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- ठंड के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. यदि आपको सर्दी के मौसम में कब्ज और गैस की समस्या रहती है तो परेशान न हों. इससे छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में आपको कुछ बदलाव करना पड़ेगा. हम आपको पांच ऐसे फलों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें खाने के बाद पाचन तंत्र से जुड़ी हर समस्या दूर हो जाएगी. आपको मालूम हो कि ठंड के मौसम में कम पानी पीने. फिजिकल एक्टिविटी अधिक नहीं करने और हैवी खाने से पेट सुस्त हो जाता है. ऐसे में हमें डाइजेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.पपीतापपीता में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस फल में फाइबर खूब पाया जाता है. पानी की मात्रा भी अधिक होती है. पपीता पेट और डाइजेशन के लिए किसी दवा से कम नहीं है. पपीता में पपेन नामक एक ऐसा एंजाइम होता है, जो पाचन को दुरुस्त करता है. आप पपीता को सीधे छिलका उतारकर खा सकते हैं. इसे सलाद और जूस के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.केलाकेला पेट के लिए बहुत ही अच्छा होता है. यह आसानी से पच जाता है. फाइबर से भरपूर केला का इस्तेमाल लंबे समय से कब्ज के घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. केला में मौजूद पोटेशियम शरीर को संतुलित रखता है. इनका हल्का प्रतिरोधी स्टार्च अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है जो पाचन क्रिया को शांत रखते हैं. पका केला खाने से बाउल सिंड्रोम में सुधार होता है. छोटी आंत में मौजूद माइक्रोविली को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है. केला खाने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और कब्ज-गैस से राहत मिलती है.अमरूदसर्दी के मौसम में अमरूद का उत्पादन खूब होता है. अमरूद में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. अमरूद में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करता है. अमरूद खाली पेट खाने से आंतों की सफाई शुरू हो जाती है. यह मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है.संतरासंतरा का सेवन सभी को करना चाहिए. संतरा न सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है. संतरा फाइबर और विटामिन सी का एक बढ़िया स्रोत है. संतरा पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इसका सेवन करने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. संतरा को आप फल और जूस किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.सेबसेब हमारी सेहत के लिए बहुती ही फायदेमंद होता है. इसी के कारण डॉक्टर भी इसे रोज खाने की सलाह देते हैं. सेब कब्ज के साथ दस्त से भी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. सेब में फाइबर पाया जाता है, जो पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में मददगार है. हर दिन एक-दो सेब खाने से कब्ज और दस्त की समस्या दूर हो जाती है.
- बालों का झड़ना रोकने और नए बालों को उगाने के लिए आप कुछ बहुत ही हेल्दी चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इससे बालों की जड़ों को मजबूती मिलेगी और चोटी भी नेचुरल तरीके से मोटी हो जाएगी। आइए अब जान लेते हैं कि वो कौन-सी चीजें हैं, जिनका आपको सेवन करना है।बालों के झड़ने और नए बाल ना उगने की समस्या कई लोगों को परेशान करती है। इन समस्याओं का वैसे कोई एक खास मौसम नहीं आता है, लेकिन सर्दियों में बाल थोड़े ज्यादा झड़ते हैं। अगर आप इस स्थिति से बचने के लिए तरह-तरह के शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल कर चुके हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है। कई बार हमारे बालों को बाहरी देखभाल के साथ अंदरूनी केयर की भी जरूरत होती है। अब अंदरूनी केयर के लिए आपको सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती है। आप अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं। अगर आप कुछ चीजों को डेली डाइट का हिस्सा बनाएंगे, तो बालों का झड़ना कम होगा। इनमें चमक आएगी और नए बाल तेजी से उगेंगे। बता दें कि फूड्स की इस लिस्ट के बारे में जानकारी डॉक्टर सरीन ने अपनी वीडियो में दी है। आइए अब बिना समय बर्बाद किए इन फूड्स के बारे में जान लेते हैं।सोयाबीनआपको बालों को बढ़ाने और इनका झड़ना रोकने के लिए अपनी डेली डाइट में सोयाबीन को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें 52 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है, जो बालों को जड़ों से मजबूत बनाते हैं। साथ ही, इसमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। ये सेहत और स्किन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।बादामबादाम में 21 ग्राम प्रोटीन होता है। ये बालों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें विटामिन ई, बायोटिन (B7), मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है। इनसे बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। हेयर फॉल रुकता है और हेयर ग्रोथ बढ़ती है।कद्दू के बीजकद्दू के बीजों में 19 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके अलावा, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने का काम करते हैं। इनसे बालों को मजबूती मिलती है और इनका झड़ना भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। ये बालों को घना बनाने में मदद करते हैं।दालदालों में 9 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके साथ ही, दालों में आयरन, जिंक और विटामिन जैसे पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इनसे बालों को जड़ से मजबूत बनाने, हेयर ग्रोथ बढ़ाने, हेयर फॉल रोकने और इन्हें चमकदार बनाने में मदद मिलती है।मजबूत बालों के लिए क्या खाएं?हरी मटरहरी मटर में 7 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें बायोटिन, आयरन, जिंक, और विटामिन बी की अच्छी मात्रा होती है। इससे बालों की ग्रोथ बढ़ती है, उन्हें मजबूत मिलती है और बालों का झड़ना कम होता है।
- ---फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्जआंवला बहुत ही गुणकारी खाद्य पदार्थ है। मॉडर्न साइंस से लेकर आयुर्वेद तक इसे शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक मानता है। इसमें कई सारे न्यूट्रिएंट्स की भरमार होती है, जो आपके पेट, लिवर, दिल, बाल और स्किन को हेल्दी बनाने के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन अगर आप किसी तरह की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो उसमें इसे इस्तेमाल करने का तरीका मालूम होना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने आंवला खाने के कई तरीके बताए हैं। जिसे आप अपनी समस्या के हिसाब से प्रयोग में ला सकते हैं। इसे उपयोग करने से आपको फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्ज, व्हाइट डिस्चार्ज, हेयरफॉल, पुरानी खांसी से राहत मिलने लगेगी।फैटी लिवरआज के समय में फैटी लिवर काफी आम हो गया है, लेकिन इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर का कहना है कि अगर फैटी लिवर की समस्या है तो 10ml आंवला जूस को 10ml एलोवेरा जूस के साथ लीजिए। इसमें 20ml पानी भी मिलाना है।कोलेस्ट्रॉलयह हार्ट अटैक के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए इसे कम करना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या में 10ml आंवला जूस को 10ml अदरक के जूस और 15ml पानी के साथ लीजिए।आंवला का सेवन कैसे करें?व्हाइट डिस्चार्ज और हेयरफॉलव्हाइट डिस्चार्ज की समस्या से राहत पाने के लिए 5 ग्राम आंवला चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ मिक्स करके लीजिए। ऊपर से चावल का पानी लीजिए। वहीं हेयरफॉल रोकने के लिए 20ml आंवला जूस को 5 ग्राम मिश्री के साथ या फिर 1 चम्मच आंवला चूर्ण को 1 चम्मच देसी घी और मिश्री के साथ लीजिए।पुरानी खांसी और डायबिटीजअगर पुरानी खांसी है और बार बार बीमार पड़ जाते हो, तो आपको इम्यूनिटी बढ़ानी होगी, इसके लिए आंवला चूर्ण या आंवला जूस को शहद के साथ लीजिए। डायबिटीज के रोगी आंवला जूस में ताजी हल्दी का जूस मिलाकर लें।कब्जफिजिकल एक्टिविटी कम होने और खाने में फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या बेहद आम हो गई है। जो कि आगे चलकर गंभीर हो सकती है। इसे ठीक करने के लिए सादा आंवला जूस को सुबह खाली पेट लेना है।
- रोजमर्रा के खाने के साथ अक्सर घरों में धनिया-पुदीना वाली हरी चटनी तो जरूर बनती है। ये चटनी केवल स्वाद बढ़ाने के काम में नहीं आती। ये सेहत के लिए भी गजब की फायदेमंद है। न्यूट्रिशनिस्ट शाह ने बताया कि अगर आपके घर में अगर इन 5 चीजों को मिलाकर हरी चटनी तैयार की जाती है तो इसे जरूर खाएं। इस चटनी को खाने के कई सारे फायदे हैं।किन चीजों को मिलाकर बनाएं हरी चटनी--हरी चटनी बनाने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि पुदीना, लहसुन, अदरक, करी पत्ता और अनारदाना लें। साथ ही इसमे सेंधा नमक, हरी मिर्च, नींबू का रस मिलाएं। इस चटनी को इन चीजों के साथ मिलाकर तैयार करें।रोजाना खाने के फायदे--न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि रोजाना इस चटनी को आदत की तरह अपने मील में शामिल करें। एक चम्मच ये चटनी अगर मील के साथ खाया जाए तो ये शरीर की सौ से ज्यादा बीमारियों को सॉल्व कर सकती है।हरी चटनी कैसे पहुंचाएगी शरीर को फायदा--------अनारदाना और लहसुन--अनारदाना और लहसुन का कॉम्बिनेशन ब्लड फ्लो को इंप्रूव करता है। आर्टरीज को क्लीन करता है। जिससे ब्लड साफ होता है और साथ ही ब्लड का फ्लो भी बेहतर होता है।अदरक और लहसुन--अदरक और लहसुन का कॉम्बिनेशन खाने को पचाने में मदद करता है और डाइजेशन को इंप्रूव करता है।करी पत्ते के फायदे--वहीं इस चटनी में मिक्स करी पत्ता बॉडी के ऑर्गंस को एक दूसरे से सिंक करने में मदद करता है। जिससे सारे बॉडी ऑर्गंस सुचारु रूप से काम कर सके।हरी चटनी के बता दिए इतने सारे फायदे--जब इन सारी चीजों की सामग्री को मिलाकर चटनी बनाकर खाते हैं तो इससे कई तरह की समस्याएं नहीं होगी और फायदा पहुंचेगा।डाइजेशन इंप्रूव होगा। खाया हुआ खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा। जिससे बॉडी को बेहतर नरिश्मेंट मिलेगी।खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा तो गैस और ब्लोटिंग नहीं होगी।ब्लड क्लीन होने से स्किन पर एक्ने और पिंपल की समस्या नहीं होगी और ज्यादा फ्रेश ग्लोइंग स्किन नजर आएगी।ब्लड का फ्लो ना केवल अच्छा होगा बल्कि चूंकि आर्टरीज क्लीन होंगी जिसकी वजह से ब्लड की क्वालिटी में भी सुधार होगा।
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प्रकृति ने हमें अनमोल औषधीय पौधों का खजाना दिया है, जिनमें भूमि आँवला (भूम्यामलकी) एक महत्वपूर्ण पौधा है। आयुर्वेद में इसे लीवर टॉनिक और पथरी नाशक माना गया है। इसका उपयोग लीवर रोग, किडनी स्टोन, पाचन विकार और मधुमेह जैसी समस्याओं में किया जाता है।
भूमि आँवला के पौधे की पहचान कैसे करें —भूमि आँवला एक छोटा हरा-भरा पौधा है जो जमीन के पास फैलकर बढ़ता है। इसके पत्ते आँवला के पत्तों जैसे होते हैं और इसकी डंठल के नीचे छोटे-छोटे हरे फल लगते हैं, जो दानों के समान दिखते हैं। यही फल इसके औषधीय गुणों का प्रमुख स्रोत हैं। यह भारत के अधिकांश हिस्सों में, विशेष रूप से बरसात के मौसम में खेतों, बागानों और रास्तों के किनारे स्वाभाविक रूप से उग आता है।✅️ भूमि आँवला के 7 चमत्कारिक औषधीय फायदे —1️⃣ किडनी स्टोन में लाभकारी :-भूमि आँवला का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह गुर्दे की पथरी को गलाने और मूत्रमार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है। यह पेशाब की रुकावट, जलन और मूत्र संबंधी संक्रमणों को भी दूर करता है।2️⃣ लीवर को बनाए मजबूत :-यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और हेपेटाइटिस, फैटी लिवर व जॉन्डिस जैसी बीमारियों में अत्यंत लाभकारी है। यह लीवर को विषैले पदार्थों से मुक्त करके शरीर को डिटॉक्स करता है।3️⃣ पाचन तंत्र को सुधारने में :-भूमि आँवला गैस, अपच, पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी है। इसका नियमित सेवन पाचन शक्ति को मजबूत करता है और भोजन का सही अवशोषण सुनिश्चित करता है।4️⃣ शरीर की गर्मी और त्वचा की समस्या में राहत दे :-यह शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है, जिससे त्वचा पर निकलने वाले दाने, खुजली या एलर्जी जैसी समस्याएँ कम होती हैं।5️⃣ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में :-इस पौधे में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखते हैं और इंसुलिन के स्तर को संतुलित करते हैं।6️⃣ खून को साफ करने में :-यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है।7️⃣ संक्रमण से बचाव :-भूमि आँवला में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।✅️ भूमि आँवला का काढ़ा बनाने का तरीका जाने —■ ताज़े पौधे से :-5–6 टहनियाँ (पत्ते और फल सहित) लें। उन्हें साफ पानी से धो लें, फिर 1 कप पानी उबालें और उसमें टहनियाँ डालें। लगभग 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। इसे छानकर गुनगुना पीएँ। स्वाद के लिए थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं।■ सूखे पत्तों या पाउडर से :-1 कप पानी में 1 चम्मच सूखा भूमि आँवला पाउडर डालें, 5 मिनट तक उबालें। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है।✅️ भूमि आँवला के पत्तियों और फलों का उपयोग —1) रोज सुबह 4–5 ताज़ी पत्तियाँ चबाना लीवर और पाचन के लिए बहुत लाभदायक है।2) छोटे हरे फलों का रस या पेस्ट बनाकर पीने से पेशाब की जलन, पथरी और मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है।3) एक चम्मच सूखा पाउडर गुनगुने पानी के साथ रोज लेना शरीर को डिटॉक्स करता है और लीवर को मजबूत बनाता है।⚠️ सावधानियाँ —■ लगातार 15–20 दिन सेवन के बाद 5–7 दिन का ब्रेक लेना चाहिए।■ अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में ठंडक अधिक बढ़ सकती है।■ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।भूमि आँवला का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह सचमुच प्रकृति की एक अनमोल देन है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के अनेक गंभीर बीमारियों से बचाव करने में सहायक है। - सर्दियों में हड्डियों में अकड़न के साथ दर्द व सूजन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्दियों में जोड़ों के दर्द से भी लोग खूब परेशान रहते हैं। ऐसे में पुराने लोग इन तमाम समस्याओं से बचने के लिए रोजाना लहसुन की 1 कली खाने का सुझाव देते थे। कुछ लोग तो पूरी सर्दी लहसुन खाते हैं ये मानते हुए कि ये इम्यूनिटी बूस्टर है। इसके अलावा लहसुन में मिलने वाले कई कंपाउंड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं। जानते हैं कि 7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है?7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाना कितना सही?अगर आप लहसुन उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो कि सम तासीर वाले हैं। जिन लोगों का शरीर ठंडा रहता है जिन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या रहती है उनके लिए लहसुन का सेवन फायदेमंद है। ध्यान देने वाली बात ये है कि लहसुन एसिडिक है और पित्त शरीर वाले लोगों के लिए इसे हर दिन खाना नुकसानदेह हो सकता है, सिर्फ सम तासीर हो वहीं इसे खाएं। इसके अलावा शरीर के वायु पर असर आएगा और पाचक पित्त एसिडिक हो जाएगी। आम भाषा में इसे ऐसे समझे कि अगर आप एसिडिक पीएच वाले व्यक्ति हैं तो खाली पेट लहसुन का सेवनइरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) का कारण बन सकता है। इससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। खाली पेट लहसुन का सेवन बॉवेल मूवमेंट को प्रभावित करने के साथ पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। इससे पेट में दर्द के साथ कई सारी समस्याएं हो सकती हैं इसलिए सिर्फ सम प्रकृति वाले लोग ही खाली पेट लहसुन का सेवन करें।7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है-खाली पेट लहसुन का सेवन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। पहले तो ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है क्योंकि इसमें एलिसिन जैसे शक्तिशाली यौगिक होते हैं। दरअसल, कच्चे लहसुन में मौजूद एलिसिन में शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन खाना शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार है। लहसुन में सल्फर यौगिक होते हैं जो लिवर को शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद करते हैं। ये पाचक एंजाइमों को उत्तेजित करता है और स्वस्थ आंत बैक्टीरिया यानी प्रीबायोटिक प्रभाव को बढ़ावा देता है। इस प्रकार से ये गट हेल्थ के लिए फायदेमंद है।बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगाररोज सुबह खाली पेट लहसुन खाना दिल को हेल्दी रखने में मददगार है। ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। यह भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है और ग्लूकोज के स्तर को स्थिर कर सकता है। येबैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देने में मददगार है। अधिक मात्रा में सेवन करने या संवेदनशील व्यक्तियों में इससे सीने में जलन, मतली, दस्त या पेट में खुजली जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिए संयम बरतना और अपने शरीर की जरूरतों को समझना जरूरी है।जोड़ों के दर्द के लिए लहसुन का उपयोग कैसे करें?जोड़ों में दर्द के लिए आप लहसुन का उपयोग दो प्रकार से कर सकते हैं। पहले तो आप रोज सुबह खाली पेट 1 लहसुन की कली खा सकते हैं और दूसरा आप लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर इससे हड्डियों की मालिश कर सकते हैं।पुरुषों को लहसुन खाने से क्या फायदा होता है?पुरुषों को लहसुन खाने से कई प्रकार के फायदे हो सकते हैं। पहते तो ये टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाता है जिससे पुरुषों की स्टेमिना बढ़ती है और पुरुष की फर्टिलिटी भी बढ़ती है।बालों के लिए लहसुन का तेल कैसे बनाएं?बालों के लिए लहसुन का तेल आप कई प्रकार से तैयार कर सकते हैं लेकिन सर्दियों में सरसों तेल में पकाकर लहसुन का तेल बनाएं और इसे अपने बालों में लगाएं। ये बालों की ग्रोथ बढ़ाने के झड़ते बालों की समस्या को रोकने में मददगार है।
- आज भी बड़ी संख्या में लोग महंगे स्किन व हेयर केयर प्रोडक्ट्स की तुलना में देसी व नेचुरल नुस्खों पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। मेथी भी ऐसे ही देसी नुस्खों में से एक है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके सभी फायदों के बारे में जानकारी नहीं है। मेथी का उपयोग न सिर्फ डायबिटीज व कब्ज जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है, बल्कि बालों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने के लिए भी यह काफी फायदेमंद हो सकती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मेथी के पानी से बाल धोने से आपको क्या फायदे मिल सकते हैं।बालों के लिए मेथी का पानीमेथी के पानी का इस्तेमाल आमतौर पर लोग डायबिटीज कंट्रोल रखने के लिए और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए करते हैं, लेकिन वास्तव में मेथी के पानी में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो बालों को एक नहीं बल्कि कई फायदे पहुंचाते हैं और सर्दियों में होने वाली कई समस्याओं को दूर करने में मदद करती हैं। इसलिए अगर आपको अपने बालों से जुड़ी कुछ समस्याएं हैं, तो हो सकता है मेथी के पानी की मदद से आपको काफी फायदेमंद हो सकता है।क्या फायदे मिलेंगेमेथी के पानी में अपने बालों को धोना इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि इसके पानी में एक लसदार पदार्थ होता है जो बालों को एक नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है। साथ ही मेथी में मौजूद खास तरह का प्रोटीन बालों को पोषण प्रदान करता है, जिसकी मदद से हेयर फॉल रोकने में मदद मिलती है और बाल जड़ से मजबूत होते हैं। मेथी में खास तरह के इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण भी पाए जाते हैं, जो डैंड्रफ व सिर में खुजली जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी मदद कर सकते हैं।कैसे करना होगा इस्तेमालअपने बालों के लिए मेथी के पानी का भरपूर फायदा उठाने के लिए आपको उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना भी बहुत जरूरी है और इसलिए आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करेंगे। रात को एक मग पानी में दो मुट्ठी मेथी भिगो कर रख दें। सुबह मेथी को छान कर पानी अलग कर लें। अब इस पानी की मदद से अपनी बालों को अच्छे से भिगो लें और सुनिश्चित करें कि आपके बाल जड़ से लेकर सिरे तक अच्छे से इस पानी में भीग चुके हैं। कम से कम 20 मिनट तक अपने बालों को गीला रखें, जो सर्दियों में आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है और इसके लिए आप बालों को अच्छे से भिगोकर तौलिया बांध सकते हैं। 20 मिनट बाद साफ पानी से बालों को अच्छे से धो लें और शैंपू न करें। अगर आपको शैंपू करना है, तो अगले दिन आपको शैंपू करना चाहिए।किन बातों का रखें ध्यानवैसे तो मेथी का पानी आपके बालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाएगा लेकिन इसके साथ-साथ आपको कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा। अगर आपको लंबे समय से हेयर फॉल हो रहा है या हेयर ग्रोथ रुकी हुई है। ऐसे में हो सकता है कि आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई अंदरूनी बीमारी हो जिसके कारण बालों से जुड़ी ये समस्याएं हो रही हों। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है। साथ ही कुछ लोगों कि स्किन ज्यादा एलर्जिक या सेंसिटिव होती है और हो सकता है कि उन्हें मेथी का पानी भी सूट ना करे। इसलिए पहले आपको एलर्जी टेस्ट करना चाहिए जिसके लिए आप थोड़ी सी जगह पर मेथी का पानी लगाकर उसे ट्राई कर सकते हैं। हालांकि, मेथी से एलर्जी बहुत ही कम मामलों में देखी जाती है, लेकिन फिर भी आपको एक बार इस बारे में डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
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अक्सर लोग न सिर्फ बालों के झड़ने बल्कि आइब्रो के झड़ने की समस्या से भी परेशान रहते हैं। जिसके कारण कई बार लोगों के आंखों के ऊपर हिस्से में गंजापन दिखने लगता है। ऐसे में आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए अक्सर लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ने के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है। कैस्टर ऑयल में अच्छी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।
भौहों में अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने के फायदेभौहों में अरंडी के तेल का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। अरंडी के तेल में भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट्स और विटामिन-ई जैसे पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से भौहों से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।बालों की ग्रोथ को बढ़ाएअरंडी के तेल में विटामिन-ई और हेल्दी फैट्स के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो के बालों की ग्रोथ को नेचुरल रूप से बढ़ावा देने और इनके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।बालों को मॉइस्चराइज करेअरंडी के तेल यानी कैस्टर ऑयल में भरपूर मात्रा में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो के बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने, इनको घना बनाने और मॉइस्चराइज करने में मदद मिलती है। इससे आइब्रो के बाल शाइनी रहते हैं।गहराई से पोषण देकैस्टर ऑयल में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका आइब्रो पर इस्तेमाल या इससे मसाज करने से इन बालों को गहराई से पोषण देने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, जिससे बालों की ग्रोथ और स्वास्थ्य अच्छा होता है।भौहों के लिए अरंडी के तेल का उपयोग कैसे करें?इसके लिए सबसे पहले भौहों यानी आइब्रो को अच्छे से साफ करें। इसके बाद रूई की मदद से कैस्टर ऑयल को आइब्रो पर लगाएं और फिर हल्के हाथ से मसाज करें। इससे भौहों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, कैस्टर ऑयल के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।निष्कर्षअरंडी के तेल का इस्तेमाल भौहों पर लगाने से आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ावा देने, इनके बालों को नेचुरल रूप से मॉइस्चराइज करने, शाइनी बनाने और गहराई से पोषण देने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें और इससे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा, बालों से जुड़ी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - आंवला एक सुपरफूड है, जिसे खाकर भारत या दुनिया का कोई भी शख्स शरीर को हेल्दी बना सकता है। यह विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स का बहुत बढ़िया सोर्स है। यह आपकी स्किन और बाल को हेल्दी बनाता है। लेकिन इसके इतने सारे फायदे होने के बावजूद लोग इसे बहुत कम खाते हैं।आंवला खाने के 12 तरीके हैं। इन्हें बनाना बेहद आसान है और बहुत कम चीजों की जरूरत होती है। इन टेस्टी तरीकों से आप आंवला को अपनी रेगुलर और डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं। जिससे इसे खाने से मिलने वाला कोई फायदा छूटेगा नहीं। यह आपकी पूरे शरीर की इम्यूनिटी के लिए बहुत अच्छा होता है, जो इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।आंवला कैंडी----आंवला को उबालकर बीज निकाल लें।इसे चीनी या गुड़ की चाशनी में टॉस करें।फिर थोड़ा सा पाउडर मिलाएं।इसके बाद 1-2 दिन के लिए धूप में सुखा दें।आंवला आचार---आंवला को उबालकर इसके बीज निकाल ले।अब इसे सरसों के तेल में सॉटे करें।इसके ऊपर हल्दी, मिर्च, नमक और मेथी डालें।इसे एक कांच के जार में ठंडा करके स्टोर कर लें।आंवला राइस----सबसे पहले चावलों को पकाकर एक तरफ रख लें।अब सरसों के बीज, करी पत्ता और हरी मिर्च को सॉटे कर लें।इसके ऊपर कद्दूकस करके आंवला, हल्दी पाउडर और नमक मिलाएं।अब इसे पके हुए चावल में मिक्स करें।ऊपर से थोड़ा घी और रोस्टेड मूंगफली डालकर खाएं।आंवला मुरब्बा----आंवला को तबतक उबालें, जबतक वो मुलायम ना हो जाए।अब गुड़ की चाशनी बनाएं।इमें आंवला और इलायची मिक्स करें।इन्हें थोड़ा ग्लॉसी होने तक पकाएं।आंवला की चटनी---बीज निकला आंवला, धनिया और हरी मिर्च को ब्लेंड करें।इसमें जीरा, नमक और नींबू का रस मिलाएं।यह स्नैक और खाने के साथ अच्छी रहती है।आंवला इम्यूनिटी शॉट--कटा आंवला, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को ब्लेंड करें।इसमें गुनगुना पानी मिलाएं।रोज 30 ml पीएं।
- आयुर्वेद के अनुसार, गोंद की तासीर गर्म होती है, जिसे सर्दियों में खाने से आपके शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद मिलती है, हड्डियां मजबूत होती हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। इसलिए, सर्दियों में गोंद का सेवन आप कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।1. गोंद का लड्डूसर्दियों में गोंद का लड्डू कई लोगों को खाना काफी पसंद होता है। यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। गोंद का लड्डू आटे, ड्राई फ्रूट्स, गुड़ और अन्य चीजों को मिलाकर तैयार किया जा सकता है। सर्दियों में इस लड्डू का सेवन आपके शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता है और कड़ाके की ठंड से बचाने के साथ शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। रोज सुबह एक लड्डू दूध के साथ खाने से जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है।2. गोंद की राबराजस्थान और गुजरात में गोंद की राब को एक हेल्दी ड्रिंक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जिन्हें गोंद का लड्डू पसंद नहीं होता है या उसे खाना भारी लगता है। इसे घी, गुड़ और पानी में गोंद को भूनकर मिलाकर तैयार किया जाता है। सर्दियों में इस ड्रिंक को पीने से सर्दी-जुकाम से राहत मिलती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे आपको ठंड कम लगती है।3. दूध के साथ भुना हुआ गोंदआप दूध के साथ भी गोंद को भूनकर खा सकते हैं। अगर आपके पास समय की कमी है तो गोंद का सेवन करने का ये सबसे बेहतर और प्रभावी तरीका है। गोंद को घी में अच्छी तरह भूनकर एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर रात को सोने से पहले पी सकते हैं। आप चाहे तो इसमें शहद या मिश्री भी मिला सकते हैं। गोंद का दूध रातभर आपके शरीर को गर्म रखने में मदद करता है और अनिद्रा की समस्या को दूर कर गहरी नींद लेने में मदद मिलती है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने का एक बेहतरीन तरीका है।4. गोंद की पंजीरीपंजीरी एक सूखा मिश्रण है, जिसे स्टोर करना भी काफी आसान होता है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गोंद की पंजीरी मखाने, गोंद और ड्राई फ्रूट्स, आटा और चीनी का बूरा या गुड़ का पाउडर मिलाकर खा सकते हैं। पंजीरी में सोंठ और काली मिर्च मिलाने से ये सर्दियों में आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जो शरीर की गर्माहट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे यह छाती में जमा कफ और ठंड के कारण होने वाली समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।5. गोंद और मेवों का हलवागोंद का सेवन आप हलवे के रूप में भी कर सकते है। सूजी या आटे के हलवे में गोंद और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा मिलाकर खाना भी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। गोंद के हलवे का सेवन करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत बनती है। खासकर ये बुजुर्ग और बच्चों के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत गर्मी देने में मदद करता है।निष्कर्षसर्दियों में गोंद का सेवन आप कई तरीकों से कर सकते हैं, जो आपके शरीर को सर्दी के मौसम में भी गर्म रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि गोंद बहुत बारी और गर्म होता है इसलिए एक दिन में 15 ग्राम से ज्यादा गोंद का सेवन न करें। गोंद का सेवन करने के साथ दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि गोंद को पचाने में मदद मिल सके।
- हरी मिर्च खाने का स्वाद तो बढ़ाता ही है, साथ ही स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है। अक्सर लोग कहते हैं कि हरी मिर्च खाने से एसिडिटी हो सकती है, लेकिन अगर हरी मिर्च सही मात्रा और सही तरीके से खाई जाए, तो यह स्किन के साथ-साथ पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद होती है। हरी मिर्च डाइजेशन, इम्युनिटी और स्किन हेल्थ से जुड़ी हुई है।। इसके अलावा, हरी मिर्च खाने से स्किन को भी कई फायदे होते हैं।”विटामिन C से स्किन में नेचुरल चमकहरी मिर्च विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है। विटामिन C स्किन में कोलेजन प्रोडक्शन को सपोर्ट करता है, स्किन को फर्म और हेल्दी बनाए रखता है और स्किन की चमक बनाए रखता है। जो लोग रेगुलर और सीमित मात्रा में हरी मिर्च खाते हैं, उनकी स्किन को अंदर से न्यूट्रशिन मिलता है और इसी वजह से नेचुरल ग्लो दिखाई देता है।पिंपल्स और मुहांसों से छुटकाराहरी मिर्च में कैप्साइसिन मिलता है, जो न सिर्फ तीखापन देता है, बल्कि इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। ये मुहांसे वाले बैक्टीरिया को कंट्रोल करता है, स्किन की सूजन कम होती है और बार-बार पिंपल्स निकलने की समस्या घट सकती है।बेहतर मेटाबॉलिज्म से स्किन का क्लीयर होनाअच्छी स्किन के लिए महंगे प्रोडेक्ट्स लगाना ही काफी नहीं होता, बल्कि मेटाबॉलिज्म अच्छा होना जरूरी है। हरी मिर्च खाने से मेटाबॉल्जिम बूस्ट होता है, डाइजेशन बेहतर होता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे स्किन साफ होती है और पिंपल्स से छुटकारा मिलता है।एंटीऑक्सीडेंट्स एजिंग कम करने में मदद मिलनाहरी मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं, जो स्किन एजिंग का बड़ा कारण होते हैं। हरी मिर्च खाने वाले लोगों की फाइन लाइन्स और झुर्रियां धीमी होती है, स्किन लंबे समय तक यंग दिखती है और पॉल्यूशन से स्किन को जो नुकसान होता है, उससे भी बचाव होता है।हरी मिर्च कितनी खानी चाहिए?हरी मिर्च खाना फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाना नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को एसिडिटी, अल्सर या बहुत सेंसिटिव स्किन की समस्या होती है, उन्हें ज्यादा हरी मिर्च खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, कच्ची, बहुत ज्यादा तीखी मिर्च रोज खाना सही नहीं है। इसलिए खाने में थोड़ी मात्रा में हरी मिर्च लेनी चाहिए। खाना पकाते समय हरी मिर्च डालनी चाहिए।”“दुनियाभर में हरी मिर्च का इस्तेमाल स्लाइवा और डाइजेशन एंजाइम्स को एक्टिव करती है और फूड-बर्न इन्फेक्शन के रिस्क को कम करती है। इसके अलावा, कई देशों में हरी मिर्च को खाने को सेफ करने में मदद करती है, बैक्टीरिया और फंगस की ग्रोथ को रोकती है। ठंडे देशों में पहले हरी मिर्च का इस्तेमाल सीमित था, लेकिन माइग्रेशन और ग्लोबलाइजेशन के कारण हरी मिर्च पॉपलर हो गई है।”
- सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोग कूल्हों में जकड़न और जोड़ों में दर्द की शिकायत करने लगते हैं। यह समस्या गर्मियों से ज्यादा सर्दियों के मौसम में अधिक परेशान करती है। एक्सपर्ट की मानें तो इस समस्या के पीछे ज्यादातर शारीरिक कारण छिपे हुए होते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक डॉक्टर प्रवीण टिट्टल कहते हैं कि ठंड में मांसपेशियां और टिशू सिकुड़ जाते हैं। जिसकी वजह से खासतौर पर हिप जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों में दर्द ज्यादा महसूस होने लगता है। आइए डॉक्टर प्रवीण से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर सर्दियों में क्यों जाम होने लगते हैं आपके कूल्हे और क्या है इस समस्या का उपचार।कूल्हे की जकड़न बढ़ने का बड़ा कारणसर्दियों में ठंड का असर मांसपेशियों, टेंडन और लिगामेंट्स पर पड़ने से कूल्हे की जकड़न बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कम तापमान रक्त संचार को धीमा करता है, जिससे ऊतक सिकुड़कर कठोर हो जाते हैं। जिससे जोड़ों में अकड़न, दर्द और गतिशीलता कम हो जाती है। खासकर गठिया या पुरानी चोट वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।हिप जॉइंट के आसपास की मांसपेशियों में जकड़न होने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, खासकर सुबह उठते समय या देर तक बैठे रहने के बाद, दर्द ज्यादा महसूस होता है।खून का संचार कम होने से लचीलापन घटता हैठंड के मौसम में शरीर सबसे पहले अपने कोर यानी बीच के हिस्से को गर्म रखने की कोशिश करता है। इसके कारण हाथ-पैर और कूल्हों की तरफ खून का बहाव थोड़ा कम हो जाता है।जब हिप एरिया में खून का संचार कम होता है, तो वहां ऑक्सीजन और पोषण भी कम पहुंचता है, जिससे जॉइंट्स की रिकवरी और लचीलापन प्रभावित होता है।कम फिजिकल एक्टिविटी से जकड़न बढ़ती हैसर्दियों में लोग आमतौर पर बाहर कम निकलते हैं, जिससे एक्सरसाइज भी कम हो जाती है। जब मूवमेंट कम होता है, तो जोड़ों में मौजूद सिनोवियल फ्लूइड (जो जोड़ों को चिकनाई देता है) भी ठीक से सर्कुलेट नहीं हो पाता। इससे हिप जॉइंट्स और ज्यादा सख़्त महसूस होने लगते हैं।सर्दियों में बढ़ जाती है पहले से मौजूद जोड़ों की समस्याजिन लोगों को पहले से अर्थराइटिस की समस्या है या कभी हिप में चोट लगी हुई हो, उनके लिए सर्दियां ज्यादा मुश्किल हो सकती हैं।बारोमेट्रिक प्रेशर में बदलावठंड के मौसम में बारोमेट्रिक प्रेशर में बदलाव होता है, जिससे जोड़ों की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है और दर्द व जकड़न ज्यादा महसूस होती है।गलत लाइफस्टाइल और बैठने की आदतें भी वजहसर्दियों में ज्यादा समय तक घर के अंदर बैठना आम बात है। लंबे समय तक बैठने से हिप फ्लेक्सर मसल्स छोटी और टाइट हो जाती हैं, खासकर अगर बैठने की पोजिशन सही न हो।इसका असर तब दिखता है जब आप खड़े होते हैं, चलते हैं या सीढ़ियां चढ़ते हैं। इसमें हिप मूवमेंट सीमित हो जाती है।सर्दियों में हिप की जकड़न कैसे कम करें?हिप जॉइंट्स को ठीक से काम करने के लिए एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए इन चीजों से हिप्स को लचीला बनाया रखा जा सकता है--रोजाना वॉक-दिन में हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करते रहें-योग-गुनगुने पानी में स्विमिंग-गर्म कपड़े पहनें-लंबे समय तक लगातार न बैठेंठंड में भी एक्टिव रहें, दर्द से बचेंसलाह----सर्दियों में हिप की जकड़न आम समस्या है, ऐसा इसलिए क्योंकि ठंड मांसपेशियों को सख्त बना देती है। जिससे एक्टिविटी कम हो जाती है। लेकिन अगर आप खुद को गर्म रखें और नियमित रूप से शरीर की मूवमेंट बनाए रखें, तो हिप्स के आसपास होने वाले दर्द से राहत पाई जा सकती है।
- सर्दियों में मूंगफली सबसे आम और पसंदीदा स्नैक बन जाती है। मूंगफली में प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। सर्दियों में जब शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है, तब मूंगफली एक आसान और स्वादिष्ट विकल्प बन जाती हैसर्दियों में मूंगफली क्यों खाई जाती है?सर्दियों में मूंगफली शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है। इसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो ठंड के मौसम में शरीर को एनर्जी और मजबूती देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में मूंगफली का सेवन ज्यादा किया जाता है।सर्दियों में मूंगफली खाने के क्या फायदे हैं? -मूंगफली में मौजूद हेल्दी फैट शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता है। इसमें प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। ठंड में मूंगफली खाने से थकान कम होती है और शरीर एक्टिव बना रहता है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है।-मूंगफली में मोनोअनसैचुरेटेड फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं।-नियमित और सीमित मात्रा में मूंगफली खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट मिलता है।-सर्दियों में जब लोग कम एक्टिव रहते हैं, तब मूंगफली दिल के लिए लाभकारी हो सकती है।-मूंगफली पौष्टिक होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने पर यह वजन बढ़ा सकती है।-डायबिटीज के मरीज भी मूंगफली खा सकते हैं, लेकिन नमक या चीनी लगी मूंगफली से बचना जरूरी है और मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।भुनी हुई मूंगफली खाने के क्या नुकसान हैं? -कुछ लोगों के लिए सर्दियों में मूंगफली नुकसानदायक भी हो सकती है। जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या पाचन की समस्या रहती है, उन्हें ज्यादा मूंगफली खाने से पेट में भारीपनऔर गैस की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा मूंगफली तासीर में गर्म होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में खाने से मुंह में छाले, गले में खराश या स्किन पर फोड़े-फुंसी की समस्या भी हो सकती है। जिन लोगों को नट्स से एलर्जी होती है, उन्हें मूंगफली से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। एलर्जी की स्थिति में खुजली, सूजन या सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है।इसके अलावा जिन लोगों को एक्ने या स्किन इंफ्लेमेशन की समस्या रहती है, उन्हें सर्दियों में भी मूंगफली सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए।निष्कर्षसर्दियों में मूंगफली एक सस्ता, स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक है, जो सही मात्रा में खाने पर सेहत के लिए कई फायदे देता है। यह शरीर को गर्म रखती है, एनर्जी देती है और दिल की सेहत को सपोर्ट करती है लेकिन ज्यादा मात्रा, गलत समय या गलत तरीके से खाने पर यही मूंगफली वजन बढ़ाने, गैस और स्किन समस्याओं का कारण भी बन सकती है। मूंगफली को संतुलित मात्रा में और अपनी सेहत को ध्यान में रखकर ही डाइट में शामिल करें।
- इन 7 टेस्टी डिशेज से सेहत और स्वाद दोनों मिलेगासर्दियों में काफी सारी हरी सब्जियां बाजार में आती हैं। बथुआ भी इन्हीं में से एक है। बथुआ काफी पौष्टिक होता है, इसमें विटामिन ए, बी, सी, आयरन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। साथ ही ये फाइबर रिच होता है और पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण, लंबे समय तक पेट को भरा हुआ रखता है। कुल मिलाकर आप वेटलॉस करना चाहते हों या ओवरऑल हेल्दी रहना आपका गोल है, बथुआ आपको अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ मजेदार डिशेज के बारे में, जो आप बथुआ से बना सकते हैं।बथुआ वाली दाल बनाकर खाएंबथुआ को अपनी डाइट में शामिल करने का ये बेहतरीन तरीका है। इससे दाल का स्वाद भी बढ़ जाएगा और वो ज्यादा पौष्टिक भी हो जाएगी। नॉर्मली आप प्याज, लहसुन और मसालों का जो तड़का बनाती हैं, वो बना लें। फिर कटा हुआ बथुआ उसमें एड करें, कुछ देर पकाने से बाद उबली हुई दाल डालें और पका लें।बथुआ रायता: स्वाद से भरपूरसर्दियों में बथुआ का रायता खाने के मजा अलग है। इसके लिए बथुआ के पत्तों को उबाल लें और फिर ब्लेंड कर लें। इसे दही में अच्छे से मिक्स करें, फिर ऊपर से हींग, जीरा, सूखी लाल मिर्च का तड़का लगा दें। चाहे तो थोड़ा सा चाट मसाला भी मिला सकती हैं।बथुआ के कुरकुरे पकौड़ेसर्दियों की शाम को चाय के साथ कुछ चटपटा खाना है, तो क्रिस्पी पकौड़े बना लें। इसके लिए बथुआ के पत्तों को काट लें, उनमें बेसन मिलाएं, साथ ही हरी मिर्च, कटी हुई प्याज और नमक मिलाएं। अब हल्का पानी डालकर बैटर तैयार करें और गर्म तेल में तल लें। बहुत ही क्रिस्पी और टेस्टी पकौड़ी बनती है।बथुआ पूड़ीबथुए की पूड़ियां काफी टेस्टी लगती हैं और बच्चों को लंच में देने के लिए परफेक्ट हैं। इन्हें बनाने के लिए बथुआ के पत्तों को उबालकर, पीस लें। अब आटे में नमक, अजवाइन, मिर्च के साथ बथुआ का पेस्ट मिलाएं और इसकी मदद से आटा गूंथ लें। जरूरत पड़ने पर हल्का सा पानी भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इस आटे से पूड़ी बना लें, बहुत ही टेस्टी बनती हैं।बथुआ आलू की सब्जीबथुआ आलू की सब्जी हेल्दी होने के साथ काफी टेस्टी भी है। बनाने के लिए एक पैन में तेल गर्म करें, जीरा, हरी मिर्च और लहसुन-प्याज भून लें। साथ में बेसिक मसाले मिलाएं। अब आलू डालें और जब ये आधा पक जाए तो कटा हुआ बथुआ मिलाएं। ढक कर 8-10 मिनट पका लें, सब्जी तैयार है।बथुआ आलू के भरवां पराठेबथुआ आलू के पराठे बच्चों के लिए परफेक्ट हैं। इन्हें बनाने के लिए बथुआ काट कर उबाल लें, साथ में आलू भी उबलने रख दें। अब बथुआ का पानी हाथों से निचोड़ दें, फिर इसे आलू के साथ मिलाएं। साथ में हींग, हरी मिर्च, नमक, लाल मिर्च, अमचूर पाउडर एड करें। अब इस फिलिंग को भर कर टेस्टी सा पराठा बना लें।बथुआ की कढ़ीबथुआ की कढ़ी बहुत टेस्ट बनती है। इसके लिए तेल में मेथी दाना, हींग चटका लें, फिर बथुआ के पत्ते एड करें। अब छाछ और बेसन का घोल एड करें, फिर हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और जो भी बाकी मसाले आप कढ़ी बनाते हुए डालती हैं, वो मिला दें। कढ़ी उबलने दें, ये बहुत ही टेस्टी बनती है।--
- अधिकतर भारतीय रसोई में घी का इस्तेमाल खाने में किसी न किसी रूप में जरूर किया जाता है। घी न सिर्फ हमारी रसोई, बल्कि संस्कृति और आयुर्वेद में भी काफी महत्व रखता है। घी का इस्तेमाल न सिर्फ खाने के लिए किया जाता है, बल्कि ये स्किन की देखबाल और स्वास्थ्य रहने के लिए भी कई तरीको से किया जाता है। खासकर रात को सोने से पहले चेहरे पर घी लगाना आपके स्किन के लिए काफी फायदेमंद होता है। स्किन को नेचुरल तरीके से मॉइश्चराइज करने और हेल्दी रखने का ये एक नेचुरल तरीका है। तो आइए जानते हैं कि सोने से पहले चेहरे पर घी लगाने के क्या फायदे हैं?रात को चेहरे पर घी लगाने के फायदेरात को सोने से पहले चेहरे पर घी लगाना फायदेमंद हो सकता है। खासकर अगर आपकी स्किन ड्राई और रूखी है तो घी लगाने से आपको हेल्दी और मुलायम त्वचा मिल सकती है। इसके अलावा आपको रात को सोने से पहले चेहरे पर घी लगाने से ये फायदे भी मिल सकते हैं-1. स्किन को मॉइश्चराइज करेंघी में मौजूद फैटी एसिड के गुण आपकी स्किन को गहराई से मॉइश्चराइज करते हैं, जिससे ड्राई और फटी स्किन से राहत मिल सकती है। रात में चेहरे पर घी लगाकर सोने से आपकी स्किन अच्छे से हाइड्रेट होती है, जो सुबह मुलायम लगती है।2. नेचुरल चमक बढ़ाएंघी का उपयोग स्किन पर करने से चेहरे का निखार बढ़ता है। इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरा चमकने लगता है। घी में मौजूद विटामिन ए, डी, ई और के स्किन को पोषण देकर उसका निखार बढ़ाने में मदद करते हैं।3. एंटी-एजिंग गुणघी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी स्किन पर समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षणों को धीमा करने में मदद करते हैं। घी का उपयोग आपके चेहरे पर झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करते हैं और स्किन को जवां बनाए रखते हैं।4. डार्क सर्कल्स में राहतअगर आपके आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स हैं तो भी घी का इस्तेमाल रात को सोने से पहले करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। रात को सोने से पहले हल्के हाथों से आंखों के नीचे घी लगाने से सूजन और काले घेरों को कम करने में मदद मिल सकती है।5. सनबर्न और जलन से राहततेज धूप के कारण चेहरे की स्किन पर हुए सनबर्न और जलन से राहत पाने के लिए भी आप रात को सोने से पहले घी का उपयोग कर सकते हैं। घी आपकी स्किन को ठंडक देकर हीलिंग प्रोसेस को बढ़ाती है।रात में चेहरे पर घी कैसे लगाएं? --सोने से पहले चेहरे पर घी लगाने के लिए आप इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं--सबसे पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें-इसके बाद थोड़ी मात्रा में बिना मिलावट वाला घी लें।-अब अपनी उंगलियों की मदद से घी को चेहरे पर बिंदु-बिंदु करके लगाएं।-फिर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 5 से 10 मिनट तक अपने चेहरे की मालिश करें।-घी से चेहरे की मसाज करने से आपके स्किन पर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।-मालिश करने के बाद अपने चेहरे को रातभर के लिए छोड़ दें।-सुबह उठकर अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।निष्कर्षरात को सोने से पहले चेहरे पर घी लगाने से आपकी स्किन नेचुरल तरीके से हेल्दी, सुंदर और चमकदार बनती है। लेकिन, ध्यान रहे आप हमेशा शुद्ध और बिना मिलावट वाले घी का ही इस्तेमाल करें और अगर आपकी स्किन ऑयली है तो घी का उपयोग करने से बचें।
- सर्दियों के कारण रूखी और बेजान त्वचा से परेशान? आपने भी अलग-अलग स्किन प्रोडक्ट्स के साथ अपनी कैबिनेट को भरना शुरू कर ही दिया होगा, लेकिन देसी नुस्खे अपनाने के बारे में सोचा है? सर्दियों की ठंडा और सूखी हवा का आपकी स्किन पर यह असर होना नेचुरल है और इसके लिए आपको नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करने से ही ज्यादा फायदा मिल सकता है। चुकंदर एक ऐसी ही नेचुरल चीज है, जो सर्दियों में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। इसमें प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो स्किन को अंदर से हेल्दी बनाते हैं। तो चलिए आज हम आपको चुकंदर का फेस मास्क बनाना सिखाते हैं और बताते हैं इसके लाभों के बारे में।ऐसे बनाएं चुकंदर फेस पैकआप एक छोटे चुकंदर को उबालकर या कच्चा ही कद्दूकस कर उसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच कच्चा दूध या चाहें तो मलाई मिला लें। फिर इस मिश्रण को अच्छे से मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 15–20 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लें। हफ्ते में 1–2 बार इस फेस पैक का इस्तेमाल करें। आप इसे दिन में सुबह उठने के ठीक बाद या फिर रात को सोने से पहले भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप इसे दिन में इस्तेमाल, करते हैं तो धूप में बैठ कर न करें।नहीं होगी स्किन ड्राईशायद ही आप जानते हो कि चुकंदर में प्राकृतिक नमी बनाए रखने वाले तत्व होते हैं। ऐसे में शहद और दूध के साथ मिलकर यह फेस पैक त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करने में मदद करता है। इससे सर्दियों में होने वाला रूखापन, पपड़ी की समस्या और खिंचाव जैसी परेशानी कम हो जाती है और त्वचा सॉफ्ट दिखने लगती है। सर्दियों के मौसम में जिन लोगों को ज्यादा ड्राई स्किन की समस्या रहती है, उनके लिए यह एक काफी अच्छा विकल्प हो सकता है।दिखने लगता है नेचुरल ग्लोआयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चुकंदर ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बना सकता है, जिससे चेहरे पर नेचुरल पिंक ग्लो आने लगता है। ऐसे में इस फेस पैक का इस्तेमाल नियमित रूप से करने से त्वचा फ्रेश, हेल्दी और चमकदार दिखने लगती है। सर्दियों में ज्यादातर लोग अपने नेचुरल निखार के गायब होने से परेशान हो जाते हैं और इससे निपटने के लिए इस फेस पैक का इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।दाग-धब्बों होंगे दूरचुकंदर का फेस पैक पिगमेंटेशन और हल्के दाग-धब्बों को कम करने में भी सहायक करता है। साथ ही त्वचा की रंगत को निखारने में मदद करता है। ऐसे में आप इसके इस्तेमाल से एक निखरी और बिना दाग-धब्बे वाले त्वचा पा सकती हैं। नियमित रूप से और सही तरीके से इसे इस्तेमाल करने पर चेहरे के जिद्दी दाग-धब्बों को भी धीरे-धीरे करके कम किया जा सकता है।एजिंग के लक्षण दिखेंगे कमचुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फाइन लाइंस और डलनेस को कम करने का काम करते हैं, जिससे त्वचा यंग और फ्रेश नजर आने लगती है। बढ़ती उम्र की महिलाओं के लिए यह फेशपैक मुख्य रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। अगर आप भी लंबे समय तक जवान दिखना चाहते हैं और अपनी स्किन को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
- शरीर के सभी अंग ठीक तरीके से काम करते रहें, शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ठीक तरीके से पहुंचता रहे इसके लिए शुद्ध खून का संचार होते रहना जरूरी है। बढ़ते प्रदूषण और खान-पान की अशुद्धि के कारण खून में गंदगी या विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, इससे खून अशुद्ध हो जाता है। इसका असर सीधे हमारी त्वचा, पाचन, इम्युनिटी और पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है।मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि तला-भुना, जंक फूड, ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड खाने से भी खून में टॉक्सिन्स बढ़ने लगते हैं। पर्याप्त पानी न पीना भी एक बड़ा कारण है, जिससे शरीर से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती। धूम्रपान, शराब का सेवन, दवाओं का अधिक उपयोग भी खून को अशुद्ध बनाती है।अगर आपका खून भी अशुद्ध है तो ये कई बीमारियों का घर हो सकता है। तो फिर इसे साफ कैसे किया जाए? आइए इस बारे में जानते हैं।खून साफ न होने से बढ़ सकती हैं दिक्कतेंखून अशुद्ध होने पर सबसे पहले असर त्वचा पर दिखाई देता है। मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली, रैशेज और त्वचा का बेजान दिखना खून साफ न होने का आम लक्षण हैं। इसके अलावा बार-बार थकान, सिरदर्द, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होती है। लंबे समय तक खून की अशुद्धि रहने पर लिवर और किडनी पर दबाव बढ़ता है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इन सभी समस्याओं से बचे रहने और खून को साफ करने के लिए आपके आसपास ही कारगर चीजें मौजूद हैं, जिनसे आप लाभ पा सकते हैं।नीम के सेवन से साफ होता है खूननीम को आयुर्वेद में खून साफ करने वाली सबसे प्रभावी औषधियों में से एक माना गया है। नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट गुण खून से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब हम नीम का सेवन करते हैं, तो यह शरीर में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को नष्ट करता है, जिससे खून शुद्ध होता है।नीम के और भी कई लाभनीम की पत्तियां केवल खून साफ करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं। नीम की पत्तियां त्वचा से बैक्टीरिया को खत्म करती हैं, जिससे मुंहासे, दाग-धब्बे और खुजली में राहत मिलती है।इतना ही नहीं नीम पेट में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करता है, जिससे गैस, अपच और पेट के संक्रमण की समस्या कम होती है। यह आंतों को साफ रखने में भी मदद करता है। इसके साथ नीम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जिससे सर्दी-खांसी, संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।इन उपायों से भी कर सकते हैं ब्लड प्यूरिफिकेशनखून को साफ रखने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। रोज 2-3 लीटर पानी शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है। हरी सब्जियां, फल, खासकर चुकंदर, अनार, आंवला, पालक और गाजर खून को शुद्ध करने में सहायक माने जाते हैं। हल्दी और तुलसी जैसे प्राकृतिक तत्वों में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो खून की सफाई में मदद करते हैं।
- सर्दियों के मौसम में शरीर को ज्यादा पोषण की आवश्यता होती है। ठंड में ऊर्जा, गर्माहट और मज़बूती के लिए खसखस (पोस्ता) का सेवन लाभदायक हो सकता है। आमतौर पर सर्दियों में भारतीय किचन गाजर का हलवा या मूंग दाल हलवा तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन खसखस का हलवा स्वाद और सेहत, दोनों में उनसे कहीं आगे है। आयुर्वेद में खसखस को तासीर में गर्म, नसों को मजबूत करने वाला और दिमाग को शांत रखने वाला माना गया है। इसमें मौजूद कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स सर्दियों में शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं। खास बात यह कि खसखस का हलवा सिर्फ मीठा व्यंजन नहीं, बल्कि ऊर्जा और संतुलन देने वाला देसी टॉनिक है। एक बार सही तरीके से बना लिया तो इसका नर्म स्वाद और खुशबू आपको गाजर या मूंग के हलवे को भूलने पर मजबूर कर देगी।सर्दियों में खसखस खाने के फायदेशरीर को अंदर से गर्म रखता है।कमजोरी और थकान में फायदेमंद है।हड्डियों के लिए कैल्शियम का अच्छा स्रोत है।नींद और मानसिक शांति में मदद करता है।स्किन और बालों को पोषण देता है।खसखस का हलवा बनाने के लिए सामग्रीखसखस आधा कपदूध- 2 कपदेसी घी- 3 टेबलस्पूनचीनी या गुड़- स्वादानुसारइलायची पाउडर- आधा चम्मचड्राई फ्रूट्स इच्छानुसारखसखस हलवे की विधिस्टेप 1- खसखस को 4-5 घंटे भिगोकर बारीक पीस लें।स्टेप 2- कढ़ाही में घी गरम करें, पिसा खसखस डालकर धीमी आंच पर भूनें।स्टेप 3- खुशबू आने लगे तो दूध डालें और लगातार चलाएं।स्टेप 4- मिश्रण गाढ़ा होने पर चीनी या गुड़ और इलायची मिलाएं।स्टेप 5- ड्राई फ्रूट्स डालकर 2-3 मिनट पकाएं।
- सर्दियों का मौसम आते ही ठंड के साथ-साथ शरीर की कई अंदरूनी समस्याएं भी धीरे-धीरे सिर उठाने लगती हैं। सुबह उठते ही हाथ-पैरों में जकड़न, सुस्ती, नसों में खिंचाव, बार-बार ठंड लगना और ब्लड सर्कुलेशन का धीमा पड़ जाना आम शिकायत बन जाती है। आयुर्वेद कहता है कि अगर सही जड़ी-बूटियों को सही अनुपात में लिया जाए, तो एक साधारण सी हर्बल चाय भी दवा का काम कर सकती है।आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों का मौसम मुख्य रूप से वात दोष को बढ़ाने वाला होता है। वात बढ़ने से शरीर में रूखापन, ठंडक, नसों की कमजोरी और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में ऐसी चाय का सेवन करना चाहिए जो शरीर को ऊष्णता दे, अग्नि को मजबूत करे और नसों को पोषण पहुंचाए। आयुर्वेदिक हर्बल टी न सिर्फ ठंड से बचाती है बल्कि लंबे समय तक सेवन करने पर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के जोखिम को भी कम कर सकती है।आयुर्वेदिक चाय बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए?सर्दियों में ब्राह्मी, तुलसी, अश्वगंधा, जटामांसी, सौंफ, दालचीनी, तेज पत्ता, गुलाब के फूल और मुलेठी को मिलाकर एक विशेष चाय बनाई जा सकती है।इन सभी जड़ी-बूटियों का संयोजन शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। नियमित रूप से इस चाय का सेवन करने से नसों को मजबूती मिलती है और पैरालिसिस जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव में भी मदद मिल सकती है।आयुर्वेदिक चाय कैसे बनती है?इस चाय को बनाने के लिए सभी जड़ी-बूटियों को सुखाकर हल्का कूट लें। एक कप पानी में आधा चम्मच यह मिश्रण डालकर 5-7 मिनट तक उबालें। बाद में छानकर गुनगुना पिएं। चाहें तो स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं, लेकिन चाय हल्की ठंडी होने पर ही शहद डालें।आयुर्वेदिक हर्बल टी को रोजाना सीमित मात्रा में पिया जा सकता है। यह शरीर को गर्म रखने, पाचन सुधारने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है, लेकिन किसी भी जड़ी-बूटी का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए।क्या आयुर्वेदिक चाय से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है?कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां रक्त संचार को सक्रिय यानी एक्टिव करने में मदद करती हैं। दालचीनी, तेज पत्ता और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियां नसों तक रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती हैं।-सामान्य तौर पर वयस्क इसे सुरक्षित रूप से पी सकते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए मात्रा और जड़ी-बूटियों का चयन आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर होता है।हर्बल टी पीने का सही समय क्या है?आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट या शाम के समय हर्बल टी पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है। रात में बहुत देर से इसका सेवन करने से बचना चाहिए।
- आजकल बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम में स्किन और बालों की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। बढ़ते AQI में खासतौर पर रूखी त्वचा, पिग्मेंटेशन, बार-बार पिंपल्स, बालों का झड़ना, डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होते बाल आम हो गया है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए लोग अक्सर महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स खरीदना शुरू कर देते हैं या सैलून जाकर इलाज ढ़ूंढते हैं। हालांकि कुछ समय के लिए तो राहत मिल जाती है, लेकिन ये स्थायी इलाज नहीं है।स्किन और बालों को चमकदार बनाने के 5 उपायआयुर्वेद में त्वचा को रस धातु और रक्त धातु से जोड़ा गया है, जबकि बालों का संबंध अस्थि धातु से माना जाता है। जब शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं, पाचन कमजोर होता है या वात-पित्त-कफ असंतुलित होते हैं, तो सबसे पहले असर स्किन और बालों पर दिखता है। इसलिए आयुर्वेदिक ब्यूटी रूटीन सिर्फ बाहरी देखभाल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर को भीतर से बैलेंस करने पर भी जोर देता है।”चावल का पानीचावल के पानी की चर्चा आजकल कोरियन स्किन केयर से लेकर आयुर्वेद सभी जगह पर होती है। दरअसल, चावल के पानी में अमिनो एसिड, विटामिन B और मिनरल्स होते हैं, जो त्वचा की रंगत निखारने और बालों को मजबूत करने में मदद करते हैं। विटामिन B स्किन टोन सुधारने में मदद करता है और बालों को स्मूद करता है। इसे इस्तेमाल करने का तरीका बहुत आसान है। चावल को धोने के बाद पानी को छानकर चेहरे पर टोनर की तरह लगाएं। इसे बाल धोने के बाद आखीरी रिंस के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह स्किन को टाइट करता है और बालों में नेचुरल शाइन आती है।पंचपुष्प भापप्रदूषण और धूल-मिट्टी के कारण मुंह को सिर्फ धोना ही काफी नहीं है। स्किन के रोमछिद्रों में गंदगी जमा हो जाती है, जिससे पिंपल्स और ब्लैकहेड्स बढ़ते हैं। इसलिए पंचपुष्प भाप लेना बेहतरीन उपाय है। पंचपुष्प में गुलाब, चमेली, चंपा, कमल और मोगरा के फूलों को लेकर पानी में डालकर भाप लेने से रोमछिद्र खुलते हैं, टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, स्किन में नेचुरल ग्लो आता है, पिंपल्स और ब्लैकहेड्स कम होते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि भाप को 5 से 7 मिनट से ज्यादा न लें और हफ्ते में सिर्फ एक बार ही करें। ज्यादा भाप लेने से स्किन ड्राई हो सकती है।देसी घी-दूध से नहाना -अगर स्किन बहुत ज्यादा ड्राई है, तो घी-दूध से नहाना बहुत ही कारगर उपाय है। आयुर्वेद में देसी घी वात दोष को शांत करता है और दूध स्किन को गहराई से पोषण देता है। दूध-घी से स्नान करने से पहले थोड़े दूध में कुछ बूंदें शुद्ध देसी घी मिलाएं और इसे पूरे शरीर पर लगाएं। 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से स्नान करें। इससे स्किन मुलायम बनी रहती है और लंब समय तक स्किन में नमी बनी रहती है।केसर जल छींटाकेसर को आयुर्वेद में वर्ण्य कहा गया है यानि कि जो रंगत निखारे। केसर का इस्तेमाल करने से स्किन में ग्लो, नेचुरल ब्राइटनिंग आती है और साथ ही स्किन टोन धीरे-धीरे सुधरता है। केसर का इस्तेमाल करने के लिए रात में 2-3 केसर के धागे पानी में भिगो दें। सुबह उठकर उसी पानी से चेहरे पर छींटे मारें। लगातार कुछ हफ्तों में फर्क साफ नजर आने लगता है।नीम-तुलसी हेयर पैकजिस तरह पॉल्यूशन बढ़ रहा है, उसे देखते हुए डैंड्रफ और बालों का झड़ना आज सबसे आम समस्या बन चुकी है। नीम और तुलसी दोनों ही आयुर्वेद में रक्तशोधक और एंटी-फंगल माने जाते हैं। नीम और तुलसी का पैक बालों पर लगाने से डैंड्रफ कम होता है, स्कैल्प साफ रहता है और बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। इसे बनाने के लिए नीम और तुलसी के पत्तों का पेस्ट बना लें। फिर इसे बालों की जड़ों में लगा लें और 20 से 30 मिनट बाद हल्के शैंपू से धो लें।स्किन और बालों के लिए आयुर्वेदिक टिप्सघरेलू उपाय करने के साथ-साथ लोगों को अपने शरीर, मन और आहार का संतुलन रखना भी जरूरी है।-रोजाना नींद पूरी लें।-सात्त्विक और हल्का भोजन करें।-ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।-सर्दियों में गुनगुना पानी पिएं।-स्ट्रेस कम लें।निष्कर्षआयुर्वेदिक तरीकों से स्किन और बाल तो सेहतमंद बनते ही है, साथ ही इन तरीकों को अपनाने से कोई साइड इफैक्ट नहीं होता। इसलिए लोगों को केमिकल्स से दूरी बनाकर ऐसे ही नेचुरल तरीके अपनाने चाहिए ताकि इनका असर लंबे समय तक रहे।
- आज के समय में बहुत से लोग जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों के कमजोर होने की समस्याओं से परेशान रहते हैं। ऐसे में इससे राहत के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है। कैस्टर ऑयल में अच्छी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं, जो मांसपेशियों के लिए कई तरीकों से फायदेमंद है। अरंडी यानी कैस्टर ऑयल की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से मांसपेशियों को रिलैक्स करने और इससे जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।मांसपेशियों के लिए अरंडी के तेल के फायदेमांसपेशियों की ऐंठन कम करेकैस्टर ऑयल की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से ये जोड़ों के दर्द या वातजन्य दर्द को कम करने और मांसपेशियों की ऐंठन या जकड़न को कम करने में मदद मिलती है।मांसपेशियों को एनर्जी देकैस्टर ऑयल से जोड़ों की मालिश करने से थकी हुई मांसपेशियों को एनर्जी देने में मदद मिलती है, जिससे चलने-फिरने, सीढ़िया-चढ़ने या अन्य कामों को करने में होने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।जोड़ों की चिकनाई बढ़ाएकैस्टर ऑयल से मालिश करने से जोड़ों में चिकनाई को बनाए रखने, जोड़ों के दर्द को कम करने और मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद मिलती है, जो स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद है।मांसपेशियों को रिलैक्स करेकैस्टर ऑयल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से मांसपेशियों को रिलैक्स करने और सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इससे कार्यों को बेहतर करने और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।मांसपेशियों के दर्द को कम करेकैस्टर ऑयल में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से मांसपेशियों के दर्द को कम करने, रिलैक्स करने और सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इससे घुटने, कमर और गर्दन के दर्द को कम करने और इनकी सूजन को कम करने में मदद मिलती है।मांसपेशियों के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल कैसे करें?मांसपेशियों को रिलैक्स करने और दर्द को कम करने के लिए कैस्टर ऑयल को मालिश करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मांसपेशियों की कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।निष्कर्षअरंडी यानी कैस्टर ऑयल से जोड़ों की मालिश करने से मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने, इनको रिलैक्स करने, मांसपेशियों को एनर्जी देने, जोड़ों की चिकनाई को बेहतर करने, सूजन को कम करने और मांसपेशियों के दर्द कम करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। किसी भी तरह की परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा, जोड़ों से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें, हल्की एक्सरसाइज करें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें।
- सर्दियों के दिनों में होंठों का फटना एक बहुत आम समस्या हो जाती है। विशेषकर, जो लोग बाइक से ट्रैवल करते हैं, चलती गाड़ी में हवा लगने की वजह से उनके होंठ फटने लगते हैं। अगर समय रहते होंठों की केयर न की जाए, तो होंठों से खून भी आना शुरू हो जाता है। ऐसे में कई लोग होंठों पर तरह-तरह के प्रोडक्ट्स यूज करते हैं या लिप बाम लगाते हैं। क्या आप जानते हैं कि होंठों को फटने से रोकने के लिए आप घी का इस्तेमाल कर सकते हैं? इससे होंठ सॉफ्ट हो जाते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सर्दियों में फटे होंठों पर घी लगाने के क्या-क्या फायदे मिलते हैं।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स की मानें, तो होंठों पर घी लगाना बहुत अच्छा होता है। इसमें फैटी एसिड, विटामिन A और E होता है, जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है। यह स्किन को लंबे समय तक सॉफ्ट बनाए रखने में मदद करता है। NCBI की एक रिपोर्ट भी बताती है कि घी फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है।बेहतर रिकवरी: एक्सपर्ट्स बताते हैं कि होंठ फटने पर न केवल दर्द का एहसास होता है, बल्कि कभी-कभी ब्लीडिंग भी होने लगती है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। नियमित रूप से घी लगाने से रिकवरी तेजी से होती है। असल में, घी में एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं, जो घाव को भरने में मदद करते हैं।नेचुरल बैरियर: सर्दियों में हमारी स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचता है। घी में ऐसे तत्व होते हैं जो इस लेयर को प्रोटेक्ट करते हैं, जिससे होंठों का नेचुरल मॉइस्चर लॉक होता है और सर्द हवाओं से बचाव होता है।फटे होंठों पर घी लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे लिप्स एक्सफोलिएट होते हैं और डेड सेल्स रिमूव हो जाते हैं, जिससे होंठ ज्यादा सॉफ्ट बनते हैं। साथ ही, होंठों का नेचुरल ग्लो भी बढ़ता है।पिग्मेंटेशन में कमी: नियमित रूप से घी लगाने से होंठों के डार्क स्पॉट्स कम होते हैं और पिग्मेंटेशन में कमी आती है। घी में मौजूद विटामिन E स्किन टोन में सुधार करता है और डार्कनेस को दूर कर होंठों के रंग को बेहतर बनाता है।होंठों पर घी लगाने के क्या फायदे हैं?-होंठों पर घी लगाने से वे सॉफ्ट, हाइड्रेटेड और गुलाबी होते हैं। घी एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है जो फटे होंठों को ठीक करने और डेड सेल्स को हटाने में मदद करता है।-घी में विटामिन A, E और फैटी एसिड होते हैं, जो फटे होंठों को गहराई से रिपेयर करते हैं और उन्हें मॉइस्चराइज रखते हैं।-फटे होंठों पर घी, नारियल तेल, शहद या एलोवेरा जेल जैसी नेचुरल चीजें लगानी चाहिए। ये होंठों की नमी बरकरार रखते हैं और उन्हें सॉफ्ट बनाते हैं।
- डायबिटीज को कंट्रोल करने में सिर्फ क्या खाते हैं? ही नहीं, बल्कि कब खाते हैं? वाला सवाल भी खुद से पूछना चाहिए क्योंकि यह भी उतना ही जरूरी है। खाने का सही समय इंसुलिन सेंसिटिविटी, हार्मोनल बैलेंस और मेटाबॉलिक हेल्थ को प्रभावित करता है, जो ब्लड शुगर को संतुलित रखने के लिए बेहद अहम हैं। भारत में, जहां लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं, यह समझना लाखों लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है कि डायबिटीज में समय पर खाने की आदत एक बड़ी भूमिका क्यों निभाती है? इस लेख में समझेंगे कि आखिर शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए मील टाइमिंग क्यों जरूरी है?समय पर खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है-हमारे शरीर में सर्केडियन रिदम नाम की एक इंटरनल क्लॉक होती है, जो ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है। तय समय पर खाना खाने से ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने या गिरने की समस्या से बचाव होता है। इसके उलट, कभी देर रात खाना, कभी नाश्ता छोड़ देना, ये आदतें इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, 10 से 12 घंटे की तय ईटिंग विंडो में खाना खाने से टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में शुगर कंट्रोल 20 से 30% तक बेहतर हो सकता है।सुबह 8 बजे नाश्ता, 1 बजे लंच और 7 बजे डिनर करेंअगर नाश्ते की बात करें, तो डायबिटिक मरीजों के लिए नाश्ता दिन का अहम मील है। अगर नाश्ता स्किप करेंगे, तो कोर्टिसोल और ग्लूकागोन हार्मोन (Glucagon Hormone) बढ़ने की वजह से होता है। वहीं, हर तीन से चार घंटे में संतुलित भोजन करने से दवाओं का असर बेहतर होता है, एनर्जी बनी रहती है और ज्यादा भूख लगने से होने वाली ओवरईटिंग की समस्या कम होता है। जैसे सुबह आठ बजे ओट्स के साथ नट्स, दोपहर एक बजे लंच करना और शाम करीब सात बजे डिनर, यह बॉडी के नेचुरल इंसुलिन रिदम को फॉलो करता है।सोने से तीन घंटे पहले आखिरी मील लेंदिन के उजाले में खाना खाने से कई मरीजों का एचबीए1सी (HbA1c) लेवल काफी हद तक कम हुआ है। रात में देर से खाने से मेलाटोनिन कम होता है, जिससे नींद और ग्लूकोज एब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया दोनों प्रभावित होते हैं। कोशिश करें कि सोने से कम से कम तीन घंटे पहले आखिरी मील हो। इससे ओवरनाइट फास्टिंग होती है, फैट बर्न बढ़ता है और सुबह होने वाला शुगर स्पाइक कम होती है।निष्कर्ष:लंबे समय में, मील टाइमिंग डायबिटीज कंट्रोल का एक मजबूत हथियार है। इसे पोर्शन कंट्रोल, एक्सरसाइज और शुगर मॉनिटरिंग के साथ जोड़ें। यह आसान और असरदार तरीका है। इसे आज से ही शुरू करें और खाने का सही समय अपनाकर अपनी सेहत को बेहतर बनाएं।
- मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने और हमें स्वस्थ रखने के लिए शरीर का प्राकृतिक कवच है। हालांकि जब हम इम्यूनिटी की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान सिर्फ विटामिन C पर जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मजबूत इन्यूनिटी के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत जरूरी है।मगर विटामिन C के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख पोषक तत्वों को डाइट में शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद होती है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जहां प्रत्येक पोषक तत्व अपनी विशिष्ट भूमिका निभाता है। विटामिन C जहां संक्रमण से लड़ने वाली व्हाइट ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ाता है, वहीं जिंक T-सेल्स को सक्रिय करता है, और विटामिन D प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।इसलिए अगर आप सचमुच अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना चाहते हैं, तो एक संतुलित आहार अपनाना जरूरी है जो इन सभी आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति करता हो, ताकि शरीर को रोगों से लड़ने के लिए एक संपूर्ण पोषण कवच मिल सके।विटामिन C और Eविटामिन C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो आपकी व्हाइट ब्लड सेल्स को ठीक से काम करने में मदद करता है। इसके लिए संतरा, नींबू, शिमला मिर्च, और कीवी का सेवन करें। इसके साथ ही, विटामिन E भी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाली क्षति से बचाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को अच्छे से काम करने में मदद करता है। विटामिन E के लिए बादाम, सूरजमुखी के बीज और एवोकाडो का सेवन कर सकते हैं।जिंक: प्रतिरक्षा कोशिकाओं की कार्यक्षमताजिंक एक आवश्यक ट्रेस मिनरल है जो प्रतिरक्षा प्रणाली की लगभग हर अवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह T-कोशिकाओं और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विकसित करने और उन्हें सक्रिय करने में मदद करता है। जिंक की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अपनी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए कद्दू के बीज, काजू, छोले और दालों को आहार में शामिल करें।विटामिन D के कई स्वास्थ्य लाभविटामिन D केवल हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि इम्यूनिटी के लिए भी बेहद महत्त्वपूर्ण है। यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। शोध बताते हैं कि विटामिन D की कमी से श्वास संबंधी संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। विटामिन डी के लिए आप रोज एक घंटे धूप में रहें, इसके साथ आप वसायुक्त मछली, फिश लिवर ऑयल, और फोर्टिफाइड दूध जैसे आहारों का सेवन कर सकते हैं।अन्य महत्त्वपूर्ण पोषक तत्वमजबूत इम्यूनिटी के लिए प्रोटीन आवश्यक है, क्योंकि यह एंटीबॉडी और अन्य इम्यूनिटी से जुड़ी चीजों के लिए आधार प्रदान करता है। इसके लिए अंडे, पनीर, और लीन मीट लें। इसके अलावा आंत के स्वास्थ्य के लिए प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ) और फाइबर भी जरूरी हैं, क्योंकि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा आंतों में ही स्थित होता है।
- सर्दियों के सीजन में आने वाला अमरूद किसी सुपरफूड से कम नहीं है। इसमें संतरे से चार गुना ज्यादा विटामिन सी मौजूद होता है। साथ ही लाइकोपीन और फ्लेवनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो आपकी इम्यूनिटी, हार्ट हेल्थ, स्किन हेल्थ और गट हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। वैसे तो अमरूद को कच्चा खाना भी बेनिफिशियल होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं आयुर्वेद में भुना हुआ अमरूद खाने के और भी ज्यादा फायदे बताए गए हैं। हल्का सा रोस्ट करने के बाद अमरूद किसी दवा की तरह काम करता है और हीलिंग सुपरफूड बन जाता है। डॉ रविन्द्र कौशिक ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए भुना हुआ अमरूद खाने के फायदे शेयर किए हैं, आइए जानते हैं।भूनने से कई गुना बढ़ जाते हैं अमरूद के गुणडॉ रविन्द्र बताते हैं कि जब आप अमरूद को भूनकर खाते हैं, तो इसके गुण और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं। ये एक तरह की दवा बन जाता है, जो आपके गट, मेटाबॉलिज्म, शुगर और गले के लिए बहुत फायदा करता है। हल्का भूनने से अमरूद के फाइबर सॉफ्ट हो जाते हैं, जिससे इसे पचाना भी आसान हो जाता है और आपका शरीर इसे बेहतर ढंग से एब्जॉर्ब कर पाता है।भुना अमरूद खाने से क्या-क्या फायदे होते हैं?डॉक्टर कहते हैं भुना हुआ अमरूद खाना एक पुरानी आयुर्वेदिक रेमेडी है। इसे खाने से डायरिया में तुरंत आराम मिलता है और गले का दर्द और खांसी भी दूर होती है। इतना ही नहीं ये ब्लड शुगर स्पाइक को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। अगर आपको एसिडिटी, गैस बनी रहती है तो ये इवनिंग के लिए परफेक्ट वॉर्म स्नैक का काम कर सकता है।दो तरह से भूनकर खा सकते हैंअमरूद को भूनने के लिए आप दो आयुर्वेदिक तरीके अपना सकते हैं। पहला तो इसे सीधा आंच पर भून लें, फिर इसे छिलकर खा लें। दूसरा आप इसे तवे पर 2-3 मिनट के लिए रोस्ट कर सकते हैं। इससे ये बहुत ही खुशबूदार और सॉफ्ट बनता है। अब अगर आपको पाचन में दिक्कत है, तो काले नमक के साथ इसे खाएं। गले से जुड़ी समस्या है, तो काली मिर्च बुरक लें, वहीं एसिडिटी है तो 2-3 बूंद देसी घी की डालकर इसका सेवन करें।ये लोग खाने से परहेज करेंडॉ रविन्द्र कौशिक आगे बताते हैं कि यूं तो ज्यादातर लोगों के लिए भुना हुआ अमरूद खाना बहुत फायदेमंद है, लेकिन कुछ लोगों को इसे खाने से परहेज करना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर आपको ज्यादा कब्ज की शिकायत है तो इसे अवॉइड करें। वहीं अगर आप ड्राई वात बॉडी टाइप वाले हैं या एनल फिशर (गुदा विदर) की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना खाना अवॉइड करें।

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