भारत, इजराइल ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया
यरुशलम. भारत और इजराइल ने "समय की कसौटी पर खरे" साबित हुए अपने संबंधों को बृहस्पतिवार को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया और "पारस्परिक रूप से लाभकारी" मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इजराइल का दौरा कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए कहा कि मानवता को कभी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा कि भारत का सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से जुड़ा है, और कहा कि नयी दिल्ली गाजा शांति पहल का पूरी तरह से समर्थन करती है। दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक के बाद, भारत और इजराइल ने कुल 17 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विनिर्माण, संस्कृति, समुद्री विरासत, कृषि और अन्य क्षेत्रों में गहन सहयोग प्रदान करेंगे। भारत और इजराइल ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में काम कर अपनी घनिष्ठ रक्षा साझेदारी का और विस्तार करने का भी संकल्प लिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, वार्ता में अमेरिका-ईरान गतिरोध और क्षेत्र के अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के महत्व में भारत के दृढ़ विश्वास का उल्लेख किया तथा शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की दिशा में, यदि आवश्यक हो, तो समर्थन देने के लिए नयी दिल्ली की तत्परता को दोहराया। अपने मीडिया बयान में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इजराइल संबंधों की बढ़ती प्रगति के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि यह संबंध गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय करुणा की मजबूत नींव पर बना है। उन्होंने कहा, "हमारे संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। आज हमने इस सिद्ध साझेदारी को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।" दोनों देशों के संबंधों को 2017 में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया था।
मोदी ने कहा, "हमारा आर्थिक सहयोग विकास, नवाचार और साझा समृद्धि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। पिछले वर्ष, हमने पारस्परिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए। हम जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को भी अंतिम रूप देंगे।" प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने में भारत और इजराइल के संयुक्त संकल्प के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "भारत और इजराइल इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। किसी भी रूप में आतंकवाद को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद और उसके समर्थकों का विरोध करने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं, और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सुरक्षा हित पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "इसलिए, हमने शुरू से ही संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। यह ग्लोबल साउथ और समस्त मानवता की पुकार है।" उन्होंने कहा, "भारत का रुख स्पष्ट है: मानवता को कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। गाजा शांति योजना के माध्यम से शांति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। भारत ने इन प्रयासों का पूर्ण समर्थन किया है। भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ संवाद और सहयोग जारी रखेंगे।" प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए गए संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी हमारी भावी साझेदारी का केंद्रबिंदु है। आज हमने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए एक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय लिया है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नयी गति मिलेगी।" उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि इजराइल में यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) के उपयोग के लिए एक समझौता हो गया है। हम डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने अनुभवों को साझा करके लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।" मोदी ने दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंधों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा, "रक्षा क्षेत्र में हमारा दशकों पुराना और भरोसेमंद सहयोग है। पिछले वर्ष हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन इसे नए आयाम प्रदान करेगा। हम मिलकर संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।" भारत स्वदेशी वायु रक्षा कवच "सुदर्शन चक्र" विकसित करने पर विचार कर रहा है, और समझा जाता है कि भारतीय पक्ष ने इजराइल की 'आयरन डोम' वायु रक्षा प्रणाली के कुछ तत्वों को अपने प्रस्तावित मिसाइल कवच में शामिल करने की संभावना का भी पता लगाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष नागरिक परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो नवाचार करते हैं और इजराइल तथा भारत नवाचार के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने कहा, "हम गौरवान्वित प्राचीन सभ्यताएं हैं, हमें अपने अतीत पर बहुत गर्व है, लेकिन हम अपने भविष्य को संवारने के लिए भी पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं और हम मिलकर ऐसा कर सकते हैं।" कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इस सहयोग को भविष्योन्मुखी दिशा देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, "भारत में इजराइल के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्र हमारी मित्रता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनकी सफलता को देखते हुए, हमने इनकी संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा है।" मौजूदा उत्कृष्टता केंद्र कृषि उत्पादन के लिए नयी तकनीकें प्रदान करते हैं।
मोदी ने कहा, "इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, हम उत्कृष्ट गांवों के निर्माण पर काम कर रहे हैं। इससे भारत के हर गांव में इजराइली तकनीक पहुंचेगी, जिससे लाखों किसानों की आय और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।" एक मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश सचिव मिसरी ने फलस्तीन मुद्दे पर भारत के रुख के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत अमेरिका समर्थित गाजा शांति पहल का समर्थन करता है और उन्होंने बुधवार को इजराइल की संसद (नेसेट) में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में इस बारे में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया। मिसरी ने मोदी की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उम्मीद खोने का समय नहीं है, बल्कि उम्मीद बनाए रखने का समय है। भारत और इजराइल के बीच भारत-पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के कार्यान्वयन और आई2यू2 (भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका) के ढांचे के तहत सहयोग पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा, "हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देते हुए, हम भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे और भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका ढांचे पर नयी गति से आगे बढ़ेंगे।" नयी दिल्ली रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ आज हुई चर्चा बेहद फलदायी रही। हमने अपने सदियों पुराने सहयोग को विशेष रणनीतिक सहयोग के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय दोनों देशों के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।"









.jpg)
Leave A Comment