हिंदी दिवस पर अमित शाह का संदेश- भाषाएं अनेक रहें, लेकिन भारत की आवाज एक रहनी चाहिए
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजभाषा विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जोड़े जाने से हिंदी और अधिक लचीली बनी है और यह शब्दकोश अब 8 लाख शब्दों तक पहुंच चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक यह विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि भाषाएं अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भावना भारतीय रहनी चाहिए और बोलियां अनेक रहें, पर भारत की आवाज एक रहनी चाहिए।
अमित शाह ने हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मणिकंचन योग है कि आज हिंदी दिवस और गणेश चतुर्थी दोनों हैं। विघ्नहर्ता भगवान गणेश भारतीय भाषाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे और मार्ग की बाधाओं का हरण करेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को याद किया और कहा कि तिलक ने देश में जागरूकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संस्कृति और इतिहास के माध्यम से मजबूत करने की आवश्यकता को समझा था। उन्होंने गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के माध्यम से देशभक्ति का बड़ा ज्वार पैदा किया। अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र परंपराओं और विशाल सोच की भूमि है। भक्ति आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र के अनेक संतों ने ऐसी रचनाएं कीं, जिनसे देशभर में भक्ति आंदोलन को बल मिला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है, जिन्होंने स्वराज, स्वधर्म और स्वभाषा को स्वराज का मूल अंग बनाया। शासन में मराठी को महत्व देकर उन्होंने भाषा का कोष निर्मित किया और इसी माध्यम से हिंदवी स्वराज के काल तक शासन चलता रहा।
अमित शाह ने कहा कि कार्यक्रम में हिंदी शब्द संसाधन, हिंदी टंकण और आशुलिपि प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उन्होंने राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार भी प्रदान किए और पुरस्कार प्राप्त करने वालों को बधाई दी। गृह मंत्री ने ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’, ‘भारतीय ज्ञानतंत्र : स्रोत और स्वरूप’, ‘अँधेरों से उजालों तक’, राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित राजभाषा विभाग की पत्रिका ‘राजभाषा भारती’ की विशेष स्मारिका तथा ‘वंदे मातरम के 150 अध्याय’ जैसे प्रकाशनों का विमोचन भी किया।
अमित शाह ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ कोई साधारण गीत नहीं है, बल्कि घनघोर गुलामी के कालखंड में भारतीय चेतना को जागृत करने का बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का महान प्रयास था। ‘आनंदमठ’ में लिखा गया यह गीत देखते-देखते पूरे भारत में स्वतंत्रता की उद्घोषणा बन गया। उन्होंने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ ने स्वतंत्रता प्राप्ति की उत्कंठा और तीव्र भावना को जागृत करने के साथ भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव रखने का काम किया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से बाद में ‘वन्दे मातरम्’ के टुकड़े कर दिए गए और स्वतंत्रता के बाद भी इसे पूर्ण स्वरूप में स्वीकार करने में संसद को लगभग 80 वर्ष लग गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन्दे मातरम्’ को उसके पूर्ण स्वरूप और गौरव के साथ सरकारी समारोहों में गाए जाने की पहल की है।
गृह मंत्री ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष और छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम राजभाषा और भारतीय भाषाओं की यात्रा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां मराठी का सम्मान है और होना भी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही सबसे पहले मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। महाराष्ट्र में कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली सहित अनेक भाषाओं का विकास हुआ है और उन्हें सम्मान एवं स्वीकृति मिली है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा बहुभाषी प्रदेश है।
अमित शाह ने आचार्य विनोबा भावे को उद्धृत करते हुए कहा कि हिंदी के माध्यम से उन्होंने कश्मीर, असम और केरल के गांव-गांव तक भूदान-ग्रामदान का संदेश पहुंचाया। गृह मंत्री ने कहा कि राजभाषा का जुड़ाव देशभर की सभी भाषाओं से है, क्योंकि ये भाषाएं सदियों से देश की बोलचाल और आपसी व्यवहार का हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद गुजरात से आते हैं और उनकी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का दायित्व मिला, तो देशभर में काम करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, क्योंकि वह हिंदी समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि राजभाषा ने उन्हें देशभर में कार्य करने का बड़ा अवसर दिया।
अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र वीर सावरकर की भूमि है और सावरकर अपने समय के सबसे विद्वान भाषा-शास्त्रियों में से एक थे। उन्होंने ऐसे अनेक शब्दों की रचना की, जो भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं थे और बाद में उन्हें मराठी, राजभाषा और देश की अन्य भाषाओं में सहज स्वीकृति मिली। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने वीर सावरकर द्वारा संशोधित और रचे गए शब्दों को ऑनलाइन शब्दकोश ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में शामिल कर उनका सम्मान किया है।
अमित शाह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सोच-समझकर 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राजभाषा विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को महत्व दिया गया है। कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा सीखे बिना पूरी तरह विकसित नहीं हो सकता, क्योंकि मां के दुलार और भाई-बहन के प्यार को मातृभाषा के बिना समझना कठिन है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी मातृभाषा में सोचता, विश्लेषण करता और निर्णय लेता है, तो सोच, विश्लेषण और निर्णय बेहतर होते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि मातृभाषा के साथ एक और भारतीय भाषा सीखने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दूसरी भारतीय भाषा सीखने का अर्थ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ से जुड़ना है। अपनी मातृभाषा के साथ एक अन्य भारतीय भाषा सीखने से व्यक्ति भारतीयता से और गहराई से जुड़ता है और संकीर्ण विचारों से मुक्त होता है। उन्होंने कहा कि सरकार देश की हर भाषा को समृद्ध करना चाहती है।
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2019 में तय किया गया था कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 से अब तक राजभाषा समिति के चार खंड राष्ट्रपति को सौंपे जा चुके हैं और पांचवां खंड तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब भी किसी बड़े वैश्विक मंच या दूसरे देश में गए, उन्होंने राजभाषा और भारतीय भाषाओं में भाषण दिया। बड़े वैश्विक मंचों पर देश के प्रधानमंत्री को अपनी भाषा में बोलते सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा होता है।
गृह मंत्री ने कहा कि कई देशों के विश्वविद्यालयों में राजभाषा पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। भारत सरकार के पांच लाख से अधिक कर्मचारियों का प्रशिक्षण हो चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘कंठस्थ 2.0’ को पांच करोड़ से अधिक वाक्यों के साथ विदेशियों के लिए भी खोला गया है। उन्होंने कहा कि लीला राजभाषा और लीला प्रवाह (LILA – Learn Indian Languages through Artificial Intelligence) के भी अच्छे परिणाम मिले हैं। अमित शाह ने कहा कि 51 हजार शब्दों से शुरू हुआ ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ अब 8 लाख शब्दों तक पहुंच चुका है। इसमें 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जोड़े गए हैं, जिससे हिंदी और अधिक लचीली बनी है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक यह विश्व की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां हिंदी में किसी चीज के लिए शब्द उपलब्ध नहीं था, वहां तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली, ओड़िया समेत अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने ‘भारती – बहुभाषी अनुवाद सारथी’ का निर्माण किया है और ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की शुरुआत भी की गई है।
अमित शाह ने कहा कि सरकार भारतीय भाषाओं को शासन और विज्ञान की भाषा बनाना चाहती है, साहित्य को समृद्ध करना चाहती है और भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे से जोड़कर उनका बड़ा संपुट तैयार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जेईई, नीट और स्नातक प्रवेश परीक्षाओं को 13 भाषाओं में आयोजित करने का काम भी किया गया है। गृह मंत्री ने भाषाओं के बीच विवाद खड़ा करने वालों को संदेश देते हुए कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा में ही भारत को सही ढंग से समझ सकता है। यदि वह किसी विदेशी भाषा में भारत को समझने का प्रयास करेगा, तो उससे गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के सामने रखे ‘पंचप्रण’ में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का भी प्रण रखा है।
अमित शाह ने कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य एक विकसित शतदल कमल की तरह है, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी एक प्रादेशिक भाषा है। उन्होंने कहा कि किसी एक पंखुड़ी के नष्ट होने से कमल का सौंदर्य नष्ट हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि भारत की भाषाएं अलग-अलग स्वर जरूर हैं, लेकिन गीत एक है। राष्ट्रभक्ति और संस्कृति का गीत एक है। भाषाएं अनेक रहें, इसमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन भावना भारतीय रहनी चाहिए। बोलियां अनेक रहें, लेकिन भारत की आवाज एक रहनी चाहिए।



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