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 प्रधानमंत्री ने कहा,- वैश्विक विकास पर चर्चा सिर्फ कुछ देशों के बीच ही सीमित नहीं हो सकती

नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि खुले दिमाग के, लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाज नवाचार के लिए सबसे उपयुक्त है। आज छठे भारत-जापान संवाद सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक विकास पर चर्चा सिर्फ कुछ देशों के बीच नहीं हो सकती है। उन्होंने जोर दिया कि इस चर्चा का एजेंडा व्यापक होना चाहिए और विकास की रूपरेखा मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक और उससे आगे का समय उन समाजों का होगा जो सीखने और नवाचार पर एक साथ ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि नवाचार मानव सशक्तीकरण का आधार है और सीखने की प्रक्रिया में नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए।
 भगवान बुद्ध के विचारों और आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए इस संवाद मंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने पारंपरिक बौद्ध साहित्य और धर्मग्रंथों से संबंधित एक पुस्तकालय के निर्माण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय विभिन्न देशों के सभी बौद्ध साहित्य की डिजिटल प्रतियां एकत्र करेगा।
 प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुस्तकालय न केवल साहित्य का भंडार होगा, बल्कि यह मानव, समाज और मनुष्य और प्रकृति के बीच अनुसंधान और संवाद का भी एक मंच होगा। उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय के उद्देश्?यों में यह भी शामिल होगा कि बुद्ध के संदेश हमारी समकालीन चुनौतियों जैसे गरीबी, जातिवाद, उग्रवाद, लिंग भेदभाव और जलवायु परिवर्तन से निपटने में कैसे सहायक हो सकते हैं।
इस संवाद के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे पृथ्वी पर सकारात्मकता, एकता और करुणा की भावना का प्रसार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद का उद्देश्य एक साथ चलना है। श्री मोदी ने कहा कि यह वह समय है जब हमें अपने प्राचीन मूल्यों का स्मरण करते हुए आने वाले समय के लिए तैयारी करनी होगी।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मानवतावाद हमारी नीतियों का आधार होना चाहिए और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने संवाद को लगातार समर्थन के लिए जापान सरकार को धन्यवाद दिया। सम्मेलन से पूर्व अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंच पिछले कुछ वर्षों में काफी विकसित हुआ है और इसने वैश्विक शांति, सद्भाव और भाईचारे को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया है।
 संवाद सम्मेलन में अहिंसा और लोकतंत्र की सकारात्मक परंपराओं पर आधारित एशिया के भविष्य निर्माण पर चर्चा होती है।

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