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वेदांता का कारोबार विभाजन एक मई से होगा प्रभावी

नयी दिल्ली.  खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लि. के निदेशक मंडल ने एल्युमीनियम, बिजली, तेल और गैस तथा लौह अयस्क इकाइयों को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित करने की प्रभावी तिथि एक मई, 2026 तय की है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ''कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने चल रही पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत, 20 अप्रैल, 2026 को हुई अपनी बैठक में, अन्य बातों के अलावा, इस योजना को एक मई, 2026 से प्रभावी बनाने की मंजूरी दी है।'' कंपनी ने यह भी बताया कि संबंधित अन्य इकाइयों से परामर्श करने के बाद, बोर्ड ने इकाइयों को अलग करने की योजना के तहत शेयर प्राप्त करने के लिए पात्र शेयरधारकों का निर्धारण करने को लेकर एक मई को रिकॉर्ड तिथि निर्धारित किया है। वेदांता ने एक बयान में कहा कि यह कदम कंपनी की कॉरपोरेट संरचना को क्षेत्र-केंद्रित स्वतंत्र कंपनियों के साथ सरल बनाने में मदद करेगा। साथ ही यह संप्रभु संपत्ति कोष, खुदरा निवेशकों और रणनीतिक निवेशकों सहित वैश्विक निवेशकों को वेदांता की विश्व स्तरीय संपत्तियों में प्रत्यक्ष निवेश के अवसर प्रदान करेगा। कारोबार को अलग करने की योजना के तहत, वेदांता चार अलग-अलग कंपनियों... वेदांता एल्युमिनियम मेटल लि. (वीएएमएल), तलवंडी साबो पावर लि. (टीएसपीएल), माल्को एनर्जी लिमिटेड (एमईएल) और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (वीआईएसएल)... को अलग-अलग सूचीबद्ध करने की योजना बना रही है। शेयर बाजार को दी गयी सूचना के अनुसार, योजना के तहत, वेदांता के शेयरधारकों को चारों कंपनियों में 1:1 के अनुपात में इक्विटी शेयर प्राप्त होंगे। वेदांता ने भारत एल्युमिनियम कंपनी लि. (बाल्को) में अपनी शेयरधारिता को वेदांता एल्युमिनियम मेटल लि. को हस्तांतरित करने को भी मंजूरी दे दी है। कारोबार को अलग करने के परिणामस्वरूप एल्युमीनियम, बिजली, तेल एवं गैस, तथा लौह एवं इस्पात क्षेत्रों में चार स्वतंत्र, क्षेत्र केंद्रित इकाइयां अस्तित्व में आएंगी। तलवंडी साबो पावर लिमिटेड और माल्को एनर्जी लिमिटेड का नाम बदलकर क्रमशः वेदांता पावर और वेदांता ऑयल एंड गैस कर दिया जाएगा। कंपनी के अनुसार, विभिन्न कारोबार को अलग-अलग करने से संचालन पर ध्यान बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कारोबार के सुगम संचालन में कारगर साबित होगा। वेदांता लिमिटेड ने पहले कहा था कि उसने विभिन्न कारोबार को अलग-अलग करने की प्रस्तावित समय सीमा 30 जून तक बढ़ा दी है। इसका कारण कुछ सरकारी प्राधिकरणों से मंजूरी अभी भी लंबित हैं और उन पर प्रक्रिया चल रही है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी ने पहले कारोबार को अलग करने के प्रस्ताव की मूल समय सीमा 31 मार्च, 2025 से बढ़ाकर 30 सितंबर, 2025 और फिर 31 मार्च, 2026 कर दी थी। 

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