मंत्रिमंडल ने देश में एथेनॉल बनाने की क्षमता बढाने की संशोधित योजना को स्वीकृति दी
नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने देश में पहली पीढी - वन जी एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए चावल, गेहूं, जौ, मक्का, ज्वार, गन्ना और चुकंदर इत्यादि से एथेनॉल निकालने की क्षमता बढ़ाने के लिए संशोधित योजना को मंजूरी दे दी है।
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एथेनॉल उत्पादक नई डिस्ट्रिलरी को चार हजार 573 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता देने को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि भारत को तेल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के वास्ते 2030 तक लगभग एक हजार करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा क्षमता 684 करोड़ लीटर तेल उत्पादन की है। श्री प्रधान ने बताया कि सरकार परियोजना के प्रस्तावकों द्वारा लिए गए ऋण पर एक वर्ष की मोहलत सहित पांच वर्ष के लिए ब्याज अनुदान का वहन करेगी। इसका निर्धारण प्रतिवर्ष 6 प्रतिशत ब्याज दर या बैंक द्वारा लिए गए ब्याज के 50 प्रतिशत में से जो भी कम होगा उसके आधार पर किया जाएगा।

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