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- नयी दिल्ली। सरकार ने रविवार को कहा कि देश के पास खाद्य तेलों का पर्याप्त भंडार है और वह इनके दामों एवं आपूर्ति संबंधी हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत के पास सभी खाद्य तेलों का पर्याप्त भंडार है। उद्योग के सूत्रों ने बताया कि देश में सभी खाद्य तेलों का वर्तमान भंडार लगभग 21 लाख टन है और करीब 12 लाख टन मई में आएगा।'' इसमें कहा गया कि इस तरह इंडोनेशिया द्वारा पाम तेल के निर्यात पर लगाई गई पाबंदी को भी देखते हुए देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश के कुल खाद्य तेल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी करीब 62 फीसदी है। बयान में कहा गया, ‘‘खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग कीमतों और उपलब्धता की स्थिति पर नजर रख रहा है। प्रमुख खाद्य तेल प्रसंस्करण संघों के साथ नियमित बैठकें हो रही हैं जिनमें घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में कमी लाने और उपभोक्ताओं के राहत देने पर बात होती है।'' इसमें कहा गया, ‘‘खाद्य तलों के अंतरराष्ट्रीय मूल्य पर दबाव है क्योंकि वैश्विक उत्पादन घटा है और कई देशों में निर्यात कर बढ़ा है।
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चेन्नई। जापान की कार विनिर्माता कंपनी निसान ने अपने उत्पादन संयंत्र में डेटसन ब्रांड की कारों का उत्पादन कम करने का निर्णय लिया है और कंपनी की बाजार पुनर्गठन रणनीति के तहत नया मॉडल भी बाजार में उतारा जाएगा। तमिलनाडु सरकार ने रविवार को यह जानकारी दी। रेनो-निसान ने चेन्नई से करीब 45 किमी दूर ओरागादम में संयुक्त विनिर्माण इकाई की स्थापना की थी।
तमिलनाडु के उद्योग मंत्री थंगम थेननारूसु ने एक बयान में कहा, ‘‘रेनो-निसान गठबंधन ने एक बयान में कहा कि अपनी पुनर्गठन रणनीति के तहत डेटसन ब्रांड की कारों का उत्पादन घटाने और नया मॉडल लाने का निर्णय लिया गया है।'' मंत्री ने बताया कि रेनो-निसान ने सरकार को सूचित किया है कि सेमीकंडक्टर की कमी के बावजूद कंपनी इस इकाई में वाहनों का उत्पादन कर रही है और घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशों से आने वाली मांग भी पूरी कर रही है। - नयी दिल्ली. घरेलू वाहन कंपनी टाटा मोटर्स ग्राहकों के लिए विभिन्न मूल्य खंडों में ईवी लाने की योजना बना रही है। कंपनी ने कहा है कि वह विभिन्न खंडों में ग्राहकों की जरूरत को पूरा करने के लिए कई आकार और खूबियों वाले ईवी मॉडल पेश करने की योजना पर काम कर रही है। घरेलू इलेक्ट्रिक यात्री वाहन खंड में फिलहाल सबसे आगे मौजूद टाटा मोटर्स अलग-अलग तरह के ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने तीन अलग-अलग मंचों पर आधारित उत्पादों के विकास पर काम कर रही है। टाटा मोटर्स पैसेंजर वेहिकल्स के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने कहा कि कंपनी ईवी क्षेत्र में त्रिस्तरीय रणनीति पर चल रही है। नेक्सॉन ईवी और टिगोर ईवी एक तरह के ग्राहकों के लिए हैं तो हाल ही में पेश कर्व कॉन्सेप्ट कार दूसरी तरह के ग्राहकों के लिए होगी। वहीं 2025 में आने वाले अविन्या प्लेटफॉर्म पर बने ईवी अलग तरह के ग्राहकों के लिए होंगे। चंद्रा ने कहा, ‘‘इन उत्पादों में से हरेक की अपनी अलग खासियत होगी। हम सभी प्रकार के ग्राहक खंडों और उनकी जरूरतों को अलग कीमत स्तरों, बॉडी स्टाइल, फीचर और अनुभव के आधार पर पूरा करने जा रहे हैं।''' उन्होंने उम्मीद जताई कि इनमें से प्रत्येक वाहन को अच्छी बिक्री मिलेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या नई पीढ़ी के ईवी वाहन आने से शुरुआती दौर के ईवी वाहनों का वजूद खत्म हो जाएगा, चंद्रा ने कहा कि सभी तीनों पीढ़ियों के वाहन एक साथ बने रहेंगे। कंपनी ने हाल ही में अपने एकदम नए इलेक्ट्रिक वाहन आर्किटेक्चर ‘अविन्या' को पेश किया है। कंपनी की 2025 से इसी ढांचे पर आधारित उन्नत ईवी उतारने की योजना है। कंपनी के नए इलेक्ट्रिक मॉडल 500 किलोमीटर और उससे अधिक की रेंज के साथ आएंगे। इनमें नए जमाने की तकनीक, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी सुविधा होगी। नेक्सॉन ईवी और टिगोर ईवी जैसे पहली पीढ़ी के उत्पादों में लगभग 250 किलोमीटर की रेंज है। चंद्रा ने कहा कि टाटा मोटर्स ईवी खंड में रणनीतियों को सरकारी नीति से तालमेल बिठाकर तय कर रही है। सरकार ने वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल बाजार में हिस्सेदारी 30 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक टाटा मोटर्स की कुल बिक्री में ईवी कारोबार दहाई अंक में पहुंच जाएगा। अगले पांच साल में इसके 20-25 फीसदी हो जाने की भी उम्मीद है।
- नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने अद्यतन (अपडेटेड) आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के लिए एक नया फॉर्म अधिसूचित किया है। इसमें करदाताओं को इसे दाखिल करने की सही वजह के साथ यह भी बताना होगा कि कर के लिए कितनी राशि को पेश किया जा रहा है। नया फॉर्म (आरटीआर-यू) करदाताओं को वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए उपलब्ध होगा। आईटीआर-यू दाखिल करने वाले करदाताओं को आय को अद्यतन करने के लिए कारण देना होगा। उन्हें इसकी वजह बतानी होगी कि पहले रिटर्न दाखिल क्यों नहीं किया गया, या आय की सही जानकारी क्यों नहीं दी गई। यह फॉर्म संबद्ध आकलन वर्ष के अंत के दो साल के भीतर दाखिल किया जा सकता है। आम बजट 2022-23 में करदाताओं को आईटीआर को दाखिल करने के दो साल के भीतर उसे ‘अपडेट' करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस अनुमति से पहले करों का भुगतान जरूरी होगा। इस कदम का मकसद आईटीआर में हुई गलती या कोई जानकारी छूटने पर उसमें सुधार का मौका देना है। एक करदाता को प्रत्येक आकलन वर्ष में केवल एक बार अद्यतन विवरण दाखिल करने की अनुमति होगी।नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के भागीदार शैलेश कुमार ने कहा कि करदाता को प्रासंगिक जानकारी को आसानी से भरने की सुविधा के लिए इस फॉर्म में चीजों को ‘सटीक' रखा गया है। कुमार ने कहा, इसके अलावा यह भी ध्यान रखा गया है कि जिस आय को कर के लिए पेश जा रहा है सिर्फ उसका ब्योरा ही देने की जरूरत हो। इसमें नियमित आईटीआर फॉर्म की तरह अलग-अलग मदों में आय का ब्योरा देने की जरूरत नहीं होगी। अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने की वजह भी फॉर्म में ही बतानी होगी। कर और परामर्श कंपनी एकेएम के वैश्विक भागीदार-कर संदीप सहगल ने बताया कि जो करदाता 2019-20 के लिए इस फॉर्म को दाखिल करना चाहते हैं उन्हें बकाया कर और ब्याज के साथ इस तरह के कर और ब्याज की अतिरिक्त 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। वहीं जो करदाता 2020-21 के लिए इस फॉर्म को दाखिल करना चाहते हैं उन्हें बकाया कर और ब्याज की 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।
- नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अप्रैल, 2022 में 1.68 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि कर अनुपालन में सुधार से जीएसटी संग्रह का आंकड़ा बेहतर हुआ है। अप्रैल, 2022 में जीएसटीआर-3बी में कुल 1.06 करोड़ जीएसटी रिटर्न भरे गए। इनमें से 97 लाख रिटर्न मार्च, 2022 के हैं। अप्रैल, 2021 की तुलना में अप्रैल 2022 में जीएसटी संग्रह 20 प्रतिशत बढ़ा है। अप्रैल 2021 में जीएसटी संग्रह 1.40 लाख करोड़ रुपये रहा था। मंत्रालय ने कहा कि सकल जीएसटी संग्रह अप्रैल में 1.68 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। यह पिछले उच्च स्तर मार्च, 2022 के 1.42 लाख करोड़ रुपये से करीब 25,000 करोड़ रुपये अधिक है। मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल में सकल जीएसटी संग्रह 1,67,540 करोड़ रुपये रहा। इसमें केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) का हिस्सा 33,159 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) का हिस्सा 41,793 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का हिस्सा 81,939 करोड़ रुपये रहा। आईजीएसटी में 36,705 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर जुटाए गए। वहीं इसमें उपकर का हिस्सा 10,649 करोड़ रुपये (857 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर जुटाए गए) रहा। मंत्रालय के मुताबिक, इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि अनुपालन के स्तर में सुधार हुआ है। कर प्रशासन ने इस बारे में कई उपाय किए हैं जिनके सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं। विभाग ने करदाताओं को अपना रिटर्न समय पर भरने के लिए प्रेरित करने के साथ कर अनुपालन को भी सुगम किया है। मंत्रालय ने कहा कि समीक्षाधीन महीने में वस्तुओं के आयात से राजस्व पिछले साल के समान महीने से 30 प्रतिशत ऊंचा रहा, जबकि घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात) से राजस्व 17 प्रतिशत अधिक रहा। मार्च, 2022 में कुल 7.7 करोड़ ई-वे बिल निकाले गए। यह फरवरी, 2022 के 6.8 करोड़ के आंकड़े से 13 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय ने कहा कि इन आंकड़ों से कारोबारी गतिविधियों में सुधार का पता चलता है। अप्रैल, 2022 में कुल पंजीकृत कंपनियों या इकाइयों में से 84.7 प्रतिशत ने जीएसटीआर-3बी जमा किया। एक साल पहले समान महीने में यह आंकड़ा 78.3 प्रतिशत था। इसक अलावा 83.11 प्रतिशत जीएसटी पंजीकृत इकाइयों ने आपूर्ति या बिक्री रिटर्न जीएसटीआर-1 दाखिल किया। एक साल पहले यह संख्या 73.9 प्रतिशत थी। किसी एक दिन में सबसे ऊंचा कर संग्रह 20 अप्रैल को हासिल हुआ। उस दिन 9.58 लाख लेनदेन के जरिये 57,847 करोड़ रुपये के जीएसटी का भुगतान हुआ। डेलॉयट इंडिया के भागीदार एम एस मणि ने कहा कि मार्च की तुलना में अप्रैल में जीएसटी संग्रह हमेशा ऊंचा रहता है। लेकिन इस बार अप्रैल में रिकॉर्ड संग्रह के लिए कई अनुकूल कारक हैं। इनमें से एक कारक वेंडरों द्वारा समय पर अनुपालन की स्थिति में ही इनपुट कर क्रेडिट की अनुमति से जुड़े बदलाव से संबंधित है। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी के भागीदार विवेक जालान ने कहा कि जीएसटी के ऊंचे संग्रह से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के प्रभाव से उबर रही है और तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा उत्पादन लागत में भारी मूल्यवृद्धि तथा जीएसटीआर-2बी के क्रियान्वयन से जीएसटी राजस्व बढ़ाने में मदद मिली है।
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नयी दिल्ली। वाणिज्यिक इस्तेमाल में आने वाले 19 किलोग्राम वजनी एलपीजी सिलिंडर के दाम में रविवार को 102.50 रुपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि कर दी गई। यह लगातार तीसरा महीना है जब वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर के दाम बढ़े हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन कंपनियों की तरफ से वाणिज्यिक एलपीपीजी सिलिंडर की कीमत में वृद्धि की अधिसूचना जारी की गई। इसके मुताबिक अब 19 किलोग्राम वजन वाले एलपीजी सिलिंडर की कीमत 2,355.50 रुपये हो गई है। इसके पहले अप्रैल और मार्च में भी वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर के दाम बढ़ाए गए थे। मार्च में इसके दाम में 105 रुपये और अप्रैल में 250 रुपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि की गई थी। बहरहाल घरेलू इस्तेमाल वाले रसोई गैस सिलिंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। घरेलू गैस सिलिंडर के दाम में पिछली वृद्धि मार्च में हुई थी। दिल्ली में 22 मार्च से 14.2 किलोग्राम वजन वाला एलपीजी सिलिंडर 949.50 रुपये में मिल रहा है।
- नयी दिल्ली। निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में 343 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 128 करोड़ रुपये रहा था। बैंक ने शनिवार को शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा कि जनवरी-मार्च 2022 तिमाही में उसकी कुल आय 5,384.88 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले की समान तिमाही में उसकी आय 4,811.18 करोड़ रुपये रही थी। आलोच्य तिमाही में बैंक की ब्याज से शुद्ध आय 36 फीसदी बढ़कर 2,669 करोड़ रुपये हो गई जबकि शुल्क एवं अन्य आय 40 फीसदी उछलकर 841 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी वैद्यनाथन ने कहा, "चौथी तिमाही में हमारा प्रमुख परिचालन लाभ दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 836 करोड़ रुपये हो गया है। यह हमारे कारोबारी मॉडल की ताकत को दर्शाता है।
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नयी दिल्ली। सरकार ने शनिवार को कहा कि सोने के आभूषण और कलाकृतियों की अनिवार्य हॉलमार्किंग का दूसरा चरण इस साल एक जून से शुरू होगा। सोने की हॉलमार्किंग इस महंगी धातु की शुद्धता का प्रमाण होती है। यह 16 जून 2021 तक स्वैच्छिक था जिसके बाद सरकार ने सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया। पहले चरण में देश के 256 जिलों को इसके दायरे में लाया गया। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि अनिवार्य हॉलमार्किंग के दूसरे चरण के दायरे में स्वर्ण आभूषणों के तीन अतिरिक्त कैरेट (20, 23 और 24 कैरेट) के अलावा 32 नये जिले आएंगे, जहां पहले चरण के क्रियान्वयन के बाद एक ‘परख एवं हॉलमार्क केंद्र (एएचसी)' स्थापित किया गया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में आदेश अधिसूचित कर दिया है और एक जून, 2022 से यह लागू हो जाएगा। उसने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने 23 जून, 2021 से देश के 256 जिलों में सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग सफलतापूर्वक लागू की जहां हर दिन हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (एचयूआईडी) के साथ 3 लाख से अधिक स्वर्ण आभूषणों पर हॉलमार्क लगाया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार बीआईएस के एक प्रावधान के तहत सामान्य उपभोक्ता भी बीआईएस द्वारा मान्यताप्राप्त एएचसी पर सोने के आभूषण की शुद्धता की जांच करा सकता है।
- ह्यूस्टन. अमेरिकी ऊर्जा कंपनी शेल पीएलसी (शेल) के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई शेल ओवरसीज इंवेस्टमेंट ने 1.55 अरब डॉलर में सोलएनर्जी पावर प्राइवेट लिमिटेड के सौ फीसदी अधिग्रहण के लिए एक्टिस सोलएनर्जी लिमिटेड के साथ समझौता किया है। सोलएनर्जी पावर प्राइवेट लिमिटेड मॉरीशस में गठित कंपनी है और भारत में कारोबार करने वाली स्प्रिंग एनर्जी ग्रुप ऑफ कंपनीज की प्रत्यक्ष शेयरधारक है। महाराष्ट्र के पुणे में स्प्रिंग एनर्जी का मुख्यालय है। यह अधिग्रहण के बाद भी अपने मौजूदा ब्रांड को बरकरार रखेगी और शेल समूह की पूर्ण-स्वामित्व वाली अनुषंगी के तौर पर काम करेगी। इसका नियंत्रण शेल के रिन्यूएबल्स एंड एनर्जी सॉल्यूशंस इंटिग्रेटेड पावर के पास होगा। यह लेनदेन नियामकीय मंजूरी के अधीन है और इस साल के अंत तक इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है। शेल के इंटीग्रेटेड गैस, रिन्यूएबल्स और एनर्जी सॉल्यूशंस के निदेशक वॉल सैवन ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में इस अधिग्रहण सौदे की जानकारी दी। उन्होंने कहा, यह सौदा शेल को भारत में वास्तव में एकीकृत ऊर्जा अंतरण कारोबार करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक के रूप में स्थापित करता है।'' सैवन ने कहा, ‘‘स्प्रिंग एनर्जी के पास एक शानदार टीम, मजबूत एवं स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड और एक स्वस्थ विकास पाइपलाइन है। स्प्रिंग एनर्जी की ताकत शेल इंडिया के समृद्ध ग्राहक-उन्मुख गैस एवं डाउनस्ट्रीम व्यवसायों के साथ मिलकर विकास के और भी अधिक अवसर पैदा कर सकती है।” विज्ञप्ति के अनुसार, इस अधिग्रहण सौदे के जरिये शेल को हासिल होने वाली सौर एवं पवन ऊर्जा संपत्तियां उसकी मौजूदा नवीकरणीय क्षमता को तीन गुना कर देंगी।
- नयी दिल्ली. निजी क्षेत्र के यस बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,066 करोड़ रुपये का लाभ कमाने के साथ फिर से मुनाफा हासिल करना शुरू कर दिया है। यस बैंक ने शनिवार को चौथी तिमाही के नतीजे घोषित करते हुए बताया कि वह फिर से लाभ की स्थिति में आ गया है। इसके पहले वित्त वर्ष 2020-21 में उसे 3,462 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। उसके पहले वर्ष 2019-20 में उसे 22,715 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार यस बैंक किसी वित्त वर्ष में लाभ अर्जित करने में सफल रहा है। उसने हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष 2021-22 में कुल 1,066 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। बैंक ने शेयर बाजारों को अपने वित्तीय नतीजों की जानकारी देते हुए कहा कि जनवरी-मार्च 2022 तिमाही में उसने 367 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जबकि एक साल पहले की समान अवधि में उसे 3,788 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बैंक का तिमाही आधार पर भी प्रदर्शन बेहतर हुआ है। दिसंबर 2021 में समाप्त तीसरी तिमाही में उसे 266 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। इस तरह चौथी तिमाही में उसका लाभ तीसरी तिमाही की तुलना में 38 फीसदी बढ़ गया है। चौथी तिमाही में बैंक की कुल आय 5,829.22 करोड़ रुपये रही जबकि जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में यह 4,678.59 करोड़ रुपये थी। हालांकि समूचे वित्त वर्ष में यस बैंक की कुल आय 22,285.98 करोड़ रुपये ही रही जो वित्त वर्ष 2020-21 के 23,053.54 करोड़ रुपये की तुलना में कम है। बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में उसकी जमाओं एवं अग्रिमों में तगड़ी वृद्धि देखने को मिली। बैंक के फंसे कर्जों की हिस्सेदारी भी 5.9 फीसदी से घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई। परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। मार्च 2022 के अंत में बैंक की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) उसके सकल अग्रिमों का 13.9 फीसदी रही जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में यह अनुपात 15.4 फीसदी का था। यस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशांत कुमार ने कहा, ‘‘बैंक के भीतर पिछले दो साल से जारी कायांतरकारी सफर का नतीजा बहीखाते में संतुलित वृद्धि, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, तरलता में वृद्धि और मजबूत पूंजी स्थिति के रूप में सामने आया है।'' उन्होंने कहा कि इस दौरान तनावग्रस्त संपत्तियों का पुराना बोझ भी कम हुआ है जिससे बैंक की शुद्ध लाभपरकता बेहतर हुई है।
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नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम-एलआईसी का आईपीओ आगामी चार मई को खुलेगा और नौ मई को बंद होगा। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम के तहत शेयर मूल्य नौ सौ दो रूपये से नौ सौ 49 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। निवेशक कम से कम 15 शेयर और इसके गुणांक में शेयरों के लिए आवेदन कर सकते है। निर्गम में योग्य कर्मचारी जो खुदरा निवेश कर रहे है उन्हें 45 रुपये और पॉलिसी धारकों को 60 रुपये प्रति शेयर की छूट दी जाएगी।
इस निर्गम के तहत सरकार एलआईसी के 22 करोड़ 13 लाख शेयर बेचकर साढ़े तीन प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेंगी। नई दिल्ली में कल संवाददाताओं से बातचीत में निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे ने बताया कि यह देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकारी स्वामित्व में व्यापक जन भागीदारी की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
इस अवसर पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारतीय जीवन बीमा निगम के 30 करोड़ पॉलिसी धारक हैं। -
नयी दिल्ली। सरकार 27.5-28.5 गीगाहर्ट्ज फ्रिक्वेंसी के स्पेक्ट्रम की नीलामी संभवत: नहीं करेगी और इस बैंड को उपग्रह सेवाओं के लिए रखेगी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इस फ्रिक्वेंसी बैंड के लिए आधार मूल्य की सिफारिश की है और सुझाव दिया है कि इसका इस्तेमाल मोबाइल के साथ-साथ उपग्रह सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है। दूरसंचार विभाग सिर्फ 27.5 गीगाहर्ट्ज तक के स्पेक्ट्रम की नीलामी पर विचार कर रहा है क्योंकि दोनों सेवाओं के बीच इसे बांटना कठिन होगा।‘‘ एक अधिकारी ने कहा, ट्राई को यह जानकारी है कि 5जी और उपग्रह सेवा प्रदाताओं के लिए साथ में काम करना मुश्किल होगा। हम सिर्फ 27.5 गीगाहर्ट्ज तक की नीलामी करेंगे।’’दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग में अभी कई तरह की बातों पर विचार चल रहा है और अभी तक कुछ भी तय नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) इस विषय में फैसला लेगा। यह ट्राई को अपनी प्रतिक्रिया देगा और उसके आधार पर डीसीसी अपने निर्णय लेगा। अंतिम फैसला मंत्रिमंडल का होगा। अभी तक कुछ तय नहीं है।’’
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नयी दिल्ली। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) ने शुक्रवार को कहा कि एसयूवी अर्बन क्रूजर और हैचबैक ग्लांजा की कीमतों में एक मई 2022 से वृद्धि की जाएगी।कंपनी ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि वाहन निर्माण की लागत में वृद्धि होने के कारण गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। अभी अर्बन क्रूजर की कीमत 8.88-11.58 लाख रुपये के बीच और ग्लांजा की 6.39-9.96 लाख रुपये के बीच है।टीकेएम के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘निर्माण लागत बढ़ने के कारण मूल्य वृद्धि करनी पड़ी है। हालांकि हमारे ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कुल मूल्यवृद्धि कम ही रखी गई है।’’इस्पात, एल्युमिनियम और अन्य महंगी धातुओं समेत कच्ची सामग्री की ऊंची कीमतों का असर वाहन विनिर्माताओं पर पड़ा है। इसी क्रम में कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने भी इस महीने अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ाई थीं। इससे पहले टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतें औसतन 1.1 फीसदी बढ़ाई थीं।
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माउंटेन व्यू (अमेरिका)। सर्च इंजन गूगल ने ऑनलाइन व्यक्तिगत जानकारी को निजी रखने के लिए नए विकल्प पेश किए हैं।कम्पनी ने शुक्रवार को कहा कि अब लोग व्यक्तिगत संपर्क जानकारी जैसे फोन नंबर, ईमेल और भौतिक पते को खोज परिणामों से हटाने के लिए अनुरोध कर सकेंगे।
नई नीति ऐसी अन्य जानकारी को भी हटाने की अनुमति देती है, जिससे कि निजी जानकारी के सार्वजनिक होने का खतरा है जैसे कि गोपनीय ‘लॉग-इन क्रेडेंशियल’।ये ‘लॉग-इन क्रेडेंशियल’ उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर ऑनलाइन खातों को लॉग-इन करने और उनकी पहचान सत्यापित करने में सक्षम बनाते हैं।
कम्पनी ने एक बयान में कहा कि सूचना तक स्वतंत्र पहुंच महत्वपूर्ण है, ‘‘ लेकिन साथ ही लोगों को उन उपकरणों के साथ सशक्त बनाना भी जरूरी है, जिनकी जरूरत उन्हें अपनी संवेदनशील, व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी की रक्षा करने के लिए है।’’बयान में कहा गया, ‘‘ गोपनीयता और ऑनलाइन सुरक्षा साथ-साथ चलती है। इसलिए जब आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो यह जरूरी है कि आपकी संवेदनशील, निजी पहचान संबंधी जानकारी तक कैसे पहुंचा जा सकता है, यह नियंत्रण आपके पास हो।’’
गूगल सर्च’ ने इससे पहले लोगों को ऐसी व्यक्तिगत सामग्री हटाने के लिए अनुरोध करने की अनुमति भी दी थी, जिसके सार्वजनिक होने से उन्हें प्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंच सकता है। इसमें ‘डॉक्सिंग’ के कारण निजी जानकारी हटाने और धोखाधड़ी से बचने के लिए बैंक खाता या क्रेडिट कार्ड नंबर जैसे व्यक्तिगत विवरण हटाने के लिए अनुरोध किया जा सकता है।‘डॉक्सिंग’ से तात्पर्य, विशेष रूप से दुर्भावनापूर्ण इरादे से इंटरनेट पर किसी विशेष व्यक्ति के बारे में निजी या पहचान संबंधी जानकारी खोजना और प्रकाशित करना है।कम्पनी ने कहा कि इस तरह की जानकारियां कई अप्रत्याशित मंचों पर दिखने लगती हैं और इनका कहीं तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए नीतियों को बदलने की जरूरत है। व्यक्तिगत संपर्क जानकारी के ऑनलाइन उपलब्ध होने से खतरा उत्पन्न हो सकता है।गूगल ने कहा कि ऐसी सामग्री हटाने के वास्ते विकल्प देने के लिए उनसे कई अनुरोध किए गए थे। -

-ओडिशा में स्थित जेएसपी के अंगुल प्लांट में देश की विशालतम रिबार मिल का किया लोकार्पण
-1.4 एमटीपीए क्षमता का अत्याधुनिक यह रिबार मिल 50 मिलीमीटर के टीएमटी रिबार उत्पादन में सक्षम
-केंद्रीय मंत्री ने अंगुल में कोल गैसीफिकेशन आधारित 2 एमटीपीए क्षमता वाले डीआरआई प्लांट का मुआयना किया
-कोल गैसीफिकेशन प्लांट प्रतिदिन 2000 टन कार्बन डाई-ऑक्साइड वातावरण में जाने से रोक रहा
नई दिल्ली। केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने गुरुवार को ओडिशा के अंगुल स्थित जिन्दल स्टील एंड पावर (जेएसपी) के 6 एमटीपीए (मिलियन टन प्रतिवर्ष) क्षमता वाले एकीकृत स्टील प्लांट में अत्याधुनिक और विशालतम रिबार मिल राष्ट्र को समर्पित की। 1.4 एमटीपीए क्षमता का यह रिबार मिल 50 मिलीमीटर चौड़ा टीएमटी रिबार उत्पादन करने में सक्षम है। श्री सिंह ने अंगुल में ही स्थित विश्व के पहले कोल गैसीफिकेशन आधारित 2 एमटीपीए क्षमता वाले डीआरआई प्लांट का भी मुआयना किया। क्लीन कोल की अवधारणा को साकार करने वाले कोल गैसीफिकेशन प्लांट ने पर्यावरण संरक्षण में बड़ी सफलता हासिल की है और प्रतिदिन 2000 टन कार्बन डाई-ऑक्साइड को वातावरण में जाने से रोक रहा है।
यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जेएसपी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए कटिबद्ध है। कंपनी ने राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्पों के तहत यह रिबार मिल लगाई है। आने वाले समय में कंपनी ने कारोबार विस्तार की अनेक योजनाएं बनाई हैं। जेएसपी का लक्ष्य अंगुल प्लांट का उत्पादन 2025 तक 15 एमटीपीए करना है।
जेएसपी के चेयरमैन श्री नवीन जिन्दल ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री रामचंद्र प्रसाद सिंह के करकमलों से देश के विशालतम रिबार मिल का लोकार्पण हुआ है। हमने राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यहां कोल गैसीफिकेशन आधारित डीआरआई प्लांट लगाया है। हम सरकार के उस संकल्प के साथ हैं, जिसमें 2070 तक भारत को कार्बन न्यूट्रल देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर जेएसपी के प्रबंध निदेशक श्री वी.आर. शर्मा ने कहा कि नए रिबार मिल में हम 50 मिलीमीटर चौड़ा टीएमटी रिबार का उत्पादन कर सकेंगे, जो अपने-आप में अनूठा है। हमारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम ने यह सफल प्रयोग किया है, जो आने वाले समय में निर्माण क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। जेएसपी राष्ट्र के विकास में योगदान के लिए सदैव समर्पित है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिन्दल स्टील एंड पावर के बारे में
जिन्दल स्टील एंड पावर स्टील, ऊर्जा, खनन और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र का अग्रणी उद्योग समूह है। पूरे विश्व में लगभग 12 अरब डॉलर के निवेश वाली यह कंपनी निरंतर अपने कारोबार का विस्तार कर रही है और अपनी क्षमताओं के समुचित उपयोग के लिए प्रयासरत है ताकि आत्मनिर्भर भारत निर्माण का सपना साकार हो सके। -
नयी दिल्ली। कोलगेट-पामोलिव इंडिया लिमिटेड के निदेशक मंडल ने प्रभा नरसिम्हन की प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने गुरुवार को बताया कि नरसिम्हन की नियुक्ति एक सितंबर, 2022 से प्रभावी होगी।कंपनी ने इस साल मार्च में नरसिम्हन को अपना एमडी और सीईओ नियुक्त करने की घोषणा की थी। कंपनी की तरफ से शेयर बाजार को भेजी गई जानकारी के अनुसार निदेशक मंडल ने इसके अलावा 28 अप्रैल से विक्रम सिंह मेहता की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। बैठक के दौरान निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 21 रुपये प्रति शेयर के दूसरे अंतरिम लाभांश को भी मंजूरी दी।
- बेंगलुरु .जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की घोषणा के बाद से एलआईसी के 6.48 करोड़ पॉलिसीधारकों ने देश की इस सबसे बड़ी बीमा कंपनी के शेयर खरीदने को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई है। वित्त मंत्रालय के तहत निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में निदेशक राहुल जैन ने कहा, ‘‘आईपीओ को लेकर जबर्दस्त प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इसके कुछ आंकड़े हमारे पास हैं, मसलन 6.48 करोड़ पॉलिसीधारकों ने कट-ऑफ तिथि (28 फरवरी, 2022) तक अपने पैन नंबर को पॉलिसी विवरण के साथ जोड़ा है।'' एलआईसी ने अपने 21,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 902-949 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इसके पॉलिसीधारकों को दस फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। जैन ने कहा, ‘‘पॉलिसीधारक चाहे जो भी हों, यदि उन्होंने अपने पैन कार्ड की जानकारी 28 फरवरी तक पॉलिसी विवरण में जोड़ी है, तो वे आरक्षित श्रेणी के जरिये एलआईसी आईपीओ में भागीदारी कर सकते हैं। दीपम निदेशक ने कहा कि कोई भी पॉलिसीधारक आरक्षित श्रेणी में दो लाख रुपये तक का निवेश कर सकता है, खुदरा श्रेणी में भी दो लाख रुपये तक का निवेश किया सकता है। आईपीओ में एलआईसी पॉलिसीधारकों को 60 रुपये की छूट मिलेगी। जैन ने कहा कि ये 6.48 लाख पॉलिसीधारक आईपीओ में भागीदारी कर सकते हैं, बशर्ते वे डीमैट खाता खुलवा लें। कंपनी का आईपीओ चार मई को खुलकर नौ मई को बंद होगा। बोलियां 15 शेयरों के लॉट में लगाई जा सकेंगी।
- नयी दिल्ली. ओयो के संस्थापक और समूह सीईओ रितेश अग्रवाल ने कहा कि भारत के छोटे शहर अब युवा आबादी की आकांक्षाओं से प्रेरित उद्यमिता के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने का मौका देने से देश में कई यूनिकॉर्न तैयार होंगे। उन्होंने ‘ग्लोबल यूनिकॉर्न समिट' में तकनीक के उपयोग से भारत की विशाल ग्रामीण आबादी को जोड़ने और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद करने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन सीआईआई और डीपीआईआईटी ने मिलकर किया है।उन्होंने कहा कि इंटरनेट सुविधा का तेजी से विस्तार, बड़े पैमाने पर कम लागत में तेजी से वितरण की गुंजाइश और पूंजी तक पहुंच के साथ देश के छोटे व्यवसायों के पास बड़ी कंपनियां बनने के अवसर हैं। अग्रवाल ने कहा कि नया युवा भारत अपने कार्य क्षेत्रों में विश्व में अग्रणी बनाने की इच्छा रखता है।उन्होंने कहा कि इस बड़े अवसर में छोटे शहरों की प्रमुख भूमिका है। उन्होंने कहा कि ये शहर अब सिर्फ बाजार नहीं हैं, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर नए उद्यमी बन रहे हैं और वे सिर्फ टियर-2 और टियर-3 बाजारों में खुश नहीं हैं। अग्रवाल ने कहा कि यह एक बेहद संरचनात्मक बदलाव है, जो भारत के छोटे शहरों में हो रहा है।
- नयी दिल्ली. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) सचिव अनुराग जैन ने स्टार्टअप से टियर-2 और टियर-3 शहरों पर खास ध्यान देने को कहा है, जहां व्यापार के बड़े अवसर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने स्टार्टअप से समाज के सामने आने वाली समस्याओं के स्थायी समाधान की तलाश करने का आह्वान भी किया। जैन ने सीआईआई के ग्लोबल यूनिकॉर्न समिट में कहा, ‘‘हमें ग्रामीण बाजारों, टियर-2 और टियर-3 शहरों को नहीं भूलना चाहिए। ग्रामीण बाजार बहुत तेजी से बढ़ेगा... हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि मेरा समाधान टिकाऊ है या नहीं।'' उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है और यूनिकॉर्न की संख्या में वृद्धि के लिहाज से देश दूसरे नंबर पर है।
- मुंबई. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार वर्ष 2022 की पहली तिमाही में भारत में सोने की मांग 18 प्रतिशत घटकर 135.5 टन रह गई। डब्ल्यूजीसी ने कहा कि मुख्य रूप से कीमतों में तेज वृद्धि के कारण मांग घटी। वर्ष 2021 के पहले तीन महीनों में सोने की मांग 165.8 टन थी। सोने की मांग पर डब्ल्यूजीसी द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि कीमत के लिहाज से जनवरी-मार्च में सोने की मांग 12 फीसदी घटकर 61,550 करोड़ रुपये रह गई। एक साल पहले की इसी अवधि में यह आंकड़ा 69,720 करोड़ रुपये था। डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय सीईओ (भारत) सोमसुंदरम पी आर ने बताया कि जनवरी में सोने की कीमतें बढ़ने लगीं और कीमती धातु इस साल की पहली तिमाही में आठ प्रतिशत बढ़कर 45,434 रुपये प्रति 10 ग्राम (करों के बिना) के स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार समीक्षाधीन तिमाही के दौरान देश में आभूषणों की कुल मांग 26 प्रतिशत गिरकर 94.2 टन रह गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में 126.5 टन थी। इस दौरान मूल्य के लिहाज से आभूषणों की मांग में 20 प्रतिशत की कमी हुई। डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च तिमाही में सोने की वैश्विक मांग 34 प्रतिशत बढ़कर 1,234 टन हो गई। भूराजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। वर्ष 2021 की पहली तिमाही के दौरान वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 919.1 टन थी।
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नयी दिल्ली। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सरकार जून की शुरुआत में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी कर सकती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूरसंचार विभाग अपेक्षित समय सीमा के अनुसार काम कर रहा है और स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण के संबंध में उद्योग की चिंताओं को हल करने की प्रक्रिया जारी है।स्पेक्ट्रम नीलामी के कार्यक्रम के बारे में पूछने पर वैष्णव ने कहा कि इसके जून की शुरुआत में होने की उम्मीद है।
दूरसंचार नियामक ट्राई ने 5जी सेवाओं को लागू करने के लिए एक बड़ी नीलामी योजना तैयार की है।वैष्णव ने कहा, "हम नीलामी करने के लिए अपनी समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।"
मंत्री ने कहा कि डिजिटल संचार आयोग ट्राई की सिफारिशों पर विचार करेगा और स्पष्टीकरण के लिए उनसे संपर्क करेगा।ट्राई ने बीते दिनों 5जी सेवाओं को लेकर 30 साल से अधिक समय के लिये विभिन्न बैंड में 7.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के स्पेक्ट्रम नीलामी की सिफारिश की थी। नियामक ने मोबाइल सेवाओं के लिये स्पेक्ट्रम बिक्री के लिये जिस कीमत की सिफारिश की है कि वह आरक्षित या आधार मूल्य से 39 प्रतिशत कम है। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के संगठन भारतीय सेल्युलर ऑपरेटर संघ (सीओएआई) ने स्पेक्ट्रम कीमतों में कटौती के बारे में ट्राई की सिफारिशों पर गहरी निराशा जताते हुए कहा कि सुझाई गई कीमतें भी बहुत ज्यादा हैं। -
नयी दिल्ली। जेम्स मर्डोक की लूपा सिस्टम्स के निवेश उद्यम बोधि ट्री सिस्टम्स और उदय शंकर ने प्रसारण सेवा से जुड़ी कंपनी वायकॉम 18 में 13,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की है। उदय शंकर स्टार एंड डिज्नी इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं। यह निवेश उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस के साथ त्रिपक्षीय भागीदारी के तहत किया जा रहा है। इससे देश में सबसे बड़ी टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग कंपनियों में से एक अस्तित्व में आएगी। भागीदारी के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी रिलायंस प्रोजेक्ट्स एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विसेज लि. (आरपीपीएमएसएल) 1,645 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके साथ लोकप्रिय जियोसिनेमा ओटीटी ऐप को वायकॉम18 में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। आरपीपीएमएसएल की टेलीविजन, ओटीटी (ओवर द टॉप), वितरण, सामग्री सृजन और कार्यक्रम तैयार करने के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपस्थिति है। पैरामाउंट ग्लोबल (पूर्व में वायकॉम सीबीएस) वायकॉम18 की शेयरधारक बनी रहेगी। वह वायकॉम18 को अपनी प्रमुख वैश्विक सामग्रियों की आपूर्ति जारी रखेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, ‘‘जेम्स और उदय की पृष्ठभूमि की तुलना नहीं की जा सकती। दोनों ने करीब दो दशक के दौरान भारत, एशिया और दुनिया में मीडिया परिवेश को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- नयी दिल्ली. दोपहिया वाहन कंपनी टीवीएस मोटर ने आपसी हित और वाणिज्यिक परिवहन के क्षेत्र में सहयोग के लिए बाइक-टैक्सी मंच रैपिडो के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने एक बयान में कहा कि दोनों कंपनियां परिवहन व्यवस्था और निर्बाध प्रौद्योगिकी मंच में अपने मजबूत पक्ष को एक साथ लाएंगी। समझौते के तहत कंपनियां दोपहिया और तिपहिया वाहनों दोनों को शामिल करेंगी। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन (आईसीई) और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खंडों में विस्तार करेंगी। टीवीएस मोटर कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक सुदर्शन वेणु ने कहा, ‘‘रैपिडो ने 'कैप्टन्स' और 'राइडर्स' का एक मजबूत उपयोगकर्ता आधार बनाया है और आज वह भारत में अग्रणी बाइक-टैक्सी मंच है। हमें विश्वास है कि इस करार से हम टीवीएस इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो से उच्च गुणवत्ता वाले, कनेक्टेड उत्पादों और हमारे समूह से वित्तपोषण का उपयोग करके गतिशीलता और उच्च-सार्वजनिक खंड में अपनी पहुंच का विस्तार कर सकेंगे।" रैपिडो के सह-संस्थापक अरविंद सांक ने कहा, "यह गठजोड़ हमें अपनी क्षमताओं को मजबूत करने और हमारे इलेक्ट्रिक बाइक बेड़े का विस्तार करने में मदद करेगी। हमारा उद्देश्य लाखों भारतीयों को परिवहन के एक किफायती, आरामदायक, सुविधाजनक और सुरक्षित वैकल्पिक साधन के माध्यम से यात्रा करने में मदद करना है।" कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य भारत के सभी प्रमुख शहरों में टीवीएस आईक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर की उपस्थिति का विस्तार करना है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी कार्यक्रम के तहत 2023-24 तक पहले स्वदेशी चिपसेट को व्यावसायिक रूप से पेश करने की समयसीमा तय की है। दी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को यह जानकारी दी।उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी (डीआईआर-वी) कार्यक्रम का मकसद माइक्रोप्रोसेसरों की भावी पीढ़ियों का निर्माण करना है। ये माइक्रोप्रोसेसर परिवहन, कंप्यूटिंग और डिजिटलीकरण को लेकर भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करेंगे। चंद्रशेखर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एक बड़े मील के पत्थर, जिस पर मैं अत्यधिक ध्यान केंद्रित कर रहा हूं, वह है दिसंबर, 2023 तक या 2024 की शुरुआत में शक्ति और वेगा प्रोसेसर के वाणिज्यिक सिलिकॉन का पहला सेट उपलब्ध कराना।'' उन्होंने आगे कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि कम से कम कुछ कंपनियां 2023-24 से पहले डीआईआर-वी उत्पादों - शक्ति और वेगा के लिए अपने उत्पाद डिजाइन को अपनाएं और जब सिलिकॉन तैयार हो जाए, तो वे विनिर्माण और उत्पादों में चिप को लगाना शुरू कर दें।'' आईआईटी मद्रास और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडैक) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम के तहत ओपन सोर्स आर्किटेक्चर का उपयोग करते हुए क्रमशः शक्ति (32 बिट) और वेगा (64 बिट) नामक दो माइक्रोप्रोसेसर विकसित किए हैं। सरकार ने आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटी को डीआईआर-वी कार्यक्रम के मुख्य ऑर्किटेक्चर और सीडैक त्रिवेंद्रम के वैज्ञानिक कृष्णकुमार राव को कार्यक्रम प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया है।
- मुंबई. देश का खुदरा उद्योग महामारी के प्रकोप से उबरने के बाद एक बार फिर वृद्धि के रास्ते पर चल पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग का आकार 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ 2032 तक बढ़कर 2,000 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। बीसीजी-आरएआई की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य और किराना, रेस्तरां और त्वरित सेवा रेस्टोरेंट (क्यूएसआर), तथा टिकाऊ उपभोक्ता सामान जैसे कुछ खंड कोविड से पहले के स्तर से उबर गए हैं, जबकि आभूषण, परिधान और फुटवियर जैसे खंड पूरी तरह से पुनरुद्धार की राह पर हैं। बीसीजी के प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ भागीदार अभीक सिंघी ने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था को खपत से बढ़ावा मिल रहा है और हम देख रहे हैं कि कोविड महामारी के चलते दो साल के ठहराव के बाद खपत में वृद्धि सकारात्मक हो गई है।'' उन्होंने कहा कि भारतीय खुदरा उद्योग का आकार अगले 10 वर्षों में लगभग 2,000 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।सिंघी के मुताबिक, अगले दशक में संगठित खुदरा विक्रेता ऑफलाइन और ऑनलाइन, जैसे सभी प्रारूपों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत महामारी से पहले लगभग 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी और महामारी के दौरान नकारात्मक क्षेत्र में चली गई थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि अब खपत 17 प्रतिशत की दर से बढ़ने के साथ महामारी-पूर्व के स्तर को पार कर गई है।


























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