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प्रयागराज। महाकुंभ में 10 देशों के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संगम क्षेत्र में स्थित विभिन्न अखाड़ों का दौरा किया। इस यात्रा में उन्होंने न केवल महाकुंभ के धार्मिक महत्व को समझा बल्कि भारतीय संस्कृति के अद्भुत पहलुओं को भी अनुभव किया। त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के बाद प्रतिनिधि दल ने समूचे महाकुंभ क्षेत्र का दौरा किया, जिससे उन्हें इस विशाल धार्मिक आयोजन की व्यापकता देखने को मिली।
भव्य इंतजाम के लिए योगी सरकार की जमकर प्रशंसा कीअंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने दुनिया के इस सबसे बड़े आयोजन के भव्य इंतजाम के लिए योगी सरकार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महाकुंभ दुनिया को एकता का संदेश दे रहा है। भारतीय संस्कृति को देखने और समझने के लिए सभी देशों के लोगों को यहां महाकुंभ नगर जरूर आना चाहिए।कुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजनसंयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रतिनिधि सैली एल अजाब ने कहा कि वो मध्य पूर्व से भारत आई हैं। यह एक अद्भुत क्षण है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। यहां सब कुछ पूरी तरह से व्यवस्थित है। उन्होंने महाकुंभ की भव्यता की तारीफ करते हुए बताया कि यह आयोजन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को एकता का संदेश दे रहा है। उन्हें यहां करोड़ों श्रद्धालुओं और उनकी विधिवत सुरक्षा व्यवस्था को देखकर भारतीय संस्कृति की महानता का अहसास हुआ।अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि संतों के विचारों से प्रभावित हुएअंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि दल ने विभिन्न अखाड़ों का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने साधु-संतों से मुलाकात की और महाकुंभ के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जाना। साधु-संतों ने महाकुंभ की प्राचीन परंपराओं, अखाड़ों की भूमिका और भारतीय संस्कृति की महिमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि संतों के विचारों से गहरे प्रभावित हुए और उन्होंने भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।महाकुंभ सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता के प्रतीकमहाकुंभ का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ में भी एकता का प्रतीक है। महाकुंभ के दौरान 10 देशों के 21 प्रतिनिधियों ने इस आयोजन की भव्यता और उसकी वैश्विक पहचान को नजदीक से महसूस किया। महाकुंभ ने दुनिया को यह संदेश दिया कि दुनिया के विभिन्न कोनों से लोग एकत्रित हो सकते हैं, भले ही उनकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अलग-अलग क्यों न हो।विदेशी प्रतिनिधि भारतीय संस्कृति को देखकर अभिभूत नजर आएमहाकुंभ में फिजी, फिनलैंड, गुयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि दल ने महाकुंभ का दौरा करके भारतीय संस्कृति की विविधता और धार्मिक एकता का अनुभव किया। सभी यहां की संस्कृति से अभिभूत नजर आए। उनके लिए यह यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुभव है, बल्कि एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर में हिस्सा लेने का भी एक शुभ अवसर है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025’ का उद्घाटन करेंगे। यह देश का सबसे बड़ा मोबिलिटी एक्सपो है जो मोबिलिटी क्षेत्र के सभी पहलुओं को एक मंच पर लाने का प्रयास करेगा। यह एक्सपो 17 से 22 जनवरी तक तीन स्थानों भारत मंडपम और यशोभूमि (दिल्ली) और इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (ग्रेटर नोएडा) पर आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में 9 शो, 20 से अधिक कॉन्फ्रेंस और पवेलियन होंगे। इसके साथ ही, विभिन्न राज्यों के विशेष सत्रों में मोबिलिटी क्षेत्र में उनकी नीतियों और योजनाओं को पेश किया जाएगा।
यह आयोजन वैश्विक महत्व पर केंद्रित रहेगा जिसमें दुनियाभर से प्रदर्शक और विजिटर शामिल होंगे। यह एक उद्योग-नेतृत्व वाली और सरकार-समर्थित पहल है जिसे इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) भारत और अन्य साझेदार संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।गौरतलब है कि भारत में ऑटोमोबाइल की बिक्री ने 2024 में 11.6% की वृद्धि दर्ज की, जिससे कुल बिक्री 2.5 करोड़ यूनिट पर पहुंच गई। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों की बिक्री में 14.5% की बढ़ोतरी के कारण हुई जिसमें 1.95 करोड़ यूनिट्स की बिक्री हुई। यात्री वाहनों और तीन-पहिया वाहनों ने भी रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की है। 2024 में, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार बना रहा। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में, यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों और तीन-पहिया वाहनों ने अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज किए। -
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले की सुनवाई 13 फरवरी को करेगा। जस्टिस जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अब इस मामले पर आगे कोई स्थगनादेश नहीं दिया जाएगा। 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 बोगी में आग लगाई गई थी जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी। साबरमती एक्सप्रेस अयोध्या से कारसेवकों को लेकर आ रही थी।
आपको बता दें, इस मामले में गुजरात सरकार के अलावा कई दोषियों ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। गुजरात सरकार ने कहा है कि वो उन 11 दोषियों की फांसी की सजा की मांग कर रहा है जिनकी सजा कम कर उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया है।27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 बोगी में आग लगाई गई थी जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी। साबरमती एक्सप्रेस अयोध्या से कारसेवकों को लेकर आ रही थी। गोधरा की इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए थे।इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2011 में 31 लोगों को दोषी करार दिया था। इनमें से 11 को फांसी की सजा और 20 को उम्रकैद की सजा हुई थी। इस मामले में 63 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया था। 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा मिले 11 दोषियों की सजा कम करते हुए उम्रकैद में बदल दिया था और 20 को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। - नयी दिल्ली। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 26 जनवरी को 76वें गणतंत्र दिवस समारोहों में मुख्य अतिथि होंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सुबियांतो राष्ट्रपति के तौर पर 25 से 26 जनवरी तक भारत की अपनी पहली यात्रा पर होंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदार के रूप में इंडोनेशिया, भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और हिंद-प्रशांत के उसकी दृष्टि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 25-26 जनवरी के दौरान भारत की राजकीय यात्रा करेंगे।’’ मंत्रालय के बयान में कहा गया, ‘‘राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोहों में मुख्य अतिथि भी होंगे।’’बयान के अनुसार, ‘‘भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों से मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।’’विदेश मंत्रालय ने कहा कि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति की आगामी यात्रा दोनों देशों के नेतृत्व को द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करने के साथ-साथ परस्पर हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी। भारत हर साल अपने गणतंत्र दिवस समारोह में शरीक होने के लिए विश्व नेताओं को आमंत्रित करता है।पिछले साल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोहों में मुख्य अतिथि थे, जबकि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी 2023 के समारोहों में शामिल हुए थे।कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 2021 और 2022 में गणतंत्र दिवस समारोहों में कोई मुख्य अतिथि नहीं थे।वर्ष 2020 में, ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो गणतंत्र दिवस समारोहों में मुख्य अतिथि थे। 2019 में, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि थे, वहीं 2018 में सभी 10 आसियान देशों के नेताओं ने समारोह में भाग लिया।वर्ष 2017 में, आबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समारोह में मुख्य अतिथि थे, वहीं 2016 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद समारोह में शरीक हुए थे।वर्ष 2015 में, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि थे। 2014 में, जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे समारोह में मुख्य अतिथि थे। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक 2013 में गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे।गणतंत्र दिवस समारोहों में भाग ले चुके राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों में फ्रांस के निकोलस सरकोजी (2008) और जैक्स शिराक (1998) तथा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं।नेल्सन मंडेला 1995 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में समारोह में शामिल हुए थे। गणतंत्र दिवस समारोहों में शामिल हुए अन्य विश्व नेताओं में 1999 में नेपाल के राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव, 2003 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी, 2011 में इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुसीलो बामबांग युधोयोनो और 1991 में मालदीव के राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी प्रदान की है। जल्द ही इसके अध्यक्ष और दो सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा।8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की करता है मंजूरी प्रदान
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कैबिनेट से जुड़ी पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आठवें वेतन आयोग को मंजूरी दी है। वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की मंजूरी प्रदान करता है। इसकी सिफारिशों पर सरकार कर्मचारियों को वेतन प्रदान करती है।इससे पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिश को 2016 में किया गया था लागूकेंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 1947 के बाद से नियमित अंतराल पर वेतन आयोग का गठन किया गया है। अब तक सात वेतन आयोग गठित किया जा चुके हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश को 2016 में लागू किया गया था। इसका कार्यकाल 2026 में पूरा होने जा रहा है। इससे पहले 2025 में समय से इसकी समीक्षा करने और तय समय पर सिफारिशें लागू करने के लिए वित्त आयोग की स्थापना की गई है। - नयी दिल्ली. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत मॉडल करियर सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र करियर के बारे में परामर्श प्रदान करेंगे और देश में विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी चाहने वाले छात्रों के लिए उद्योग के साथ संबंध जोड़ेंगे। उन्होंने ‘नौकरियों का भविष्य, ‘कल के कार्यबल को साझा करना: एक गतिशील दुनिया में विकास को आगे बढ़ाना' विषय पर आयोजित उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने गुरुग्राम में एक मॉडल करियर परामर्श केंद्र बनाने की सीआईआई की पहल की सराहना की। मांडविया ने कहा, ‘‘इस प्रकार का मॉडल केंद्र पीपीपी के अंतर्गत होना चाहिए...मैं सीआईआई, फिक्की और एसोचैम जैसे उद्योग मंडलों के माध्यम से जहां भी उनकी पहुंच हो, हर विश्वविद्यालय में एक करियर परामर्श केंद्र स्थापित करना चाहता हूं।'' उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र स्थापित करने के लिए परिसर विश्वविद्यालय देंगे। जबकि कौशल और काम उद्योग मंडल और स्थानीय उद्योग निकाय करेंगे। लॉजिस्टिक मदद रोजगार मंत्रालय उपलब्ध कराएगा। मंत्री ने कहा कि नौकरियों की कोई कमी नहीं है। नौकरी चाहने वालों को केवल दिशानिर्देश की जरूरत है।उन्होंने कहा, हमारे पास कौशल के साथ-साथ जनशक्ति भी है। हमें एक परिवेश बनाने की जरूरत है। धन सृजित करने वालों का सम्मान किया जाना चाहिए। जब धन सृजित होता है तब रोजगार सृजित होता है।'' मांडविया ने कहा कि नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर पांच लाख नौकरियां उपलब्ध हैं।उन्होंने सुझाव दिया, हमें कौशल विकास के बारे में सोचने की जरूरत है। हमें उपलब्ध काम और कौशल की मांग के आधार पर एक कुशल कर्मचारी तैयार करने की जरूरत है।'' मंत्री ने रोजगार की परिभाषा में बदलाव की जरूरत पर भी जोर देते हुए कहा कि अपने घर या अपने क्षेत्र में काम करके संपत्ति बनाने वाले लोग भी नियोजित हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कार्यबल विश्लेषण के लिए एक कार्यबल होना चाहिए।
- नयी दिल्ली. ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव पहली बार असम से बाहर आयोजित होगा। इसका विशेष संस्करण 6 से 8 फरवरी तक नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने कहा कि तीन दिन में 12 सत्रों में 42 वक्ता पूर्वोत्तर को परिभाषित करने वाली साहित्य, कला और विचारों की समृद्ध विरासत का बखान करेंगे। वक्ताओं में पुरस्कार विजेता लेखक अरूप कुमार दत्ता, रीता चौधरी और किनफम सिंग नोंगकिनरिह, लेखक-अनुवादक मित्रा फुकन और लेखक-कलाकार परिस्मिता सिंह शामिल हैं। भारत मंडपम के ‘आथर्स कॉर्नर' में आधारशिला ट्रस्ट यह महोत्सव आयोजित करेगा और इसके सत्र प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे से शुरू होंगे। आयोजकों ने कहा कि यह एक विशेष संस्करण है और यह महोत्सव अगले वर्ष असम में पुनः आयोजित किया जाएगा।महोत्सव का समापन कवि, गीतकार और शिक्षाविद मैत्रेयी पातर की प्रस्तुति के साथ संगीतमय माहौल में होगा। महोत्सव निदेशक एवं आधारशिला ट्रस्ट संस्थापक रीता चौधरी ने कहा कि इस महोत्सव में पुराने और नए लोगों को एक मंच प्रदान करके ‘‘हमारे राज्य, क्षेत्र और देश की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों की झलक पेश की जाएगी।
- मुंबई। एक्टर सैफ अली खान पर गुरुवार तड़के करीब 2:30 बजे के आस-पास एक चोर ने घर में घुसकर चाकू से अटैक किया। वारदात में सैफ घायल हो गए जिसके बाद उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। लीलावती अस्पताल के सीओओ डॉ. नीरज उत्तमानी के मुताबिक, सैफ की सर्जरी हो गई है। अब वे खतरे से बाहर हैं। मुंबई पुलिस का कहना है कि सैफ अली खान पर हमला करने वाला व्यक्ति उनके ही हाउसहेल्प से मिला हुआ था।डॉक्टर ने दिया अपडेटलीलावती अस्पताल के सीओओ डॉ. नीरज उत्तमानी ने बताया कि सैफ अली खान को आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। वह आईसीयू में डॉक्टर्स की निगरानी में रहेंगे।अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिले- मनोज तिवारीमनोज तिवारी ने सैफ अली खान पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह घटना बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। यह भयावह है कि सैफ अली खान को उनके ही घर में चाकू मार दिया गया। सबसे पहले मैं ईश्वर से सैफ की सुरक्षा और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह खबर सुनकर मैं बहुत व्यथित हूं।
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मुंबई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि 21वीं सदी के भारत का सैन्य सामर्थ्य अधिक सक्षम और आधुनिक होना उसकी प्राथमिकताओं में से एक है लेकिन इसका मकसद विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद की भावना है। मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में नौसेना के तीन अग्रणी युद्धपोतों आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत पूरे विश्व और खासकर ‘ग्लोबल साउथ' में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साथी के रूप में पहचाना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री शक्ति बन रहा है और दुनिया में एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में पहचाना जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा एक खुले, सुरक्षित, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन किया है। मोदी ने आज के दिन को भारत की समुद्री विरासत, नौसेना के गौरवशाली इतिहास और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए ‘बहुत बड़ा दिन' करार देते हुए कहा, ‘‘यह पहली बार हो रहा है, जब एक डिस्ट्रॉयर (विध्वंसक), एक फ्रिगेट और एक पनडुब्बी को एक साथ नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा रहा है। गर्व की बात है कि ये तीनों मेड इन इंडिया हैं।'' फ्रिगेट, युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाले जहाज होते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने नौसेना को नया सामर्थ्य और दृष्टिकोण दिया था और आज उनकी इस पावन धरती पर 21वीं सदी की नौसेना को सशक्त करने की तरफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘21वीं सदी के भारत का सैन्य सामर्थ्य भी अधिक सक्षम और आधुनिक हो, यह देश की प्राथमिकताओं में से एक है। जल हो, थल हो, नभ हो, गहरे समुद्र हों या फिर असीम अंतरिक्ष हो, हर जगह भारत अपने हितों को सुरक्षित कर रहा है। इसके लिए निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत पूरे विश्व और खासकर ग्लोबल साउथ में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साथी के रूप में पहचाना जा रहा है। भारत विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की भावना से काम करता है।'' ‘ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में पहले उत्तरदाता के रूप में उभरा है और पिछले कुछ महीनों में भारतीय नौसेना ने हजारों लोगों की जान बचाई है और लाखों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्गो को सुरक्षित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे दुनिया भर में भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत' पहल ने देश को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें मादक पदार्थों, हथियारों और आतंकवाद से समुद्र की सुरक्षा करने के लिए एक वैश्विक साझेदार बनना चाहिए तथा इसे सुरक्षित और समृद्ध बनाना चाहिए। भारत एक बड़ी नौवहन शक्ति बन रहा है और उसे एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में पहचाना जा रहा है।'' मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक गतिशीलता को दिशा देने में प्रमुख भूमिका निभाने जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्रीय जल की रक्षा करना, नौवहन की स्वतंत्रता और व्यापार आपूर्ति लाइनों और समुद्री मार्गों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण है।'' उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 33 जहाज और सात पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गई हैं और भारत का रक्षा उत्पादन 1.25 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है तथा 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात किए गए हैं। आईएनएस नीलगिरि परियोजना 17ए स्टील्थ फ्रिगेट श्रेणी का शीर्ष जहाज है जो शिवालिक श्रेणी के युद्धपोतों में महत्वपूर्ण उन्नयन को दर्शाता है। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित आईएनएस नीलगिरि में उन्नत विशेषताएं हैं। यह आधुनिक विमानन सुविधाओं से परिपूर्ण है तथा एमएच-60 आर समेत विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर का परिचालन कर सकता है। परियोजना 15 बी स्टील्थ विध्वंसक श्रेणी का चौथा और अंतिम युद्धपोत आईएनएस सूरत कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक पोतों की अगली पीढ़ी का सदस्य है। इसके डिजाइन और क्षमता में सुधार किए गए हैं और यह नौसेना के सतह पर रहने वाले बेड़े का महत्वपूर्ण सदस्य है। इसे भी आईएनएस नीलगिरि की तरह वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और एमडीएल में इसका विनिर्माण किया गया है। आईएनएस वाघशीर स्कॉर्पीन श्रेणी की परियोजना 75 के तहत छठा और अंतिम युद्धपोत है। यह बहुभूमिका वाला डीजल-विद्युत संचालित पोत है। तीनों युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है और इससे देश की रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बढ़ती दक्षता रेखांकित होती है। -
गांधीनगर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए विभिन्न योजनाओं को लागू किया, जिससे राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी पहुंचा। शाह ने गांधीनगर जिले के मनसा तालुका के अंबोद गांव में 241 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के बाद यह टिप्पणी की। इन परियोजनाओं में अंबोद में महाकाली माता मंदिर में एक कृत्रिम झील, एक चेक बांध और एक बैराज शामिल है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान जो योजनाएं शुरू कीं, उनसे उत्तरी गुजरात में भूजल स्तर बढ़ाने और पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, “गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र भाई ने राज्य की प्यास बुझाने का काम किया। जब मैं 1997 में पहली बार विधायक बना, तो उत्तर गुजरात के सभी विधायक बोरवेल के लिए अनुमति मांगते थे, लेकिन यह अनुमति नहीं मिलती थी, क्योंकि यह क्षेत्र एक ‘डार्क जोन' था। यहां भूजल स्तर 1,200 फीट से नीचे चला गया था।” गृह मंत्री ने दावा किया कि मोदी ने नर्मदा बांध परियोजना में कांग्रेस की ओर से पैदा की गई अड़चनों से निपटते हुए इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कहा, “मोदी ने नर्मदा योजना को पूरा करने के लिए संघर्ष किया और कांग्रेस द्वारा पैदा की गई अड़चनों पर पार पाया। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद नर्मदा बांध पर गेट लगाने का काम भी पूरा हो गया और आज इसका पानी हर घर तक पहुंच गया है।” शाह ने कहा कि मोदी ने समुद्र में बहकर आने वाले बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए भी काम किया और इसे गुजरात की 9,000 झीलों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मोदी ने सौराष्ट्र के हर गांव तक पानी पहुंचाने के लिए ‘सौनी योजना' की कल्पना की। गृह मंत्री ने कहा, “उत्तर गुजरात में पानी के संकट के चलते लोग चिंतित थे। मोदी ने इस क्षेत्र के लोगों को राहत देने के लिए सुजलाम सुफलाम योजना पेश की।” उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी को झीलों में प्रवाहित करके और साबरमती नदी पर 14 बांध बनाकर मोदी ने उत्तर गुजरात में भूजल स्तर बढ़ाने में मदद की। शाह ने कहा कि पानी से भरी नदी और झील भूजल स्तर को 40-50 फीट तक ऊपर ले जाने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लागू होने के बाद उत्तर गुजरात को अत्यधिक फ्लोराइड रहित पेयजल मिलना शुरू हो गया। गृह मंत्री ने कहा कि अंबोद में चेक डैम स्थानीय किसानों और बच्चों के जीवन में बदलाव लाएगा, जिन्हें पीने के पानी में फ्लोराइड के उच्च स्तर के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अंबोद में 550 साल पुराने मंदिर का भी विकास करेगी।
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महाकुम्भ नगर . कड़ाके की ठंड के बावजूद जोश और उत्साह से लबरेज श्रद्धालुओं ने बुधवार को महाकुम्भ में त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाई। ‘हर हर महादेव', ‘जय श्री राम' और ‘जय गंगा मैया' के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुओं ने संगम पर स्नान किया। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के निवासी 62 वर्षीय निबर चौधरी ने कहा, ‘‘मैंने पहली बार संगम में डुबकी लगाई है। डुबकी लगाने के बाद वास्तव में एक दम तरोताजा महसूस हुआ।'' चौधरी के साथ आए शिवराम वर्मा ने कहा कि उनका अनुभव अच्छा रहा और यहां प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की है। पहली बार यहां आईं लखनऊ निवासी नैंसी भी यहां की व्यवस्था को देखकर संतुष्ट नजर आईं। उन्होंने कहा, ‘‘महाकुम्भ में अब तक मेरा अनुभव अच्छा रहा है।''
पड़ोसी जिले फतेहपुर के निवासी अभिषेक ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर अनुभव अच्छा रहा''। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। कानपुर निवासी विजय कठेरिया ने महाकुम्भ में किए गए सुरक्षा इंतजाम की सराहना की।
उन्होंने कहा, ‘‘श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है।'' बुधवार को कोई स्नान पर्व नहीं रहने के बावजूद देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकुम्भ में शामिल होने के लिए संगम के पास एकत्रित होकर स्नान कर रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को विभिन्न अखाड़ों के संतों ने मकर संक्रांति के अवसर पर महाकुम्भ में पहला अमृत स्नान किया। मकर संक्रांति पर त्रिवेणी संगम में करीब 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भालेबाजी और तलवारबाजी से लेकर पूरे जोश में ‘डमरू' बजाने तक, उनके प्रदर्शन सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत उदाहरण थे। पुरुष नागा साधुओं के अलावा, महिला नागा संन्यासी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहीं।
बुधवार को घाट पर मौजूद कौशांबी के निवास महेश पासी ने अपने भाई और अन्य परिजनों के साथ गंगा में डुबकी लगाई। महेश ने कहा कि उनके परिवार ने मौसम अधिक ठंडा होने के कारण मकर संक्रांति के बाद यहां आने का फैसला किया। महेश ने कहा कि उनके परिवार में बच्चे पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति पर संगम में डुबकी लगाना चाहते थे, लेकिन बुजुर्गों ने सलाह दी कि इतनी ठंड में वहां रहने से बच्चे बीमार पड़ सकते हैं और भारी भीड़ में वे बिछड़ सकते हैं, इसलिए यह निर्णय किया गया कि मकर संक्रांति के बाद महाकुम्भ में चला जाए। महाकुम्भ मेला 26 फरवरी तक चलेगा। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पूछा कि क्या सरकारी खजाने से प्राप्त धन का इस्तेमाल गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुविधाएं बनाने के लिए किया जाना चाहिए या देश में साइकिल ट्रैक बिछाने के लिए। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने देश भर में अलग-अलग साइकिल ट्रैक बनाने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि देश में विकास एक समान नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, ‘‘हमें बताएं कि क्या सरकारी खजाने से प्राप्त धन का इस्तेमाल गरीबों के लिए आवासीय और शैक्षणिक सुविधाएं बनाने के लिए किया जाना चाहिए या इसके लिए (अलग-अलग साइकिल ट्रैक बनाने के लिए)?'' शीर्ष अदालत ने यह भी कहा, "सभी प्रमुख शहरों में गरीबों के लिए आवास सुविधाओं की गंभीर समस्या है। लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं। गरीबों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं, शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव है। क्या ये सभी प्राथमिक सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए या ये साइकिल ट्रैक?'' अदालत ने शुरुआत में याचिकाकर्ता के अनुरोध का संदर्भ दिया और आश्चर्य जताया कि क्या ऐसी राहत दी जा सकती है। पीठ ने कहा, ‘‘आप चाहते हैं कि पूरे भारत में अलग-अलग साइकिल ट्रैक बनाए जाएं। यह बहुत महत्वाकांक्षी है।'' याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कई राज्यों में साइकिल ट्रैक हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के एक गेट के बाहर भी साइकिल ट्रैक है, लेकिन मोड़ पर यह उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने चुनिंदा शहरों और कस्बों में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करने वाली अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना का हवाला दिया। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तरह का परमादेश (अलग साइकिल ट्रैक बनाने के लिए) कैसे जारी कर सकते हैं, यह याचिकाकर्ता का दिवास्वप्न है।" वकील ने सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मुद्दे का हवाला दिया और कहा कि अलग-अलग साइकिल ट्रैक होने से समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। पीठ ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तारीख निर्धारित की।
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महाकुंभ नगर. प्रयागराज के महाकुंभ मेले में आकर सुर्खियों में छाईं एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने अपने गुरु और पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि से मंगलवार को दीक्षा ले ली। स्वामी कैलाशानंद गिरि के मीडिया सलाहकार शगुन त्यागी ने ' एक न्यूज़ एजेंसी' को बताया, “लॉरेन पॉवेल जॉब्स को कल रात्रि में दीक्षा दी गई। गुरु जी ने लॉरेन पॉवेल को काली का बीज मंत्र दिया। दीक्षा में पॉवेल ने गुरु जी को दक्षिणा में जो भी दिया वह गुप्त है।” उन्होंने बताया कि स्वामी जी के शिविर में आयोजित दीक्षा समारोह में गुरु जी के निजी सचिव अवंतिकानंद जी और लॉरेन पॉवेल जॉब्स के सचिव पीटर मौजूद थे। पॉवेल ने इस शिविर में तीन दिनों तक प्रवास किया। लॉरेन पॉवेल को गुरु ने कमला नाम दिया है। बुधवार को अमृत स्नान करने संगम घाट पर पहुंचे निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ने बताया था कि, “सोमवार को भीड़ में रहने के कारण कमला को कुछ दिक्कत आई थी, इसलिए वह शिविर में ही रहीं। वह बहुत सहज और सरल हैं और सनातन धर्म को जानना चाहती हैं। वह गुरु के बारे में जानना चाहती हैं, उनके हजारों सवाल हैं जिसका उत्तर हमें देना होता है। उनके सभी प्रश्न सनातन से जुड़े हैं।” उल्लेखनीय है कि लॉरेन पॉवेल बुधवार को मकर संक्रांति पर अमृत स्नान में शामिल नहीं हुई थी। एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की कंपनी ने पर्सनल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया। उनके नेतृत्व में एप्पल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक कंपनी बनी। स्टीव जॉब्स का वर्ष 2011 में निधन हो गया था।
- अहमदाबाद। अहमदाबाद में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण का एक और मामला सामने आया है। कृष्णनगर क्षेत्र के एक 4 साल के बच्चे की रिपोर्ट 13 जनवरी को पॉजिटिव आई। संक्रमित बच्चे को थलतेज के जायडस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। बच्चे को सर्दी, सांस लेने में तकलीफ, बुखार और कफ की शिकायत थी।गुजरात में अब तक एचएमपीवी के कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से अहमदाबाद में 4, साबरकांठा और कच्छ में 1-1 केस शामिल हैं। अहमदाबाद में 6 जनवरी से 13 जनवरी के बीच 5 मरीज मिले हैं। इनमें 3 बच्चे और 2 बुजुर्ग शामिल हैं।बुजुर्ग मरीजों को अस्थमा और सूखी खांसी की परेशानी थी, जबकि बच्चों में सांस लेने में दिक्कत और बुखार जैसे लक्षण देखे गए। अहमदाबाद के सभी संक्रमित मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। फिलहाल, हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों का इलाज जारी है और उनमें से दो को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए।
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प्रयागराज ।दुनिया के 10 देशों का दल महाकुंभ का भ्रमण करेगा। इस दल में शामिल कुल 21 अंतरराष्ट्रीय मेहमान गुरुवार को संगम में पवित्र डुबकी लगाएंगे। संगम स्नान के बाद इन विदेशी मेहमानों को महाकुंभ क्षेत्र का हवाई भ्रमण कराया जाएगा।
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि योगी सरकार द्वारा भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन अब पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को 10 देशों का 21 सदस्यीय दल संगम में पवित्र डुबकी लगाएगा। विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के एक्सटर्नल पब्लिसिटी एंड पब्लिक डिप्लोमेसी डिवीजन द्वारा आमंत्रित 10 देशों का 21 सदस्यीय दल बुधवार को पहुंच रहा है। इस दल के आवास की व्यवस्था अरैल क्षेत्र स्थित टेंट सिटी में की गई है, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा निर्मित किया गया है।उन्होंने बताया कि दल के महाकुंभ मेला क्षेत्र में भ्रमण का कार्यक्रम है। वहीं शाम 5:00 बजे से 6:30 बजे तक हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया है, जिसमें दल के सदस्य प्रयागराज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का अनुभव करेंगे। रात में टेंट सिटी में रात्रि भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई है।अंतरराष्ट्रीय दल गुरुवार, 16 जनवरी को सुबह 8:00 बजे त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाएगा। इसके बाद नाश्ते के पश्चात 9:30 बजे दल के सदस्यों को हेलीकॉप्टर से महाकुंभ क्षेत्र का हवाई अनुभव कराया जाएगा। भ्रमण कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे समाप्त होगा और दल एयरपोर्ट के लिए रवाना होगा।इस अंतरराष्ट्रीय दल में फिजी, फिनलैंड, गयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधि शामिल हैं।गौरतलब है कि इस बार महाकुंभ में बड़ी तादाद में विदेशी मेहमान आ रहे हैं। महाकुंभ नगर में बनाई गई डोम सिटी में तो आधे से ज्यादा दिनों के लिए बुकिंग विदेशी मेहमानों ने करा ली है। कुंभ के मेला क्षेत्र में रात गुजारने के लिए डोम सिटी में कनाडा, अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों के आगंतुकों ने बुकिंग कराई है। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी तो शुरुआती दिनों से ही कुंभ में डेरा डाले हुए हैं। - प्रयागराज । महाकुंभ 2025 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेला क्षेत्र को 5 जोन और 25 सेक्टरों में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर में फूड सेफ्टी ऑफिसर तैनात किए गए हैं जो वहां परोसे जाने वाले खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता की नियमित जांच कर रहे हैं।फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स नामक मोबाइल लैब्स के जरिए मेला क्षेत्र में भोजन और पेय पदार्थों की मौके पर ही जांच की जा रही है। इसके अलावा होटलों, ढाबों और छोटे स्टॉल्स पर बनने वाले भोजन की भी लगातार जांच की जा रही है। शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सेक्टर 24 में संकट मोचन मार्ग स्थित ऑफिस से पूरी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का संचालन और मॉनिटरिंग की जा रही है।सहायक खाद्य आयुक्त सुशील कुमार सिंह के मुताबिक झूंसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 14 सेक्टर सक्रिय हैं जहां फूड सेफ्टी ऑफिसर और उनकी टीम लगातार निगरानी रख रही है। इसके अलावा, हर 5 सेक्टर पर एक चीफ ऑफिसर को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है जिससे व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकें।गौरतलब है कि महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को हुई है और यह 26 फरवरी तक चलेगा। इस बार लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। मेला क्षेत्र में स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर श्रद्धालु को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिले।
- मुंबई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुंबई दौरे पर हैं। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने नवी मुंबई में एक नए इस्कॉन मंदिर का उद्घाटन किया। यह मंदिर लगभग 9 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें से 2.5 एकड़ क्षेत्र में भव्य मंदिर बनाया गया है। यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर है। मंदिर के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह मंदिर परिसर आस्था के साथ-साथ भारत की चेतना को भी समृद्ध करने का एक पुण्य केंद्र बनेगा।पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “आज ज्ञान और भक्ति की इस महान धरती पर इस्कॉन के प्रयासों से श्री श्री राधा मदनमोहन जी मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे अलौकिक अनुष्ठान में अपनी भूमिका निभाने का पुण्य प्राप्त हुआ है।”उन्होंने कहा कि मैं अभी देख रहा था कि श्री श्री राधा मदनमोहन जी मंदिर परिषद की जो रूपरेखा है, इस मंदिर के पीछे जो विचार है, इसका जो स्वरूप है, उसमें अध्यात्म और ज्ञान की सम्पूर्ण परंपरा के दर्शन होते हैं। मंदिर में ईश्वर के विविध स्वरूपों के दर्शन होते हैं। मुझे विश्वास है कि यह मंदिर परिसर आस्था के साथ-साथ भारत की चेतना को भी समृद्ध करने का एक पुण्य केंद्र बनेगा। मैं इस पुनीत कार्य के लिए इस्कॉन के सभी संतो, सदस्यों और महाराष्ट्र के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज को याद करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज इस मौके पर मुझे परम श्रद्धेय गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज का भावुक स्मरण भी हो रहा है। इस प्रोजेक्ट में उनका विजन जुड़ा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध भक्ति का आशीर्वाद जुड़ा हुआ है। आज वह भौतिक शरीर से भले ही यहां न हों, लेकिन उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति हम सब महसूस कर रहे हैं।पीएम मोदी ने कहा कि दुनियाभर में इस्कॉन के अनुयायी भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की डोर से बंधे हैं। उन सबको एक-दूसरे से कनेक्ट रखने वाला एक और सूत्र है, जो चौबीसों घंटे हर भक्त को दिशा दिखाता रहता है। यह श्रील प्रभुपाद स्वामी के विचारों का सूत्र है। उन्होंने उस समय वेद-वेदांत और गीता के महत्व को आगे बढ़ाया जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था। उन्होंने भक्ति वेदांत को जनसामान्य की चेतना से जोड़ने का अनुष्ठान किया। उन्होंने आगे कहा कि आज दुनिया के हर कोने में करोड़ों लोगों को उनकी तपस्या का प्रसाद मिल रहा है। श्रील प्रभुपाद स्वामी की सक्रियता और उनके प्रयास आज भी हमें प्रेरित करते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं में बंधा भूमि का एक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत एक जीवंत धरती है, एक जीवंत संस्कृति है और इस संस्कृति की चेतना है- यहां का आध्यात्म! इसलिए, यदि भारत को समझना है, तो हमें पहले आध्यात्म को आत्मसात करना होता है। उन्होंने कहा कि जो लोग दुनिया को केवल भौतिक दृष्टि से देखते हैं, उन्हें भारत भी अलग-अलग भाषा और प्रांतों का समूह नजर आता है। लेकिन, जब आप इस सांस्कृतिक चेतना से अपनी आत्मा को जोड़ते हैं, तब आपको भारत के विराट रूप के दर्शन होते हैं।उन्होंने आगे कहा कि मुझे संतोष है कि हमारी सरकार भी सेवा भावना के साथ पूरे समर्पण से लगातार देशवासियों के हित में काम कर रही है। हर घर में शौचालय बनवाना, हर गरीब महिला को उज्ज्वला का गैस कनेक्शन देना, हर घर तक नल से जल की सुविधा पहुंचाना, हर गरीब को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देना, 70 वर्ष की आयु से ऊपर के हर बुजुर्ग को इस सुविधा के दायरे में लाना, हर बेघर को पक्के घर देना, इसी सेवा भावना और समर्पण भाव के साथ किए गए कार्य हैं। जो मेरे लिए हमारी महान सांस्कृतिक परंपरा का प्रसाद हैं।पीएम मोदी ने आगे कहा, “सेवा की यही भावना सच्चा सामाजिक न्याय लाती है। सच्चे सेक्युलरिज्म का प्रतीक है। हमारी सरकार कृष्णा सर्किट के माध्यम से देश के अलग-अलग तीर्थों और धार्मिक स्थलों को जोड़ रही है। इस सर्किट का विस्तार गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और ओडिशा तक है।
- समस्तीपुर । बिहार के समस्तीपुर जिले के बैनी थाना क्षेत्र में आज बुधवार को एक एल्युमिनियम फैक्ट्री में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। यह फैक्ट्री एल्युमिनियम के बर्तन बनाने का काम करती थी। रोज की तरह मजदूर फैक्ट्री में काम कर रहे थे तभी अचानक बॉयलर का तापमान बढ़ गया और जोरदार धमाका हो गया। धमाके से फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई।सदर अनुमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि हादसे में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को समस्तीपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान एक और मजदूर की मौत हो गई। मृतकों की पहचान दरभंगा के संजय यादव और मुजफ्फरपुर के चंद्रेश्वर यादव के रूप में हुई है।स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्री के पास के इलाके को खाली करा लिया गया है। हादसे के वक्त फैक्ट्री में कुल पांच मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बॉयलर फटने की वजह क्या थी। घायल मजदूरों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
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नई दिल्ली। तमिलनाडु में आज बुधवार को तिरुवल्लुवर दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “तिरुवल्लुवर दिवस पर हम महानतम दार्शनिकों और कवियों में से एक तिरुवल्लुवर को याद करते हैं। उनके छंद तमिल संस्कृति और हमारी दार्शनिक विरासत का प्रतीक हैं। उनकी शिक्षाएं धार्मिकता, करुणा और न्याय पर आधारित हैं। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हम उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “तिरुवल्लुवर ने नैतिकता, सामाजिक व्यवस्था और न्याय के सिद्धांतों पर अमूल्य विचार दिए। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ जीवन की कठिनाइयों से निपटने के लिए मार्गदर्शक है। हम उनके सिद्धांतों पर चलते हुए न्यायपूर्ण और समतापूर्ण समाज के निर्माण का प्रयास करेंगे।”तिरुवल्लुवर तमिल संस्कृति के महान संत, कवि और दार्शनिक थे। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘तिरुक्कुरल’ को तमिल साहित्य का नीतिग्रंथ माना जाता है। इसमें 1330 दोहे (कुरल) हैं, जो नैतिकता, राजनीति, प्रेम और न्याय जैसे विषयों पर गहन ज्ञान प्रदान करते हैं।गौरतलब है कि तिरुवल्लुवर दिवस हर साल मकर संक्रांति के अगले दिन मनाया जाता है। यह दिन तमिल संस्कृति में उनकी शिक्षाओं और योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। तिरुवल्लुवर को तमिलनाडु में संत और दार्शनिक के रूप में पूजा जाता है। उनकी शिक्षाएं और जीवन मूल्य समाज में धार्मिकता, करुणा और सद्भाव के सिद्धांतों को सुदृढ़ करते हैं।- - प्रयागराज । लोकआस्था के महापर्व महाकुंभ में प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे की ओर से एक और ट्रेन का विस्तार किया गया है। खजुराहो-प्रयागराज कुंभ स्पेशल ट्रेन बीना रेलवे स्टेशन तक जाएगी। ट्रेन के संचालन के लिए समयसारिणी भी निर्धारित कर जारी की गई है। भारतीय रेलवे के द्वारा महाकुंभ मेला को लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। बुधवार को उत्तर-मध्य रेलवे झांसी मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि खजुराहो-प्रयागराज छिवकी कुंभ मेला स्पेशल अनारक्षित ट्रेन को बीना स्टेशन तक विस्तारित किया गया है।यह गाड़ी सभी अमृत स्नानों की तिथि से एक दिन पहले व दो दिन बाद नियमित रूप से चलेगी और महोबा रेलवे स्टेशन से गुजरेगी। मेला स्पेशल ट्रेन माह जनवरी में 16 व 28 तारीख को जबकि फरवरी माह में 5, 11, 14, 25 और 28 तारीख को चलेगी ।बीना स्टेशन से यह ट्रेन सुबह 11 बजे चलेगी जो कि शाम 6.53 बजे महोबा रेलवे स्टेशन पर आएगी। ट्रेन का प्रयागराज छिवकी स्टेशन रात 2 बजकर 50 मिनट पर पहुंचेगी। वहीं वापसी में यह ट्रेन प्रयागराज छिवकी से माह जनवरी में 17 व 29 तारीख को जबकि माह फरवरी में 6, 12, 15 और 26 तारीख को संचालित होगी। प्रयागराज छिवकी से यह ट्रेन सुबह 3 बजकर 45 मिनट पर प्रस्थान करेगी जो कि महोबा स्टेशन पर सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर पहुंचेगी। बीना स्टेशन पर 5 बजकर 30 मिनट पर यह ट्रेन पहुंचेगी।
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बेंगलुरु. वी नारायणन ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने एस सोमनाथ की जगह यह पद संभाला है। इसरो ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रतिष्ठित वैज्ञानिक (शीर्ष ग्रेड) डॉ वी नारायणन ने 13 जनवरी, 2025 को अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और इसरो के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।'' इससे पहले, नारायणन ने इसरो के ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर' (एलपीएससी) के निदेशक के रूप में कार्य किया, जो प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष यानों की प्रणोदन प्रणालियों के विकास के लिए जिम्मेदार एक प्रमुख केंद्र है। उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान' कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय स्तर के ह्यूमन रेटेड सर्टिफिकेशन बोर्ड (एचआरसीबी) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह 1984 में इसरो से जुड़े थे।
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मदुरै. तमिलनाडु में पारंपरिक रूप से लोकप्रिय अवनियापुरम जल्लीकट्टू की मंगलवार को 'पोंगल' के अवसर पर मदुरै समेत विभिन्न स्थानों पर शुरुआत हुई। जल्लीकट्टू बैलों को काबू करने का एक पारंपरिक खेल है। इस बार सबसे बेहतर चुने गए बैल के मालिक को एक ट्रैक्टर मिलेगा जबकि बैल को सबसे अच्छे ढंग से प्रशिक्षित करने वाले को एक कार मिलेगी। जैसे ही चंदन से लिपे हुए बैल प्रवेश द्वार 'वादीवासल' से बाहर निकले, उत्साही युवकों ने एक के बाद एक बैल की कूबड़ को पकड़कर उन पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। जल्लीकट्टू के इस आयोजन में एक हजार से अधिक बैल और 900 से अधिक पुरुष हिस्सा ले रहे हैं। इस खेल के विजेताओं को मिलने वाले पुरस्कारों में ट्रैक्टर और कार शामिल हैं तथा पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस बार 15 और 16 जनवरी को जल्लीकट्टू क्रमशः मदुरै के पालामेडु और अलंगनल्लूर में आयोजित किया जाएगा।
हालांकि, कुछ दिन पहले, पुडुक्कोट्टई जिले के थाचनकुरिची में जल्लीकट्टू कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जो 2025 के खेल सत्र की शुरुआत का प्रतीक था। मदुरै में होने वाले कार्यक्रम की शुरुआत अवनियापुरम से होती है, जो सबसे लोकप्रिय हैं। -
नयी दिल्ली. आईटीसी के चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा है कि पिछले दशक के परिवर्तनकारी सुधारों ने भारत को वैश्विक मंच पर पहुंचा दिया है और यह भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है। इसके साथ ही पुरी ने भरोसा जताया मजबूत वृहद बुनियादी ढांचे और उद्देश्यपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप के दम पर देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बन जाएगा। भारत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे ऐतिहासिक सुधारों तथा बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जबकि 2014 में यह दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। पुरी ने कहा, ‘‘ नई विश्व व्यवस्था (जो भू-अर्थशास्त्र और भू-राजनीति पर नई नीतियों की विशेषता पर केंद्रित है) में मेरा मानना है कि विश्व, आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती की ओर देख रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ जलवायु संबंधी आपात स्थिति के कारण दुनिया की नजहर ऊर्जा बदलाव पर है। डिजिटल बदलाव एक और क्षेत्र है जिससे दुनिया गुजर रही है। खाद्य तथा पोषण सुरक्षा वैश्विक चिंता का विषय बन रहे हैं। अब इन सभी क्षेत्रों में मुझे लगता है कि भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि भारत में प्रतिभा है, भारत के पास कौशल है।'' पुरी ने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 21वीं सदी की आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में जब चीन और पश्चिम के बीच संबंध लगातार खराब होते जा रहे हैं, भारत अधिकतर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ अच्छे संबंधों का फायदा ले रहा है। भारत उन निवेशकों तथा विनिर्माताओं को चीन के अलावा एक विकल्प प्रदान करता है जो आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों को कम करना चाहते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ ये भारत के लिए काफी बड़े अवसर हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह भारत के लिए बहुत अच्छा समय है। यह भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है और मुझे लगता है कि भारत का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।'' भारत के वित्त वर्ष 2027-28 तक जापान और जर्मनी दोनों को पीछे छोड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है। उस समय तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 5,000 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। अर्थव्यवस्था में हालिया मंदी पर पुरी ने कहा कि आर्थिक बदलाव का सफर कभी भी एक स्तर पर चलकर तय नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि भारत बहुत अच्छी स्थिति में है। वृहद आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें उद्देश्यपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप शामिल हैं जिनमें से अधिकतर हस्तक्षेप केंद्र सरकार और कुछ राज्यों द्वारा कई वर्षों में किए गए हैं।'' पुरी ने कहा कि भारत के पास अपेक्षित प्राकृतिक संसाधन हैं। ऊर्जा बदलाव जैसे रणनीतिक उभरते क्षेत्रों पर देश का ध्यान उसे आर्थिक महाशक्ति बनाने की ओर अग्रसर कर रहा है। भारत के 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र' बनने के बारे में पूछे जाने पर पुरी ने कहा, ‘‘ यह काफी हद तक संभव है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ बेशक। नागरिक समाज या निजी उद्यम या नीति-निर्माता..हम सभी को इसके लिए सामूहिक रूप से काम करना होगा क्योंकि यह नवोन्मेषण व प्रौद्योगिकी का संयोजन है। यह नीतिगत सुधारों का भी संयोजन है। सभी को मिलकर काम करना होगा।'' पुरी ने कहा कि जब अधिकतर उन्नत अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक सुस्ती, ऊंची मुद्रास्फीति और वृद्ध होती आबादी आदि जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं...भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सहित प्रमुख बहुपक्षीय संगठनों द्वारा सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है।
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नयी दिल्ली. जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में अपनी रणनीतिक भूमिकाओं के लिए मशहूर सैन्य अधिकारी कर्नल राजेश कालिया 37 साल की शानदार सेवा के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। ‘पैराट्रूपर' का प्रशिक्षण लेने वाले कर्नल कालिया ने भारतीय सेना के 3 कोर और 4 कोर के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में सेना के रुख को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब उन्हें 2007 में जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में स्थित उत्तरी कमान को सौंपा गया, तो उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा शुरू किए गए ‘ युद्ध' का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें 1988 में सेना के 4-पैरा में शामिल किया गया था। उनके पास सैन्य अभियानों में भाग लेने का व्यापक अनुभव है जिसमें भारतीय शांति सेना बल (आईपीकेएफ) के हिस्से के रूप में श्रीलंका में सेवा देना, सियाचिन में ‘ऑपरेशन मेघदूत' में भागीदारी और पूर्वोत्तर के ‘ऑपरेशन राइनो' तथा जम्मू-कश्मीर के ‘ऑपरेशन रक्षक' सहित उग्रवाद रोधी अन्य अभियानों में भाग लेना शामिल है। सियाचिन में उनकी विशेषज्ञता को मान्यता देते हुए कर्नल कालिया को 2007 में ग्लेशियरों पर पहले नागरिक अभियान के लिए मीडिया प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया था। कर्नल कालिया ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं के दौरान सेना के दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जिसमें फरवरी 2019 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बस पर आतंकी हमला (जिसमें 40 कर्मियों की जान चली गई), बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक और 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़की हिंसा शामिल है।
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भुवनेश्वर. ओडिशा में मंगलवार सुबह मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों लोगों ने नदियों और अन्य सरोवरों में पवित्र डुबकी लगाई। नयी दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री माझी क्योंझर जिले में अपने घर गए और पटना क्षेत्र में बैतरणी नदी में डुबकी लगाई। इसके बाद उन्होंने पास के शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की। सुबह से ही खुर्दा जिले के अत्रि स्थित हाटकेश्वर मंदिर, कटक के धबलेश्वर मंदिर, बालासोर के मकर मुनि मंदिर और सुंदरगढ़ के बाबा बाणेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में लोगों ने लिंगराज मंदिर में पूजा-अर्चना की। तीर्थ नगरी पुरी में भी लोगों की भीड़ देखी गई, जहां लोग 'मकर चौरासी बेशा' पर भगवान जगन्नाथ के 'दर्शन' के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए। इस दिन भगवान जगन्नाथ को रंग-बिरंगे फूलों और तुलसी की मालाओं से सजाया जाता है। उगते सूर्य की एक झलक पाने के लिए सुबह-सुबह कोणार्क के चंद्रभागा समुद्र तट और सदियों पुराने सूर्य मंदिर पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। कटक और राउरकेला में लोगों ने रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाकर यह त्योहार मनाया जो एक परंपरा है।
दक्षिण ओडिशा में लोगों ने अपने घरों के सामने 'रंगोली' से सजावट की। दक्षिण ओडिशा में तेलुगु लोगों की अच्छी खासी आबादी है। राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, "मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। हमारी संस्कृति और परंपरा के अनुसार सूर्य की पूजा करने से परिवार और समाज में सुख-समृद्धि आती है।" उन्होंने कहा, "यह केवल धार्मिक त्योहार नहीं है बल्कि भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और एकता का त्योहार है।



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