्वोत्तर, मध्य, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों से किशोरों, वयस्कों और बुजुर्गों सहित कुल 4,613 लोगों को शामिल किया गया था। अध्ययन के लेखकों के अनुसार, ‘‘नसों से लिए गये रक्त के नमूने पर आधारित सर्वेक्षण में, पुरुषों और महिलाओं में एनीमिया की मौजूदगी, उन्हीं राज्यों में केशिका रक्त-आधारित एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण के परिणामों से स्पष्ट रूप से कम पाया गया।'' उन्होंने लिखा, ‘‘महिलाओं में, आठ राज्यों में एनीमिया का प्रसार 41.1 प्रतिशत था, जबकि एनएफएचएस-5 में 15 से 49 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए यह 60.8 प्रतिशत था।''
- भारत विकासशील देशों के लिए है आदर्श: साउलोनयी दिल्ली. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने कहा है कि जलवायु सेवाओं की गुणवत्ता के मामले में भारत बहुत अच्छी स्थिति में है और वह विकास एजेंडे में मजबूत मौसम विज्ञान सेवाओं की अहम भूमिका को समझता है। साउलो ने यहां बताया कि मौसम विज्ञान और जलवायु सेवाएं अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिनमें साधन, परिवहन, पर्यटन, ऊर्जा और कृषि आदि शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि भारत के विपरीत, कई विकासशील देशों ने अभी तक इन सेवाओं का अपने विभिन्न क्षेत्रों के साथ पूरी तरह से समेकन नहीं किया है। अक्षय ऊर्जा में मौसम सेवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए साउलो ने कहा, ‘‘यदि आप अक्षय ऊर्जा - पवन, सौर और जलविद्युत - के बारे में सोचते हैं, तो वे सभी मौसम पर निर्भर करती हैं। अक्षय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत मौसम सेवा की जरूरत है। भारत पूरे विकास एजेंडे में मौसम सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका को समझता है लेकिन कई विकासशील देश अभी तक वहां नहीं पहुंचे हैं।'' यहां भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना के 150 वर्षगांठ साल समारोह में हिस्सा ले रहीं साउलो ने कहा, ‘‘मौसम विज्ञान और जलवायु सेवाओं की गुणवत्ता के मामले में भारत बहुत अच्छी स्थिति में है, जिसका श्रेय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग को जाता है।'' उन्होंने कहा कि आईएमडी का 150 वर्ष पूरा होना एक अद्वितीय उपलब्धि है।उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे विकासशील देश से मेरी अपेक्षा है कि वह मौसम सेवाओं की भूमिका को सुदृढ़ बनाए, न केवल टीवी पर मौसम पूर्वानुमान के प्रदाता के रूप में, बल्कि जलवायु अनुकूलन, उत्पादकता, ऊर्जा परिवर्तन और लोगों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी के प्रदाता के रूप में भी।'' सटीक मौसम पूर्वानुमान के व्यापक आर्थिक निहितार्थों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अच्छे मौसम पूर्वानुमान का मूल्य निवेशकों, व्यवसायों, उत्पादकता, साधन, परिवहन, पर्यटन (और) हर चीज के लिए बहुत बड़ा है। क्या आप किसी ऐसी गतिविधि के बारे में सोच सकते हैं जो मौसम से प्रभावित न हो?'' उन्होंने विकासशील देशों के संदर्भ में चेतावनी दी, ‘‘यदि आप निर्णय लेने की प्रक्रिया में मौसम संबंधी जानकारी का उपयोग नहीं करते हैं, तो आप अपने व्यवसाय से सर्वोत्तम लाभ प्राप्त करने का अवसर खो देते हैं।''
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका के जाफना में एक सांस्कृतिक केंद्र का नाम तमिल कवि और संत तिरुवल्लुवर के नाम पर रखे जाने का स्वागत किया। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह महान तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि के साथ भारत और श्रीलंका के लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक, भाषाई, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का प्रमाण है। श्रीलंका स्थित भारतीय दूतावास ने उस समारोह की तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें सांस्कृतिक केंद्र का नामकरण ‘तिरुक्कुरल' के लेखक के नाम पर किया गया। ‘तिरुक्कुरल' तमिल भाषा का एक प्रसिद्ध साहित्य है, जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर सूक्तियां दी गई हैं।
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राजौरी/जम्मू. जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शनिवार को राजौरी जिले के बधाल गांव का दौरा किया जहां दो महीने से भी कम समय में रहस्यमयी परिस्थितियों में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। उपमुख्यमंत्री चौधरी ने शोकसंतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें निर्णायक जांच कराने का आश्वासन दिया। उपमुख्यमंत्री चौधरी ने शोक संतप्त परिवार के लोगों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह गांव, जम्मू कश्मीर और देश के लिए एक बड़ी त्रासदी है। कोई भी सरकार नहीं चाहेगी कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों की मृत्यु हो।'' चौधरी ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वासन दिया है कि सरकार जारी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मौतें किसी स्वभाविक कारण से हुई हैं, तो सरकार इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। लेकिन अगर यह अन्य कारण से हुई है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। हम पता लगाएंगे कि इन सभी लोगों की जान कैसे गई। हमें उम्मीद है कि वास्तविकता जल्द ही सबके सामने आ जाएगी।'' राजौरी के कोटरंका उपमंडल के बधाल गांव में पिछले साल दिसंबर से अब तक तीन परिवारों के सोलह सदस्यों की मौत हो चुकी है और इनमें से सात लोगों की मौत रविवार से अब तक हुई है। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों के तीन घरों को सील कर दिया है और उनके 21 करीबी रिश्तेदारों को कड़ी निगरानी में रखने के लिए सरकारी आवास में स्थानांतरित किया गया है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल मौतों के पीछे के कारणों की जांच कर रहा है। चौधरी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नजर रख रहे हैं और यह पता लगाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं कि ये मौतें स्वभाविक कारणों से हुई हैं या नहीं।'' उन्होंने कहा, ‘‘प्रभावित परिवारों को मुआवजे का प्रारंभिक भुगतान कर दिया गया है।''
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महाकुंभ नगर. सबसे अधिक 5.30 लाख नागा संन्यासियों वाले जूना अखाड़ा में शनिवार को नागा दीक्षा की शुरुआत हो गई और प्रथम चरण में 1,500 अवधूतों को नागा संन्यासी की दीक्षा दी जा रही है। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय मंत्री श्री महंत चैतन्य पुरी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि गंगा के तट पर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के अवधूतों को नागा दीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले चरण में 1,500 अवधूतों को नागा दीक्षा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जूना अखाड़ा, संन्यासी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा संन्यासियों वाला अखाड़ा है। इस अखाड़े में निरंतर नागा साधुओं की संख्या बढ़ रही है। नागा संन्यासी बनने में सबसे पहले साधक को ब्रह्मचारी के रूप में रहना होता है और उसे तीन साल तक गुरुओं की सेवा करनी होती है और अखाड़ा के नियमों को समझना होता है। पुरी ने बताया कि इस अवधि में ब्रह्मचर्य की परीक्षा ली जाती है। यदि अखाड़ा और उस व्यक्ति का गुरु इस बात को लेकर निश्चिंत हो जाते हैं कि वह दीक्षा का पात्र हो गया है तो उसे ब्रह्मचारी से महापुरुष और फिर अवधूत बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ में गंगा किनारे उसका मुंडन कराने के साथ उसे 108 बार गंगा नदी में डुबकी लगवाई जाती है और अंतिम प्रक्रिया में उसका पिंडदान और दंडी संस्कार आदि शामिल होता है। पुरी ने बताया कि अखाड़े की धर्म ध्वजा के नीचे अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर उसे नागा दीक्षा देते हैं। प्रयागराज के महाकुंभ में दीक्षा लेने वालों को राज राजेश्वरी नागा, उज्जैन में दीक्षा लेने वालों को खूनी नागा, हरिद्वार में दीक्षा लेने वालों को बर्फानी और नासिक वालों को खिचड़िया नागा के नाम से जाना जाता है। इन्हें अलग-अलग नाम से केवल इसलिए जाना जाता है, जिससे उनकी यह पहचान हो सके कि किसने कहां दीक्षा ली है।
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नई दिल्ली। भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में वे अमेरिकी के अरबपति, राजनेता और मशहूर हस्तियों से मुलाकात करेंगे। उद्योगपति मुकेश अंबानी को ट्रंप के खास मेहमान के तौर पर समारोह का न्योता मिला है।
बताया जाता है कि मुकेश अंबानी शनिवार को वॉशिंगटन डीसी पहुंच गए हैं। उन्होंने ट्रंप के साथ कैंडल लाइट डिनर में भी भाग लिया। सूत्रों ने बताया कि ट्रंप के साथ कैंडल लाइट डिनर में भाग लेने वाले वे एकमात्र भारतीय थे। इस दौरान उन्होंने नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी ऊषा वेंस से भी मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अंबानी दंपती ट्रंप परिवार के निजी आमंत्रित सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेंगे। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।ट्रंप के परिवार से हैं अंबानी के अच्छे संबंधभारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी के परिवार के ट्रंप के परिवार के साथ अच्छे संबंध हैं। 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट के लिए हैदराबाद आईं तो अंबानी वहां मौजूद थे। जब इवांका राष्ट्रपति ट्रंप की सलाहकार थीं। फरवरी 2020 में जब ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में भारत आए थे तब भी अंबानी मौजूद थे।अनंत-राधिका के प्री वेडिंग में भी आईं थी इवांकामार्च 2024 में गुजरात के जामनगर में मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी और मंगेतर राधिका मर्चेंट के प्री वेडिंग समारोह में भी डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका, उनके पति जेरेड कुशनर और उनकी बड़ी बेटी अरेबेला रोज शामिल हुए थे। उन्होंने समारोह में पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर भाग लिया था। वे यहां तीन दिन तक रहे थे।समारोह में भारत का दबदबाशपथ ग्रहण समारोह में वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए जहां एक ओर अमेरिकी उद्योगपतियों और मशहूर हस्तियों ने आयोजन समिति को एक मिलियन डॉलर से अधिक का चंदा दिया है। वहीं दूसरी ओर भारत का दबदबा बरकरार रखते हुए मुकेश अंबानी को ट्रंप ने व्यक्तिगत निमंत्रण दिया है। शपथ ग्रहण समारोह में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनकी पत्नी जिल बाइडन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और उनके पति जेंटलमैन डग एम्हॉफ, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन भी भाग लेने की संभावना है।ये भी होंगे शामिलसमारोह में टेक उद्यमी एलन मस्क, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस, एप्पल के मुख्य कार्यकारी टिम कुक और मार्क जुकरबर्ग, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, गूगल के मुख्य कार्यकारी सुंदर पिचाई भाग लेंगे। इनकी कंपनियों ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का चंदा दिया है। -
नई दिल्ली। भारत आने वाले दो वित्तीय वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। विश्व बैंक की जनवरी 2025 की ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स (GEP) रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था अगले दो वित्तीय वर्षों 2025-26 और 2026-27 में 6.7% की स्थिर दर से बढ़ने की संभावना है। यह वृद्धि दर वैश्विक औसत 2.7% की तुलना में कहीं अधिक है जो भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती भूमिका को दिखाती है।
रिपोर्ट में भारत की इस मजबूत वृद्धि का श्रेय सेवा क्षेत्र की मजबूती और विनिर्माण क्षेत्र में आए सुधार को दिया गया है। सरकार की नीतियां, जैसे बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, टैक्स प्रणाली का सरलीकरण, और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, घरेलू विकास को तेज कर रही हैं। इसके अलावा, भारत की आर्थिक वृद्धि ऐसे समय में हो रही है जब चीन जैसे बड़े प्रतिस्पर्धी की वृद्धि दर 2025 में 4% तक धीमी पड़ने का अनुमान है।हाल ही में जारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट भी भारत की स्थिर और मजबूत आर्थिक स्थिति की पुष्टि करती है। आईएमएफ ने 2025 और 2026 के लिए भारत की विकास दर 6.5% रहने का अनुमान जताया है। दोनों रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करतीं हैं कि भारत न केवल वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है बल्कि इनसे उभरकर आर्थिक विकास में अग्रणी बना हुआ है।केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, स्टार्टअप इंडिया, और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, भारत को वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की ओर ले जा रही हैं। ये पहल न केवल बुनियादी ढांचे और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं बल्कि विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नए अवसर भी पैदा कर रही हैं। विश्व बैंक के ग्लोबल इकोनाॅमिक प्राॅस्पेक्ट्स (GEP) रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में निजी उपभोग में तेजी आने की संभावना है जो मजबूत श्रम बाजार, आसान ऋण उपलब्धता और कम मुद्रास्फीति से प्रेरित होगी। साथ ही, निवेश वृद्धि भी जारी रहेगी जिसे निजी क्षेत्र के निवेश, बेहतर कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और अनुकूल वित्तीय स्थितियों का समर्थन मिलेगा।वहीं, वैश्विक परिदृश्य में उभरती अर्थव्यवस्थाओं का योगदान तेजी से बढ़ा है। 2000 में वैश्विक जीडीपी में इनका हिस्सा 25% था, जो अब 45% तक पहुंच गया है। भारत की यह उपलब्धि सरकार की दूरदर्शी नीतियों, डिजिटल परिवर्तन, और समावेशी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का परिणाम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव 20 जनवरी से स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह आयोजन भारत के समावेशी विकास और डिजिटल परिवर्तन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दावोस रवाना होने से पहले अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से वंचित समुदायों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने समावेशी विकास पर जोर दिया है जो समाज के सबसे निचले तबके के लोगों तक भी पहुंचे। बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन, शौचालय, गैस कनेक्शन, नल का पानी और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार जैसी योजनाएं दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।”अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में समावेशी विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, “दुनिया भारत की आर्थिक नीतियों, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और टेक्नोलॉजी के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने की हमारी पहल को समझने के लिए उत्सुक है।”डिजिटल इंडिया अभियान के तहत भारत ने जिस तरह से डिजिटल परिवर्तन किया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है। इसके जरिए सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाया गया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2025 में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 वैश्विक नेता हिस्सा लेंगे। इस बार भारत की ओर से पांच केंद्रीय मंत्री, तीन मुख्यमंत्री और अन्य राज्यों के कई मंत्री इसमें शामिल होंगे।यह पांच दिवसीय बैठक आर्थिक विकास को तेज करने, नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने और सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित होगी। भारत की भागीदारी का उद्देश्य वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना, अधिक निवेश आकर्षित करना और भारत को टिकाऊ विकास और तकनीकी नवाचार में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ के 118वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 25 जनवरी को मनाए जाने वाले नेशनल वोटर्स डे पर चुनाव आयोग की सफलता की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को सुनिश्चित किया है जिससे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और मजबूत हुई है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से लोकतंत्र के प्रति जनता की प्रतिबद्धता को सराहा और देशवासियों से अपील की कि वे हर चुनाव में बढ़-चढ़कर वोट करें क्योंकि यह लोकतंत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश में पहली बार 1951-52 में चुनाव हुए थे जब कुछ लोगों को संदेह था कि क्या भारत का लोकतंत्र जीवित रहेगा। लेकिन जनता ने इसे साबित कर दिया कि भारत वास्तव में “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि इस बार ‘मन की बात’ के एपिसोड को गणतंत्र दिवस के एक सप्ताह पहले, यानी तीसरे रविवार को प्रसारित किया जा रहा है, क्योंकि अगले रविवार को गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ की भी बधाई दी और संविधान के निर्माताओं को नमन किया।प्रधानमंत्री मोदी ने प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है जहां गरीब और अमीर सभी एक साथ आते हैं। यह मेला भारत के विभिन्न हिस्सों से जुड़े लोगों को एक साथ जोड़ता है और हमारी नदियों तथा धार्मिक मान्यताओं को सम्मानित करता है। उन्होंने कहा कि इस बार कुंभ मेला में युवाओं की भागीदारी अधिक देखने को मिल रही है, जो कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।प्रधानमंत्री मोदी ने 11 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर भी बात की और कहा कि यह दिन भारतीय संस्कृति और विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने विकास के साथ-साथ इन परंपराओं को सहेजने और उनसे प्रेरणा लेने की बात की ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे जुड़ी रह सकें। -
बस्ती (उप्र) .बस्ती जिले में एक कार और डंपर की टक्कर हो गई जिससे कार में सवार एक पुलिस उप निरीक्षक की मौत हो गई तथा हेड कांस्टेबल घायल हो गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि उप निरीक्षक हरि नारायण मिश्रा (57) गोरखपुर से कार से पैकोलिया थाने आ रहे थे तभी रास्ते में हर्रैया क्षेत्र में हर्रैया-बभनान मार्ग पर उनकी कार एक डंपर से टकरा गई। उसने बताया कि इस घटना में मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गयी।
पुलिस ने बताया कि कार चला रहे हेड कांस्टेबल राम कुमार दुबे घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसने बताया कि मिश्रा पैकोलिया थाने में तैनात थे। उसने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। -
महाकुम्भ नगर. महाकुम्भ मेले में पहली बार देश के दिग्गज कॉरपोरेट घराने अदाणी समूह का साथ पाकर इस्कॉन उत्साहित है और अब वह पहले की तुलना में कहीं अधिक क्षमता से श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद उपलब्ध करा रहा है। यहां सेक्टर 19 में हर्षवर्धन मार्ग पर स्थित इस्कॉन के शिविर में धार्मिक संगठन के निदेशक (सीएसआर) मधुकांत दास ने बताया कि एक रसोई में एक सत्र में 30 से 35 हजार लोगों का खाना तैयार होता है। एक दिन में तीन सत्रों में कुल मिलाकर एक लाख से अधिक लोगों के लिए खाना तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन का भोजन प्रसाद पूरी तरह से संतुलित है जिसमें दाल, छोले या राजमा, सब्जी और रोटी-चावल के साथ ही मीठे में हलवा या बूंदी के लड्डू शामिल हैं। ये भोजन मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी और गोबर के कंडों की आग पर तैयार किए जाते हैं जिससे इनका स्वाद लाजवाब है। दास ने बताया कि पूरे प्रयागराज में 40 केंद्रों पर भोजन प्रसाद वितरण किया जा रहा है जिनमें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कई होल्डिंग एरिया शामिल हैं जहां मुख्य स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को रोका जाता है। उन्होंने बताया कि भोजन प्रसाद के वितरण के लिए 100 गाड़ियां लगाई गई हैं जिन्हें अदाणी समूह की तरफ से उपलब्ध कराया गया है। अदाणी समूह और इस्कॉन की ओर से तीन से साढ़े तीन हजार स्वयंसेवक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरी परियोजना पर्यावरण-अनुकूल है और 45 दिनों तक चलने वाले इस मेले में कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस्कॉन के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अदाणी समूह का साथ मिलने से संगठन की भोजन प्रसाद वितरण की क्षमता आठ से 10 गुना बढ़ गई है। अडाणी समूह के एक अधिकारी ने कहा कि महाकुम्भ मेले में सेवा देने को लेकर कंपनी के लोगों में भारी उत्साह है। सेवा देने के लिए कंपनी ने पोर्टल खोला और एक ही दिन में 4,000 लोगों ने आवेदन कर दिया। पोर्टल बंद करने पर कर्मचारियों ने हंगामा भी कर दिया। इसकी वजह यह है कि उनमें महाकुम्भ का हिस्सा बनने की तीव्र इच्छा है। उन्होंने बताया कि अदाणी समूह की तरफ से कंपनी उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी भी कुंभ मेले में सेवा देने के लिए आ रहे हैं। कंपनी से 100-150 के बैच में कर्मचारी और अधिकारी सेवा देने आ रहे हैं। दास ने बताया कि मेला और आसपास के क्षेत्रों में सफाई में लगे 15,000 कर्मचारियों को भी भोजन प्रसाद इस्कॉन द्वारा वितरित किया जा रहा है। इस्कॉन ने पूरे प्रयागराज में तीन रसोई घर स्थापित किए हैं जो रेलवे जंक्शन के पास खुशरोबाग, सेक्टर छह में नेत्रकुंभ और सेक्टर 19 में इस्कॉन मंदिर परिसर में स्थित हैं और यहीं से भोजन प्रसाद तैयार कर वितरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में इस्कॉन के 750 केंद्र हैं जहां कई गौशालाएं है। इन्हीं गौशालाओं से गोबर के कंडे यहां लाए गए हैं। हर कुंभ में इस्कॉन की भागीदारी को देखते हुए मेला से छह महीने पहले से गोबर के कंडे बनाने शुरू कर दिए जाते हैं।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ में 22 जनवरी को मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सभी मंत्री बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े अहम मामलों पर फैसला हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्री संगम में स्नान भी कर सकते हैं।
इससे पहले वर्ष 2019 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली पहली सरकार में 29 जनवरी को कुम्भ के दौरान प्रयागराज में मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई थी। महाकुम्भ 13 जनवरी से शुरू हुआ है और 26 फरवरी तक जारी रहेगा -
नयी दिल्ली. भले ही अभिभावक अपनी बेटियो और बात मानने वाले बच्चों का पक्ष अधिक लेते हो पर आम तौर पर छोटी संतान ही माँ-बाप की अधिक चहेती होती हैं। पारिवारिक गतिशीलता का विश्लेषण करने वाले अध्ययनों की समीक्षा में यह दावा किया गया है। हालांकि, बड़े बच्चों को अक्सर अधिक स्वायत्तता दी जाती है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता कम नियंत्रण वाले हो जाते हैं। लगभग 19,500 प्रतिभागियों पर आधारित 30 अध्ययनों और 14 डेटाबेस की समीक्षा में यह पाया गया। समीक्षा के प्रमुख लेखक और अमेरिका स्थित ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर अलेक्जेंडर जेन्सेन ने कहा, ‘‘दशकों से शोधकर्ता जानते हैं कि माता-पिता के पक्षपातपूर्ण व्यवहार का बच्चों पर स्थायी परिणाम हो सकता है।'' यह समीक्षा ‘साइकोलॉजिकल बुलेटिन' पत्रिका में प्रकाशित हुई है।
जेन्सेन ने कहा, ‘‘यह अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि किन बच्चों को पक्षपात का शिकार होने की अधिक संभावना है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है।'' शोधकर्ताओं के अनुसार, माता-पिता का पक्षपात, जिसमें माता-पिता एक बच्चे को दूसरे से अधिक पसंद करते हैं, कई तरीकों से व्यक्त हो सकता है जैसे कि वे बच्चों के साथ कैसे बातचीत करते हैं, उन पर कितना पैसा खर्च करते हैं या उन पर कितना नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग व्यवहार से विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है खासकर कम पसंदीदा बच्चे पर। इसके अलावा इससे तनावपूर्ण पारिवारिक रिश्ते भी पैदा हो सकते हैं। माता और पिता, दोनों के ही बेटियों का पक्ष लेने की अधिक संभावना रहती है। लेखकों ने लिखा, ‘‘माता-पिता ने बेटियों का पक्ष लेने की सूचना दी।'' टीम ने कहा कि इसके अलावा जो बच्चे अधिक कर्तव्यनिष्ठ (जिम्मेदार) और आज्ञकारी थे उन्हें भी तरजीह दी गई, जिससे पता चला कि माता-पिता के लिए इन बच्चों को संभालना आसान हो सकता है और इसलिए वे उनके प्रति अधिक सकारात्मक रुख अपना सकते हैं। लेखकों ने लिखा, ‘‘कर्तव्यनिष्ठ और आज्ञाकारी बच्चों को भी अधिक पसंदीदा व्यवहार मिला।''
उन्होंने कहा कि जब जन्म क्रम आधारित औसत की बात आती है, तो छोटे भाई-बहनों को कुछ हद तक तरजीह मिलती है। जेन्सेन के अनुसार, माता-पिता के बड़े भाई-बहनों को अधिक स्वायत्तता देने की संभावना रहती है, संभवतः इसलिए क्योंकि वे अधिक परिपक्व थे। उन्होंने कहा, ‘‘इन बारीकियों को समझने से माता-पिता और चिकित्सकों को संभावित रूप से हानिकारक पारिवारिक पैटर्न को पहचानने में मदद मिल सकती है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी बच्चे प्यार और समर्थन महसूस करें।'' जेन्सेन ने कहा कि अध्ययन परस्पर संबद्धता पर आधारित है इसलिए यह नहीं बताता कि माता-पिता कुछ बच्चों का पक्ष क्यों ले सकते हैं। हालांकि, यह उन संभावित क्षेत्रों पर प्रकाश डालता है जहां माता-पिता को अपने बच्चों के साथ बातचीत के प्रति अधिक सचेत रहने की आवश्यकता हो सकती है। -
बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने महेंद्रगिरि के ‘प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स' में एक परीक्षण केन्द्र में अपने विकास तरल इंजन को फिर से चालू करने संबंधी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इसरो ने शनिवार को यह जानकारी दी। विकास इंजन का उपयोग प्रक्षेपण यानों के तरल चरणों (लिक्विड स्टेज) को शक्ति प्रदान करने में किया जाता है। इसरो की ओर से जारी एक बयान के अनुसार यह परीक्षण 17 जनवरी को किया गया। यह चरणों की पुनर्प्राप्ति के वास्ते प्रौद्योगिकियों के विकास में मील का पत्थर है। विभिन्न परिस्थितियों में इंजन को पुनः चालू करने के लिए कई परीक्षण किए जा रहे हैं।
इसरो ने कहा,‘‘ इस परीक्षण में इंजन को 60 सेकंड के लिए चालू किया गया फिर इसे 120 सेकंड के लिए बंद किया गया, फिर पुनः चालू किया गया। परीक्षण के दौरान इंजन के सभी मानक सामान्य और अपेक्षा के अनुरूप थे। इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में भी यह परीक्षण किया गया था। इसके अलावा, इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने शुक्रवार को इसरो के एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के ‘कोर लिक्विड स्टेज' (एल110) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को स्वामित्व योजना के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्डों का वितरण किया। इस कार्यक्रम में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांव शामिल हुए। पीएम मोदी ने बताया कि बीते पांच सालों में करीब डेढ़ करोड़ लोगों को संपत्ति कार्ड सौंपें जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन ग्रामीण भारत और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। स्वामित्व योजना जो अप्रैल 2020 में शुरू हुई थी का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का कानूनी अधिकार देना है।
पीएम मोदी ने बताया कि संपत्ति कार्ड के जरिए लोगों को उनकी जमीन और घर का कानूनी प्रमाण मिलता है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलता है बल्कि प्रॉपर्टी के अधिकार मिलने से गरीबी कम करने में भी मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में संपत्ति अधिकार की कमी एक बड़ी समस्या है, और इसे हल करना आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और स्वास्थ्य संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी राइट्स (संपत्ति के अधिकार) इन समस्याओं को हल करने और गरीबी को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। स्वामित्व योजना के तहत गांवों की जमीनों का आधुनिक तकनीक से सर्वेक्षण और मैपिंग की जाती है, जिससे लोगों को उनकी संपत्तियों का कानूनी प्रमाण मिलता है। इस योजना के जरिए ग्रामीण भारत में पारदर्शिता और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आज शनिवार को प्रयागराज महाकुम्भ पहुंचकर संगम में डुबकी लगाई। संगम स्नान के बाद पत्रकारों के बातचीत करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि परमात्मा ने मुझे यह अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज प्रयागराज, संगम में स्नान करने के बाद मैं स्वयं को बहुत ही कृतार्थ महसूस कर रहा हूं। महाकुंभ भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म की आध्यात्मिक अनुभूति का पर्व है।
रक्षामंत्री ने कहा कि यह गंगा, यमुना व सरस्वती के साथ सनातन धर्म की आध्यात्मिक, वैज्ञानिकता और साथ ही साथ सामाजिक समरसता का भी संगम है। विश्व के सबसे बड़े जन समागम का कुशल संचालन जिस तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि मैं यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसके लिए हार्दिक बधाई देता हूं। राजनाथ सिंह ने संगम स्नान की फोटो अपने सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर भी साझा की है। राजनाथ सिंह के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी व अनिल राजभर के अलावा राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने संगम स्नान के बाद आरती में भी शामिल हुए। - केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागरिक-केंद्रित दूरसंचार पहलों का किया शुभारंभनई दिल्ली। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पूरे देश में दूरसंचार पहुंच, सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में आज कई नागरिक-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में संचार साथी मोबाइल ऐप, राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 का शुभारंभ और डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंग सुविधा का उद्घाटन शामिल था।संचार साथी मोबाइल ऐप एक उपयोगकर्ता-अनुकूल प्लेटफ़ॉर्म है जिसे दूरसंचार सुरक्षा को मज़बूत करने और नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है। मोबाइल अनुप्रयोग जारी करते हुए, श्री सिंधिया ने इस बात पर प्रकाश डाला, "यह पहल न केवल अवसरों तक पहुंच प्रदान करती है बल्कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करती है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संचार साथी ऐप सभी के लिए दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा, सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।संचार साथी मोबाइल ऐप, एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जो उपयोगकर्ताओं को अपने दूरसंचार संसाधनों को सुरक्षित रखने और दूरसंचार धोखाधड़ी से निपटने के लिए महत्वपूर्ण उपाय प्रदान करता है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में सम्मिलित हैं:· चक्षु - संदिग्ध धोखाधड़ी संचार की रिपोर्टिंग (एसएफसी): उपयोगकर्ता ऐप का उपयोग करके और सीधे मोबाइल फोन लॉग से संदिग्ध कॉल और एसएमएस की रिपोर्ट कर सकते हैं।· अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों को जानें : नागरिक अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की पहचान और प्रबंधन कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इनका अनधिकृत उपयोग न हो।· खोए/चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट को बंद करना : खोए या चोरी हुए मोबाइल उपकरण को तुरंत बंद, खोजना और प्राप्त किया जा सकता है।· मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता जानें : यह ऐप मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता सत्यापित करने का एक आसान तरीका प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उपयोगकर्ता असली उपकरण खरीदें।देश में 90 करोड़ से अधिक स्मार्ट फोन उपयोगकर्ताओं के साथ, संचार साथी मोबाइल ऐप का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्मार्टफोन पर बस कुछ क्लिक से इन महत्वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो।राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 का दृष्टिकोण दस्तावेज़ जारी करके इसका शुभारंभ किया। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एनबीएम 2.0 एनबीएम 1.0 की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत लगभग 8 लाख टावर स्थापित किए गए थे। उन्होंने कहा, "ब्रॉडबैंड उपभोक्ता 66 करोड़ से बढ़कर 94 करोड़ हो गए हैं। यह वृद्धि एनबीएम 2.0 की शुरूआत के लिए प्रमुख बिंदु और आधार के रूप में कार्य करती है।"केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे बताया, "आज भारत दूरसंचार और डिजिटल दोनों क्षेत्रों में वैश्विक अग्रणी भूमिका में है। 531 मिलियन से अधिक भारतीय अब इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग से जुड़े हैं। हमारे मजबूत दूरसंचार नेटवर्क द्वारा संचालित यूपीआई के माध्यम से, हमने पिछले साल 172 बिलियन लेनदेन की सुविधा प्रदान की, जिसकी राशि लगभग 247 लाख करोड़ थी। देश की वृद्धि आंतरिक रूप से हमारे दूरसंचार नेटवर्क की मजबूती से जुड़ी हुई है। इसी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन शुरू किया गया था।"उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनबीएम 2.0 का प्राथमिक उद्देश्य देश भर के शेष 1.7 लाख गांवों को जोड़ना और महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर 100 ग्रामीण परिवारों में से कम से कम 60 को ब्रॉडबैंड संपर्कता की सुविधा मिले। इसके अलावा, हमारा लक्ष्य 100 एमबीपीएस की न्यूनतम फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड हासिल करना है, जिससे ग्रामीण भारत के लिए एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार हो सके।"ई-गवर्नेंस से लेकर आपदा प्रबंधन तक, एनबीएम 2.0 हर क्षेत्र को बदलने का वादा करता है और इसमें देश भर में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। यह पहल केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे में नहीं है - यह एक डिजिटल रूप से समावेशी भविष्य के लिए आधार बनाने के संबंध में है, जहां संपर्कता हर नागरिक को सशक्त बनाती है। जैसे-जैसे भारत इस डिजिटल यात्रा पर आगे बढ़ रहा है, मिशन स्पष्ट है: एक जुड़ा हुआ, लचीला और दीर्घकालीन भारत बनाना जहां प्रौद्योगिकी और नवाचार सभी की समृद्धि के लिए सफल हो।एनबीएम 2.0 का लक्ष्य भारत को डिजिटल परिवर्तन के एक नए युग में ले जाना है। प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप , यह सभी के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और सार्थक संपर्कता प्रदान करके भारत की एक वैश्विक ज्ञान समाज के रूप में परिकल्पना करता है। एनबीएम 1.0 (2019-2024) की सफलता के आधार पर, एनबीएम 2.0 के मुख्य लाभ निम्नलिखित होंगे:2030 तक 2.70 लाख गांवों तक परिचालन ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) संपर्कता का विस्तार करना, वर्तमान ~50,000 से 95 प्रतिशत अपटाइम के साथ।2030 तक स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और पंचायत कार्यालयों जैसे 90 प्रतिशत प्रमुख संस्थानों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड गति में सुधार करना - राष्ट्रीय औसत को नवंबर 2024 में 63.55 एमबीपीएस से बढ़ाकर 2030 तक न्यूनतम 100 एमबीपीएस करना।2026 तक पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टरप्लान प्लेटफॉर्म (पीएमजीएस) पर सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के स्वामित्व वाले फाइबर नेटवर्क की 100 प्रतिशत मैपिंग प्राप्त करना और अतिरिक्त भारतनेट परियोजना की योजना के लिए पीएमजीएस का उपयोग करना।व्यापार में सुगमता के लिए - राइट ऑफ वे आवेदन के औसत निपटान समय को 60 दिनों (अभी) से घटाकर 2030 तक 30 दिन करना। 2019 में यह 449 दिन था।प्रति 100 जनसंख्या पर ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या को वर्तमान 45 से बढ़ाकर 2030 तक 60 करना।2030 तक 30 प्रतिशत मोबाइल टावरों को सतत ऊर्जा से संचालित करने का लक्ष्य प्राप्त करना।भूमिगत दूरसंचार अवसंरचना और अन्य उपयोगिताओं की सुरक्षा के लिए 'कॉल बिफोर यू डिग' (सीबीयूडी) मोबाइल ऐप के उपयोग को बढ़ाने पर काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने मार्च 2023 में इसका शुभारंभ किया था।दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत जारी नए आरओडब्ल्यू नियम, 2024 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों अर्थात केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नगर पालिकाओं के साथ सहयोग करें।देश के कोने-कोने में 5जी नेटवर्क की सुविधा प्रदान करने तथा 6जी के भविष्योन्मुखी नेटवर्क के लिए, देश भर में मजबूत, उपयोग के लिए तैयार स्ट्रीट फर्नीचर अवसंरचना के निर्माण के लिए कार्य करना।दूरसंचार नेटवर्क और अन्य उपयोगिताओं के रखरखाव और लागत दक्षता में सुधार करने के लिए सभी रैखिक परियोजनाओं में सामान्य/साझा करने योग्य दूरसंचार वाहिनी और उपयोगिता गलियारों के लिए सभी हितधारकों के साथ काम करना।देश के दूर-दराज, सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक बुनियादी ढांचे को तैनात करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, आपदाओं, युद्धों और अन्य आपात स्थितियों के दौरान ब्रॉडबैंड संपर्कता बढ़ाने और ब्रॉडबैंड नेटवर्क की विश्वसनीयता, उत्तरजीविता और लचीलेपन में सुधार के लिए ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (ओपीजीडब्ल्यू) जैसी विद्युत क्षेत्र की परिसंपत्तियों का लाभ उठाना।डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंगडिजिटल भारत निधि (डीबीएन), जिसे पहले यूएसओएफ के नाम से जाना जाता था, ने अपने व्यापक मोबाइल टावर परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दूरसंचार अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे कठिन क्षेत्रों में डीबीएन द्वारा वित्तपोषित दूरसंचार टावर विशिष्ट टीएसपी के ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं जिन्होंने डीबीएन के वित्तपोषण से मोबाइल टावर स्थापित किया है। अभी तक, अन्य टीएसपी के ग्राहकों को डीबीएन द्वारा वित्तपोषित टावर का लाभ नहीं मिल पाया है।कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4G मोबाइल साइटों पर इंट्रा सर्किल रोमिंग (आईसीआर) का भी उद्घाटन किया। उन्होंने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "यह एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें हमारे तीन टीएसपी - बीएसएनएल, एयरटेल और रिलायंस - सभी डीबीएन-वित्तपोषित साइटों पर एक-दूसरे के बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने के लिए एकजुट हैं। लगभग 27,836 ऐसी साइटों के साथ, हम न केवल संपर्कता सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि देश भर के ग्राहकों को पसंद की स्वतंत्रता भी प्रदान कर रहे हैं।"डीबीएन द्वारा वित्तपोषित 4जी मोबाइल साइटों पर टीएसपी के बीच आईसीआर से कई टीएसपी के ग्राहक एक ही डीबीएन द्वारा वित्तपोषित टावर से 4जी सेवाओं का आनंद ले सकेंगे, बजाय इसके कि विभिन्न टीएसपी के लिए कई टावर हों। इसलिए, ऑपरेटरों और सरकार के कम पूंजीगत व्यय निवेश के माध्यम से अधिक ग्राहकों को लाभ मिलता है। यह पहल लगभग 27,000 टावरों द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले 35,400 से अधिक ग्रामीण और दूरदराज के गांवों के लिए निर्बाध 4जी संपर्कता का वादा करती है।दूरसंचार विभाग की नागरिक-केंद्रित पहलों पर प्रकाश डालते हुए दूरसंचार सचिव, डॉ.नीरज मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि संचार साथी मोबाइल एप्लीकेशन व्यक्तियों को सशक्त बनाएगा और घोटालों की समस्या को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि डीबीएन द्वारा वित्तपोषित साइटों पर इंट्रा ऑपरेटर रोमिंग विशेष रूप से देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए उपयोगी होगी।इस कार्यक्रम में सचिव (दूरसंचार) और डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) के अध्यक्ष डॉ. नीरज मित्तल, डीसीसी के सदस्य (सेवाएं) श्री रोहित शर्मा, और डीसीसी के सदस्य (प्रौद्योगिकी) श्री संजीव के. बिदवई, अपर सचिव (टी) श्री गुलजार नटराजन और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।संचार साथी के बारे मेंदूरसंचार विभाग की कई नागरिक केंद्रित पहलों में से संचार साथी पहल ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मई 2023 में जारी किए गए संचार साथी पोर्टल ( www.sancharsaathi.gov.in ) ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और 9 करोड़ से अधिक परिदर्शन, 2.75 करोड़ धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शनों को काटने और 25 लाख से अधिक खोए या चोरी हुए उपकरणों को सुरक्षित पाने करने जैसे उल्लेखनीय मील के पत्थर हासिल किए हैं। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराधों से जुड़े 12.38 लाख व्हाट्सएप खातों को बंद कर दिया गया है और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए 11.6 लाख अवैध बैंक खातों को बंद किया गया है। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय आने वाली धोखाधड़ी कॉल रोकथाम प्रणाली की शुरुआत की, जो धोखाधड़ी वाली कॉल्स से जुड़े साइबर अपराधों से निपटने में अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है। इन सक्रिय उपायों से फर्जी डिजिटल गिरफ्तारियां, कर धोखाधड़ी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का छद्मवेश धारण करने जैसी धोखाधड़ी को रोकने में काफी मदद मिली है, जिससे नागरिकों को साइबर खतरों से सुरक्षा मिली है।दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, राज्य पुलिस, I4सी, जीएसटीएन, बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, सेबी, सीबीडीटी, डीजीजीआई, आईबी, सीबीआई, वाट्सअप आदि सहित 520 से अधिक संगठनों को सहायता प्रदान करते हुए साइबर अपराध से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ इसके सहयोग ने राष्ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा को मजबूत किया है।ये पहल डिजिटल दूरी को कम करने और भारत की वैश्विक डिजिटल स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए दूरसंचार विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।एनबीएम 1.0 के बारे मेंयह मिशन राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 का भाग है। मिशन का उद्देश्य डिजिटल संचार अवसंरचना के विकास को तेज़ करना, डिजिटल दूरी को मिटाना, डिजिटल सशक्तिकरण और समावेशन को सुविधाजनक बनाना और सभी के लिए ब्रॉडबैंड की सस्ती और सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करना है। यह मिशन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुँच में सुधार, आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने और डिजिटल संपर्कता के माध्यम से सामाजिक समावेशन को बढ़ाने के सरकार के व्यापक दृष्टिकोण के साथ भी जुड़ा हुआ है।एनबीएम 1.0 की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:सितंबर 2024 तक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) नेटवर्क का विस्तार 41.91 लाख किलोमीटर तक किया गया।दूरसंचार टावरों की संख्या बढ़कर 8.17 लाख तथा ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 941 मिलियन हो गई।"गतिशक्ति संचार" पोर्टल के माध्यम से प्रमुख राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) मुद्दों का समाधान करना और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।भूमिगत दूरसंचार अवसंरचना की सुरक्षा के लिए “कॉल बिफोर यू डिग” (सीबीयूडी) मोबाइल ऐप की शुरूआत।














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