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- नयी दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पत्रिकाओं की ‘यूजीसी-केयर' सूची को बंद करने की घोषणा की है। यह ऐसा कदम है जिसका उद्देश्य अनुसंधान प्रकाशनों के मूल्यांकन को विकेंद्रीकृत करना है। आयोग संकाय सदस्यों और छात्रों द्वारा विशेषज्ञ समीक्षित पत्रिकाओं को चुनने के लिए मानक विकसित करने की योजना बना रहा है। अकादमिक अनुसंधान प्रकाशनों की गुणवत्ता विनियमित एवं सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी-केयर सूची 2018 में पेश की गई थी। हालांकि, समय के साथ सूची को महत्वपूर्ण आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, भारतीय भाषाओं में प्रकाशित पत्रिकाओं पर इसके प्रभाव और अकादमिक निर्णय लेने के व्यापक केंद्रीकरण के बारे में भी चिंताएं व्यक्त की गईं। यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने कहा, ‘‘यूजीसी-केयर सूची को बंद करना अकादमिक स्वतंत्रता को बहाल करने की दिशा में एक कदम है। शोधकर्ताओं को अब उन पत्रिकाओं में प्रकाशन की स्वतंत्रता होगी जो केंद्रीकृत सूची से बाधित हुए बिना उनके अनुरूप मेल खाती हैं। एचईआई (उच्च शिक्षा संस्थानों) को उच्च अनुसंधान मानक सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'' यह निर्णय एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर आयोग की हालिया बैठक के दौरान किया गया था। कुमार ने कहा, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुरूप, यूजीसी ने अब उच्च शिक्षा संस्थानों को विशेषज्ञ-समीक्षित पत्रिकाओं के मूल्यांकन के लिए अपने स्वयं के तंत्र विकसित करने की सलाह दी है। यह दृष्टिकोण वैश्विक शैक्षणिक मानकों के अनुरूप है और संस्थानों को विश्वसनीय अनुसंधान को पहचानने में अधिक लचीलापन प्रदान करता है।
- नयी दिल्ली. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास और इसरो ने अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए एक स्वदेशी ‘माइक्रोप्रोसेसर' विकसित किया है जिसका उपयोग बाहरी अंतरिक्ष में कमान और नियंत्रण प्रणाली तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा सकता है। संबंधित परियोजना को शक्ति नाम दिया गया है जिसका नेतृत्व आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि ने किया है। ‘शक्ति' को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा इसकी ‘डिजिटल इंडिया आरआईएससी-वी' पहल (डीआईआरवी) के तहत समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य माइक्रोप्रोसेसर आधारित उत्पादों के स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना है जो आरआईएससी-वी प्रौद्योगिकी अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए सर्वोत्तम श्रेणी की सुरक्षा और दृश्यता प्रदान करते हैं। कामकोटि ने कहा कि इसका उपयोग रणनीतिक जरूरतों के लिए आईओटी और ‘कंप्यूट सिस्टम' से लेकर विविध क्षेत्रों में किया जा सकता है तथा यह विकास इसरो द्वारा अपने अनुप्रयोगों, कमान और नियंत्रण प्रणालियों तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में ‘आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले सेमीकंडक्टर के स्वदेशीकरण का प्रयास है।
- गोरखपुर . श्रृंगेरी मठ (शारदा पीठ) के जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती सन्निधानम मंगलवार शाम को गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर आगमन पर शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका भव्य अभिनंदन किया गया। इसके पहले शंकराचार्य जी की विजय यात्रा का सहजनवा स्थित जनपद की सीमा से गोरखनाथ मंदिर तक पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती सन्निधानम की विजय यात्रा (11 से 13 फरवरी) मंगलवार को श्री अयोध्या धाम से प्रारंभ हुई और शाम करीब पांच बजे गोरखपुर जनपद की सीमा में प्रवेश किया। गोरखपुर में यात्रा के प्रवेश करते ही श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के 51 वेदपाठी छात्रों ने आचार्य डॉ. रंगनाथ के नेतृत्व में शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जगद्गुरु शंकराचार्य का अभिनंदन किया। इसके बाद सहजनवा में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शंकराचार्य का फूलमालाओं से भव्य स्वागत और अभूतपूर्व अभिनंदन किया। शंकराचार्य के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने उन पर फूल बरसाए तो कलाकारों ने भजन सरिता बहाई। गोरखनाथ मंदिर पहुंचते ही प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने जगद्गुरु शंकराचार्य का स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती सन्निधानम मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में पधारे जहां श्रीगोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने सपत्नीक शंकराचार्य जी की चरण पादुका का विधि विधान से पूजन किया और आरती उतारी।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के मिशन अमृत सरोवर पहल ने जल संकट के गंभीर मुद्दे को हल करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। जनवरी 2025 तक 68,000 से अधिक सरोवर पूरे हो चुके हैं, इससे विभिन्न क्षेत्रों में सतही और भूजल उपलब्धता में वृद्धि हुई है। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने दी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार मिशन अमृत सरोवर अप्रैल 2022 में शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर (तालाब) बनाना या उनका पुनरुद्धार करना है, जिनकी कुल संख्या पूरे देश में 50,000 है। इस पहल ने जल संकट के गंभीर मुद्दे को हल करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। जनवरी 2025 तक 68,000 से अधिक सरोवर पूरे हो चुके हैं, इससे विभिन्न क्षेत्रों में सतही और भूजल उपलब्धता में वृद्धि हुई है।इन सरोवरों ने न केवल तत्काल जल आवश्यकताओं को पूरा किया है, बल्कि स्थायी जल स्रोत भी स्थापित किए हैं, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता और सामुदायिक कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।वहीं, मिशन अमृत सरोवर के दूसरे चरण में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया जाएगा, इसमें सामुदायिक भागीदारी (जन भागीदारी) को मुख्य रखा जाएगा। इसका उद्देश्य जलवायु लचीलापन मजबूत करना, पारिस्थितिकी संतुलन को बढ़ावा देना और भावी पीढ़ियों को स्थायी लाभ पहुंचाना है।मिशन अमृत सरोवर के काम राज्यों और जिलों द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा), 15वें वित्त आयोग अनुदान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की उप-योजनाओं जैसे वाटरशेड विकास घटक, हर खेत को पानी, के अलावा राज्यों की अपनी योजनाओं के साथ मिलकर किए जा रहे हैं। इसके अलावा काम के लिए क्राउडफंडिंग और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे सार्वजनिक योगदान की भी अनुमति है। -
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने एयरो इंडिया 2025 के दौरान एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय एयर चीफ्स राउंडटेबल का आयोजन किया। मंगलवार को इस कार्यक्रम में 17 देशों के वायु सेना प्रमुखों और लगभग 40 अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भविष्य के संघर्षों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था राउंडटेबल सम्मेलनयह राउंडटेबल सम्मेलन वैश्विक सुरक्षा के बढ़ते संकटों और भविष्य के संघर्षों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था। चर्चा का मुख्य विषय ‘भविष्य के संघर्षों में मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) का प्रभाव’ था। इस दौरान इन नई तकनीकों के प्रभाव और उनकी भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्यइस आयोजन का उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा मामलों पर सहयोग और विचारों का आदान-प्रदान करना था, ताकि सभी देशों की वायु सेना इस तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में सामूहिक रूप से सुरक्षा के मुद्दों का समाधान ढूंढ सके। भारतीय वायुसेना ने इस राउंडटेबल के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की असली भावना को प्रदर्शित किया और यह दिखाया कि दुनिया भर के एयर चीफ्स एक साथ मिलकर भविष्य के खतरों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।इस संबंध में भारतीय वायुसेना ने शेयर किया पोस्टभारतीय वायुसेना ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “वर्तमान एयरो इंडिया 2025 के दौरान, भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 11 फरवरी 25 को अंतर्राष्ट्रीय वायु सेना प्रमुखों के गोलमेज सम्मेलन की मेजबानी की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के 17 वायु सेना प्रमुखों और 40 अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भविष्य के संघर्षों पर मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) के प्रभाव पर चर्चा की गई। इस सम्मेलन ने उभरते वैश्विक सुरक्षा मुद्दों को संबोधित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की सच्ची भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया। -
ठाणे . महाराष्ट्र के ठाणे में एक लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे के अंदर एक महिला यात्री के मोबाइल फोन में विस्फोट हो गया, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। नगर निगम के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ठाणे नगर निगम के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रमुख यासीन तड़वी ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया कि सोमवार रात आठ बजकर 12 मिनट पर कलवा स्टेशन पर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी)-कल्याण उपनगरीय ट्रेन में हुई इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘सीएसएमटी रेलवे नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार, घटना में कोई घायल नहीं हुआ। हालांकि, इससे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।'' उन्होंने कहा कि विस्फोट के कारण धुआं फैल गया और रेलवे कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आग बुझाने वाले यंत्रों का इस्तेमाल किया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि कम तीव्रता के धमाके की आवाज सुनी गई। धमाके से डिब्बे में धुआं भर गया, जिससे कई यात्री उतरने के लिए दरवाजे की ओर भागे। प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि रेलवे पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘जिस महिला के मोबाइल फोन में विस्फोट हुआ उसकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है। घटना की जांच की जा रही है। हो सकता है कि बैटरी में खराबी या कोई अन्य तकनीकी समस्या हो। यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करते समय सावधान रहना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि घटना के कारण रेल सेवाएं बाधित नहीं हुईं। -
नयी दिल्ली. भारतीय गायक अरिजीत सिंह व ब्रिटिश गायक एड शीरन का एक साथ स्कूटर पर घूमने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रशंसकों द्वारा इसे अब तक का "सबसे अच्छा" वीडियो बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस समय शीरन अपने मैथेमैटिक्स टूर (+-=÷x) के लिए भारत आए हुए हैं। सिंह को शीरन के साथ वाहन पर सवार होकर बिना सुरक्षाकर्मी के घूमते हुए देखा गया। हालांकि वीडियो की तारीख और स्थान की जानकारी की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार गायक जोड़ी को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में सिंह के गृहनगर जियागंज की सड़कों पर स्कूटर चलाते हुए देखा गया है। पिछले साल, शीरन लंदन में सिंह के संगीत कार्यक्रम में मंच पर शामिल हुए थे। वहाँ दोनों ने लोकप्रिय गीत "परफेक्ट" पर जमकर नृत्य किया था। "शेप ऑफ यू", "गैलवे गर्ल" और "थिंकिंग आउट लाउड" जैसे गानों के लिए भी मशहूर शीरन ने 30 जनवरी को पुणे से भारत में अपना दौरा शुरू किया था। वह 15 फरवरी को दिल्ली-एनसीआर में अपना टूर समाप्त करेंगे।
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महाकुंभ नगर. ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को देश में गो हत्या पर प्रतिबंध लगाने और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने पर निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार को 33 दिनों का समय दिया। यहां शंकराचार्य शिविर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा, “शास्त्रों में उल्लेख है कि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है। हम पिछले डेढ़ साल से गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। अब हमने निर्णय किया है कि माघी पूर्णिमा के अगले दिन (बृहस्पतिवार) से हम 33 दिनों की यात्रा निकालेंगे।” उन्होंने कहा, “यह 33 दिन की यात्रा 17 मार्च को दिल्ली जाकर पूर्ण होगी। केंद्र सरकार के पास निर्णय करने के लिए 33 दिनों का समय है। यदि वह इन 33 दिनों में कोई निर्णय नहीं करती तो हम 17 मार्च को शाम पांच बजे के बाद कोई कड़ा निर्णय करेंगे।” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “हमारी सरकार से मांग है कि गाय को पशु की श्रेणी से हटाकर राष्ट्र माता घोषित किया जाए और गोहत्या को अपराध माना जाए। प्रदेश सरकार स्कूलों के पाठ्यक्रम में गाय को शामिल करने जा रही है। लेकिन वहां भी अगर गाय को पशु बताया जाता है तो इसका क्या लाभ।”
- -, AI एक्शन शिखर सम्मेलन में जेडी वेंस ने पीएम के विचार का किया समर्थनपेरिस । पीएम मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एआई एक्शन शिखर सम्मेलन के अवसर पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। उससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को पीएम मोदी के इस विचार की सराहना की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी भी इंसानों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह लोगों को अधिक उत्पादक बनाएगा और उन्हें अधिक स्वतंत्रता प्रदान करेगा।पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा पेरिस में एआई एक्शन समिट को संबोधित करने के बाद बोलते हुए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि “मैं पीएम मोदी की बात की सराहना करता हूं। मेरा वास्तव में मानना है कि एआई लोगों को सुविधा प्रदान करेगा और उन्हें अधिक उत्पादक बनाएगा। यह इंसानों की जगह नहीं लेगा, यह कभी भी इंसानों की जगह नहीं लेगा।”वेंस ने कहा, “मुझे लगता है कि एआई उद्योग में बहुत से नेता, जब वे श्रमिकों की जगह लेने के डर के बारे में बात करते हैं, तो वे वास्तव में इस बिंदु को भूल जाते हैं। एआई हमें अधिक उत्पादक, समृद्ध और स्वतंत्र बनाने जा रहा है।” उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन “एआई के लिए एक श्रमिक-समर्थक विकास पथ बनाए रखेगा ताकि यह अमेरिका में रोजगार सृजन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सके।”बता दें कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि एआई राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समाज को नया रूप दे रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “एआई इस सदी में मानवता के लिए कोड लिख रहा है। लेकिन, यह मानव इतिहास में प्रौद्योगिकी के अन्य मील के पत्थरों से बहुत अलग है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सुधार करके लाखों लोगों के जीवन को बदलने में मदद कर सकता है। “नौकरियों का नुकसान एआई का सबसे भयावह व्यवधान है। लेकिन, इतिहास ने दिखाया है कि प्रौद्योगिकी के कारण काम गायब नहीं होता है। इसकी प्रकृति बदल जाती है और नए प्रकार की नौकरियां पैदा होती हैं। हमें एआई-संचालित भविष्य के लिए अपने लोगों को कौशल और पुनः कौशल प्रदान करने में निवेश करने की आवश्यकता है।”वहीं अपने भाषण में, वेंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्यधिक विनियमन के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि एआई का अत्यधिक विनियमन एक परिवर्तनकारी उद्योग को खत्म कर सकता है, जैसे ही यह आगे बढ़ रहा है। हम एआई समर्थक विकास नीतियों को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और मैं देखना चाहूंगा कि इस सम्मेलन में नियामकीय पहलू बड़ी बातचीत में अपना रास्ता बना रहा है।”हालांकि, वेंस ने चेतावनी दी कि एआई को वैचारिक पूर्वाग्रह से मुक्त होना चाहिए। “हमें बहुत दृढ़ता से लगता है कि एआई को वैचारिक पूर्वाग्रह से मुक्त रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिकी एआई को सत्तावादी सेंसरशिप के लिए एक उपकरण के रूप में सह-चुना नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी एआई अन्य विदेशी देशों के साथ साझेदारी करे। उन्होंने कहा, “यह प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी एआई तकनीक दुनिया भर में स्वर्ण मानक बनी रहे और हम अन्य विदेशी देशों और निश्चित रूप से व्यवसायों के लिए पसंदीदा भागीदार हैं क्योंकि वे एआई के अपने स्वयं के उपयोग का विस्तार करते हैं।”
- नयी दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि परमाणु ऊर्जा सभी ऊर्जा चर्चाओं का हिस्सा होगी, क्योंकि इसका व्यावसायीकरण अभी तक नहीं हुआ है। मुख्य रूप से भारतीय संदर्भ में, हालांकि देश ने अमेरिका के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। यह संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सप्ताह के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे और ऊर्जा सहित कई विषयों पर चर्चा करेंगे। इससे पहले, भारत ऊर्जा सप्ताह-2025 पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पुरी ने सोमवार को कहा था, ‘‘ मुझे आश्चर्य होगा यदि अमेरिका से ऊर्जा प्राप्त करने का मुद्दा (प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच) चर्चा में शामिल न हो।'' पुरी ने कहा कि राष्ट्रपति (ट्रंप) ने कहा है कि वह वैश्विक ऊर्जा कीमतों में कमी लाना चाहते हैं, इसलिए चाहते हैं कि बाजार में अधिक से अधिक ऊर्जा आए। भारत जैसे देशों के लिए यह एक सकारात्मक बात है। आईईडब्ल्यू 2025 में मंत्रिस्तरीय चर्चा के दौरान पुरी ने कहा, ‘‘ परमाणु (ऊर्जा) एक कुशल लागत प्रभावी माध्यम प्रदान करती है, लेकिन आपको एक विशेष मार्ग अपनाना होगा और मुझे यकीन है कि जहां भी इस तरह की चर्चाएं होंगी, यह प्रमुख रूप से चर्चा का विषय होगा। मैं ऐसा होते हुए देख रहा हूं।'' परमाणु ऊर्जा के वाणिज्यिक विस्तार के बारे में मंत्री ने कहा, ‘‘ हमने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हमारे पास भारत-विशिष्ट आईएईए सुरक्षा समझौता था लेकिन किसी कारण से वाणिज्यिक अनुबंध कभी नहीं हो सका... लेकिन अब हम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर के बारे में बात कर रहे हैं।'' इस महीने की शुरुआत में अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20,000 करोड़ रुपये के परमाणु मिशन की घोषणा की थी जिसका लक्ष्य 2047 तक कम से कम 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित करना है।
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महाकुंभ नगर। महाकुंभ में गंगा-यमुना को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए ‘ट्रैश स्कीमर' मशीनें लगाई गयी हैं, जो हर दिन गंगा-यमुना से 10 से 15 टन कचरा निकाल रही हैं। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार महाकुंभ में गंगा-यमुना को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार प्रतिबद्ध है। आने वाले श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर अपने साथ भक्ति के साथ स्वच्छता का भाव भी ले जाएं, इसके लिए प्रयागराज नगर निगम मुख्यमंत्री की दिशादृष्टि को साकार करने में लगा हुआ है। बयान के मुताबिक निगम न केवल श्रमिकों के माध्यम से, बल्कि आधुनिक तरीके से भी गंगा-यमुना के संगम को स्वच्छ बनाने का काम हो रहा है। इसके लिए बकायदा ‘ट्रैश स्कीमर' मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें हर दिन गंगा-यमुना से 10 से 15 टन कचरा निकाल रही हैं। बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वच्छता की परिकल्पना को साकार रूप देने के लिए राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके चलते विश्व के सबसे बड़े आयोजन महाकुम्भ की तैयारी करीब चार साल पहले ही शुरू कर दी गई थी। बयान के मुताबिक संगम में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को साफ और स्वच्छ जल मिले, इसके लिए एक ‘ट्रैश स्कीमर' मशीन लगाई गई। तब यह मशीन 50-60 क्विंटल कचरा हर दिन निकालती थी। उसकी कार्य प्रणाली को देखते हुए करीब दो साल पहले एक और मशीन को प्रयागराज नगर निगम ने खरीदा। इसके बाद नदियों की सफाई की रफ्तार दोगुनी हो गई। ‘ट्रैश स्कीमर' की मदद से पानी की सतह पर तैर रहे कचरे को इकट्ठा किया जाता है।
‘ट्रश स्कीमर' मशीन का इस्तेमाल नदियों, बंदरगाहों, और समुद्रों में कचरा साफ करने के लिए होता है। यह मशीन प्लास्टिक, बोतलें, धार्मिक कचरा, कपड़े, धातु की वस्तुएं, पूजा अपशिष्ट, मृत पशु और पक्षी आदि को एकत्र करती है। नगर निगम के एक अधिकारी के मुताबिक मशीन से एकत्र किए गए कचरे को नैनी के पास ही एक जगह डाल दिया जाता है। वहां से इस कचरे को रोजाना गाड़ियों से बसवार स्थित शोधन संयंत्र में ले जाया जाता है। वहा इस कचरे से नारियल, प्लास्टिक और अन्य सामग्री को अलग किया जाता है। प्लास्टिक को रिसाइकिल के लिए भेजा जाता है, जबकि अन्य सामग्री का खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। - महाकुंभ नगर। प्रयागराज महाकुंभ में माघी पूर्णिमा के स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन ने विशेष यातायात व्ययवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत, 11 फरवरी 2025 को सुबह चार बजे से संपूर्ण मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन' घोषित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के निजी और सार्वजनिक वाहनों को 11 फरवरी को सुबह चार बजे के बाद संबंधित रूट की पार्किंग में पार्क कराया जाएगा ताकि शहर में यातायात अव्यवस्था नहीं हो और श्रद्धालु पैदल सुगमता से स्नान घाटों तक पहुंच सकें। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने 11 फरवरी की शाम पांच बजे से पूरे प्रयागराज शहर को भी ‘नो व्हीकल जोन' घोषित किया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए यह विशेष यातायात योजना 12 फरवरी को स्नान संपन्न होने तक लागू रहेगी। मेले में कल्पवास कर रहे श्रद्धालुओं के वाहनों पर भी यह नियम लागू रहेगा।
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नयी दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को निवेशकों से भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह करते हुए कहा कि देश में अगले पांच वर्षों में महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा बदलाव लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपार संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा, 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लक्ष्य के साथ-साथ तेल व गैस परिसंपत्तियों के लिए बोली के नए दौर की शुरुआत करने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ नए निवेश की संभावनाएं हैं और मुझे उम्मीद है कि आप भारत में सभी संभावनाओं का पता लगाएंगे।'' मोदी ने भारत ऊर्जा सप्ताह 2025 (आईईडब्ल्यू 25) को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ इन क्षेत्रों में निवेश की कई संभावनाएं हैं।'' प्रधानमंत्री ने निवेशकों से कहा, ‘‘ आप सिर्फ भारत ऊर्जा सप्ताह का हिस्सा नहीं हैं, आप भारत की ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ सभी विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 21वीं सदी भारत की सदी है। भारत न केवल अपनी वृद्धि को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक वृद्धि को भी बल दे रहा है।'' मोदी ने कहा कि भारत की ऊर्जा महत्वाकांक्षाएं पांच स्तंभों पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे पास संसाधन हैं जिनका हम उपयोग कर रहे हैं। हम अपने प्रतिभाशाली लोगों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। तीसरा, हमारे पास आर्थिक ताकत और राजनीतिक स्थिरता है।'' उन्होंने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है जो ऊर्जा व्यापार को आसान तथा अधिक आकर्षक बनाती है। इसके अलावा, भारत वैश्विक स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और यह देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं को बढ़ावा दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए अगले दो दशक बहुत महत्वपूर्ण हैं और अगले पांच वर्षों में हम कई उपलब्धियां हासिल करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे ऊर्जा लक्ष्य 2030 की समयसीमा के अनुरूप हैं।''मोदी ने कहा कि 2030 तक हम 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना चाहते हैं, भारतीय रेलवे 2030 तक शून्य उत्सर्जन स्तर पर पहुंच जाएगी और हमारा लक्ष्य 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन हासिल करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने जो कुछ भी हासिल किया है, उससे पता चलता है कि ये लक्ष्य भी हासिल किए जाएंगे। मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। पिछले 10 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 32 गुना वृद्धि हुई है। आज भारत तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश है और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता में तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत पेरिस वैश्विक जलवायु सम्मेलन द्वारा निर्धारित कार्बन उत्सर्जन कटौती लक्ष्य को पूरा करने वाला जी-20 सदस्य देशों में पहला देश है। पेट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रण के बारे में उन्होंने कहा कि आज भारत 19 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण कर रहा है।मोदी ने साथ ही विश्वास जाहिर किया कि भारत अक्टूबर, 2025 की समयसीमा से पहले 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने भारत के 50 करोड़ टन कच्चे माले का जिक्र किया और कहा कि नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान गठित वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में 28 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्ताह के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत देश में हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन की पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए सुधार ला रहा है। मोदी ने कहा कि भारत चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग केंद्र है और इसकी क्षमता में 20 प्रतिशत का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने देश में नई हाइड्रोकार्बन खोजों की ओर भी इशारा किया, जिनका अभी अन्वेषण किया जाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने खुला क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएलएपी) भी लाई है। साथ ही सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली स्थापित कर ऊर्जा क्षेत्र को समर्थन दिया है। मोदी ने बताया कि तेल क्षेत्र विनियमन एवं विकास अधिनियम में संशोधन के बाद हितधारकों को नीतिगत स्थिरता, विस्तारित पट्टे और बेहतर वित्तीय शर्तें मिलेंगी। बुनियादी ढांचे और खोजों में तेजी से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ इन क्षेत्रों में निवेश की बहुत संभावनाएं हैं।''मोदी ने पीवी मॉड्यूल सहित विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर के विनिर्माण की देश की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत प्रमुखता से ‘मेक इन इंडिया' और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत स्थानीय विनिर्माण को समर्थन दे रहा है तथा पिछले 10 वर्षों में सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता दो गीगावाट से बढ़कर लगभग 70 गीगावाट हो गई है। बैटरी व भंडारण क्षमता क्षेत्र में नवाचार तथा विनिर्माण के अवसरों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से इलेक्ट्रिक परिवहन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में इतने बड़े देश की मांगों को पूरा करने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने कहा कि बजट में हरित ऊर्जा को समर्थन देने वाली अनेक घोषणाएं शामिल हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन भारत में एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने गैर-लिथियम बैटरी परिवेश को बढ़ावा देने पर भी प्रकाश डाला। मोदी ने विकास को बढ़ावा देने तथा प्रकृति को समृद्ध बनाने वाले ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि यह ऊर्जा सप्ताह इस दिशा में बडे़ परिणाम देगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 'परीक्षा योद्धा' जिस सबसे आम विषय पर चर्चा करना चाहते हैं, वह है मानसिक स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती। श्री मोदी ने कहा, "इसलिए, इस वर्ष के परीक्षा पे चर्चा में इस विषय पर विशेष रूप से एक एपिसोड तैयार है, जो कल, 12 फरवरी को प्रसारित होगा।"
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;"#ExamWarriors जिन सबसे आम विषयों पर चर्चा करना चाहते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती भी शामिल है। इसलिए, इस वर्ष के परीक्षा पे चर्चा में इस विषय पर विशेष रूप से समर्पित एक एपिसोड है, जो कल, 12 फरवरी को प्रसारित होगा। और हमारे साथ @deepikapadukone हैं, जो इस विषय को लेकर बहुत भावुक हैं, और इस पर बात कर रही हैं।" -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 फरवरी को कश्मीर घाटी के लिए वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। इसी के साथ कश्मीर घाटी में रेल सेवा के 70 साल से भी अधिक पुराने सपने को पूरा किया जा सकेगा।
दुनिया की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण पटरियों में से एक पर चलेगी वंदे भारत ट्रेनजी हां, पीएम मोदी द्वारा कॉमर्शियल उद्घाटन के साथ, वंदे भारत ट्रेन भारत में अब तक बनी सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना और दुनिया की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण पटरियों में से एक पर चलेगी।चिनाब रेलवे ब्रिज इस सफर को बनाएगा और भी रोमांचकजानकारी के लिए बताना चाहेंगे, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना एक तकनीकी चमत्कार कहलाती है। दरअसल, इसमें न केवल भारत का पहला केबल-स्टेड अंजी खाद पुल जिसकी ऊंचाई 331 मीटर है आता है बल्कि चिनाब रेलवे ब्रिज भी शामिल है। चिनाब रेलवे ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है, जो नदी तल से 359 मीटर ऊपर है। यह ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज भी है। यह इस सफर को और भी रोमांचक बनाते हैं।दो दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी सुरंगें यात्रा में बचाएगी समयइसके अलावा उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक में दो दर्जन से अधिक छोटी और बड़ी सुरंगें शामिल हैं, जो वंदे भारत ट्रेन के लिए यात्रा को छोटा बनाती हैं, जिसे जलवायु-अनुकूल तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है।ट्रेन में मिलेंगी तमाम सुविधाएंइसका एयर-ब्रेक सिस्टम शून्य से नीचे के तापमान में अधिकतम प्रभावकारिता के लिए अनुकूलित है। इस ट्रेन में पूरी तरह से वातानुकूलित कोच, स्वचालित प्लग डोर, मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, भोजन ऑर्डर करने की सुविधा और ड्राइवर की विंडशील्ड के लिए एक विशेष डिफ्रॉस्टिंग मैकेनिज्म सहित कई अन्य सुविधाएं होंगी।घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल संपर्क का सपना होगा साकारसोनमर्ग सुरंग का उद्घाटन करते हुए, पीएम मोदी ने जम्मू और कश्मीर के लोगों से वादा किया था कि वह जल्द ही घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल संपर्क के सपने को साकार करेंगे।सभी मौसमों में रहेगा रेल संपर्कसभी मौसमों में रेल संपर्क के साथ, वर्तमान जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को प्रभावित करने वाली जलवायु की अनिश्चितताएं अतीत की बात हो जाएंगी। कश्मीर घाटी के लिए ट्रेन पर्यटन, बागवानी, उद्योग, शिक्षा को बढ़ावा देगी और नागरिकों को भी लाभान्वित करेगी।दिल्ली से श्रीनगर तक ट्रेन की यात्रा में लगेंगे महज 13 घंटेइसके बाद दिल्ली से श्रीनगर तक ट्रेन की यात्रा में महज 13 घंटे लगेंगे। इसी के साथ कटरा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को उतरने की वर्तमान अनिवार्यता इस वर्ष अगस्त में समाप्त हो जाएगी। वहीं जम्मू में रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण और उन्नयन कार्य अत्याधुनिक वंदे भारत ट्रेन सेवा की आवश्यकताओं के अनुरूप पूरा हो जाएगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में ‘एआई एक्शन समिट’ के दौरान अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बहुत सी चीजों को बेहतर बना कर लाखों लोगों के जीवन को बदलने में मदद कर सकता है।
संसाधन और प्रतिभाओं को एक साथ लाने की जरूरतपेरिस के ग्रैंड पैलेस में आयोजित सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, “शासन का मतलब सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना भी है, खास तौर पर ग्लोबल साउथ में। एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बहुत सी चीजों को बेहतर करके लाखों लोगों के जीवन को बदलने में मदद कर सकता है।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘एआई एक ऐसी दुनिया बनाने में मदद कर सकता है जिसमें विकास लक्ष्यों की यात्रा आसान और तेज हो जाए। ऐसा करने के लिए, हमें संसाधनों और प्रतिभाओं को एक साथ लाना होगा। हमें ओपन-सोर्स सिस्टम विकसित करना होगा जो विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ाए। हमें पूर्वाग्रहों से मुक्त गुणवत्तापूर्ण डाटा सेट बनाना होगा…”पीएम मोदी ने वांस को अमेरिकी उपराष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत पर बधाई दीप्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एआई एक्शन शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। इससे पहले पीएम मोदी सोमवार को पेरिस पहुंचे। ओर्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह राष्ट्रपति मैक्रों की ओर से आयोजित रात्रि भोज के लिए एलिसी पैलेस रवाना हुए।फ्रांसीसी नेता ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। रात्रि भोज में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। पीएम मोदी ने वांस को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में उनकी जीत पर बधाई दी। बता दें पीएम मोदी पेरिस से अमेरिका के लिए रवाना होंगे।राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैंपीएम मोदी के पेरिस पहुंचने से पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री मोदी ‘तकनीकी संप्रभुता’ के लिए प्रयास करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की तरह हमारा भी दृढ़ विश्वास है कि भारत और फ्रांस दो महान शक्तियां हैं और हमारे बीच विशेष संबंध हैं। हम अमेरिका का सम्मान करते हैं और उसके साथ काम करना चाहते हैं, हम चीन के साथ भी काम करना चाहते हैं, लेकिन किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं।”मैक्रों ने कहा, “भारत और फ्रांस अग्रणी हैं लेकिन अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे हैं। हम एआई पर एक साथ काम करना चाहते हैं। पीएम मोदी भी नई टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना चाहते हैं। लेकिन वह चाहते हैं कि यह भारत में भी हो।'( - प्रयागराज। मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान अब उस शिखर पर पहुंच गया है, जिसकी महाकुंभ से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उम्मीद जताई थी। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन हो रहा है, वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा। उन्होंने शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी। उनका यह आंकलन महाकुंभ के समापन से 15 दिन पहले ही सच साबित हो गया। मंगलवार की सुबह 8 बजे ही महाकुंभ में 45 करोड़ स्नानार्थियों की संख्या पार हो गई।आज मंगलवार को सुबह 8 बजे तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाई, जिसके साथ ही महाकुंभ में स्नानार्थियों की संख्या 45 करोड़ पार हो गई। अभी महाकुंभ को 15 दिन और दो महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष हैं। पूरी उम्मीद है कि स्नानार्थियों की संख्या 50-55 करोड़ के ऊपर जा सकती है।अगला अमृत स्नान 12 फरवरी कोआध्यात्मिक महत्व, भव्य अनुष्ठानों और अत्याधुनिक तकनीकी हस्तक्षेपों के मिश्रण के साथ, इस कुंभ मेले ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और डिजिटल सुविधा में नए मानक स्थापित किए हैं। आगंतुकों की संख्या 45 करोड़ से अधिक होने के साथ, भीड़ प्रबंधन एक प्रमुख फोकस रहा है। अगला अमृत स्नान 12 फरवरी, 2025 को माघ पूर्णिमा स्नान है।11 फरवरी, 2025 की सुबह से मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषितमाघ पूर्णिमा स्नान के दौरान सुचारू भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने 11 फरवरी, 2025 की सुबह से मेला क्षेत्र को ‘नो व्हीकल जोन’ के रूप में नामित किया है, जिसमें केवल आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं की अनुमति है।भारतीय रेलवे भी पूरी क्षमता से काम कर रहा हैमहाकुंभ 2025 की भीड़ को प्रबंधित करने के लिए भारतीय रेलवे भी पूरी क्षमता से काम कर रहा है। 9 फरवरी को लगभग 330 ट्रेनों ने 12.5 लाख तीर्थयात्रियों को पहुंचाया, 10 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक 130 और ट्रेनें रवाना हुईं।अधिकारियों और केंद्रीय मंत्रियों ने अमृत स्नान की तैयारियों की समीक्षा कीअधिकारियों और केंद्रीय मंत्री द्वारा आगामी 12 फरवरी 2025 को होने वाले अमृत स्नान की तैयारियों की समीक्षा की गई। प्रयागराज जंक्शन सहित सभी आठ स्टेशन पूरी तरह से चालू हैं, जबकि भीड़ प्रबंधन के लिए प्रमुख स्नान तिथियों के आसपास प्रयागराज संगम स्टेशन अस्थायी रूप से बंद है। राज्य सरकार ने विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से एक बहुस्तरीय सुरक्षा और निगरानी प्रणाली लागू की है। एआई-संचालित सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और वास्तविक समय विश्लेषण के नेटवर्क ने निर्दिष्ट क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है।प्रशासन ने भीड़भाड़ को कम करने के लिए स्नान घाटों तक पहुंच को सुव्यवस्थित करने के लिए एक डिजिटल टोकन प्रणाली भी शुरू की। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कुंभ एक समावेशी आध्यात्मिक अनुभव बना रहे।श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहींवहीं दूसरी ओर प्रयागराज में तीनों अमृत स्नान (मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी) के बाद भी श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से पवित्र त्रिवेणी में श्रद्धा और आस्था के साथ डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन लाखों, करोड़ों की संख्या में प्रयागराज पहुंच रहे हैं।श्रद्धा का जबरदस्त उत्साह लोगों को संगम तट तक खींचकर ला रहा हैबसंत पंचमी के अंतिम अमृत स्नान पर्व के बाद भी श्रद्धा का जबरदस्त उत्साह लोगों को संगम तट तक खींचकर ला रहा है। स्नानार्थियों में 10 लाख कल्पवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए श्रद्धालु एवं साधु-संत शामिल रहे।यदि अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ से ज्यादा और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई। इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी।माघ पूर्णिमा से पहले भी प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम तट पर पवित्र स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, महाशिवरात्रि पर भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। महाकुंभ का समापन 26 फरवरी को होना है।
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नई दिल्ली। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मंगलवार को ‘एयरो इंडिया 2025’ में व्हीकल-माउंटेड काउंटर-ड्रोन सिस्टम का अनावरण किया। कंपनी ने अपने बयान में कहा, “यह अत्याधुनिक प्रणाली उभरते हवाई खतरों के खिलाफ भारत की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक युद्ध में टोही और आक्रामक अभियानों के लिए ड्रोन के बढ़ते उपयोग के कारण एक मजबूत एंटी-ड्रोन सिस्टम की आवश्यकता अनिवार्य हो गई है।”
अदाणी डिफेंस और एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा कि यह भारत के डिफेंस इनोवेशन इकोसिस्टम की क्षमता को दिखाता है। यह डीआरडीओ के वर्ल्ड क्लास आरएंडडी और टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क के हस्तांतरण से संचालित है।उन्होंने आगे कहा कि हमें ये बताकर खुशी हो रही है कि अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस सफलतापूर्वक डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी को ऑपरेशनल रेडी सॉल्यूशंस में बदलने में सफल रहा है। इससे हमारी सेनाओं की क्षमता बढ़ेगी।राजवंशी के मुताबिक, अपनी उन्नत विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाकर, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारे सशस्त्र बलों के पास देश के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए सबसे उन्नत, स्वदेशी रक्षा टेक्नोलॉजी तक पहुंच हो।इस प्लेटफॉर्म को डीआरडीओ के महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणाली) डॉ. बीके. दास ने रक्षा विशेषज्ञों और उद्योग भागीदारों की उपस्थिति में लॉन्च किया। व्हीकल-माउंटेड काउंटर-ड्रोन सिस्टम लंबी दूरी की सुरक्षा, चपलता और सटीकता सुनिश्चित करता है, जो इसे आधुनिक रक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति बनाता है। यह उन्नत सेंसर क्षमताओं के माध्यम से निर्बाध सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें ड्रोन का ऑटोमेटिक डिटेक्शन, वर्गीकरण और निष्क्रिय करना शामिल है।इस ड्रोन को सिंगल 4×4 व्हीकल के साथ एकीकृत किया गया है। इसमें किसी ड्रोन को मार गिराने के लिए हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम लगा हुआ है। इसमें 7.62 एमएम गन और एडवांस रडार है। यह 10 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को हिट कर सकता है। -
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद में बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत सहित छह नई भाषाओं में अनुवाद सेवाओं के विस्तार की घोषणा की। सदन को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि पहले, अनुवाद सेवाएं हिंदी और अंग्रेजी के अलावा असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु सहित 10 भाषाओं में उपलब्ध थीं।
ओम बिरला ने कहा कि अब हमने छह और भाषाओं – बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत को भी शामिल किया है। इसके साथ ही अतिरिक्त 16 भाषाओं के लिए जैसे-जैसे मानव संसाधन उपलब्ध होंगे हम उनमें भी एक साथ अनुवाद प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत की संसदीय प्रणाली एक लोकतांत्रिक ढांचा है, जो कई भाषाओं में अनुवाद प्रदान करती है।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “जब मैंने वैश्विक स्तर पर चर्चा की कि हम भारत में 22 भाषाओं में यह प्रयास कर रहे हैं तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर सभी ने इसकी सराहना की। ओम बिरला ने कहा, हमारा प्रयास है कि जिन 22 भाषाओं को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है उन्हें भविष्य में भी शामिल करना हमारा लक्ष्य है।”वहीं, डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने लोकसभा अध्यक्ष की घोषणा पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि संस्कृत में एक साथ अनुवाद पर जनता का पैसा क्यों बर्बाद किया जा रहा है, जिसे जनगणना के अनुसार केवल 70,000 लोग बोलते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत देश के किसी भी राज्य में नहीं बोली जा रही है। दयानिधि मारन ने तर्क देते हुए पूछा कि आपकी आरएसएस विचारधाराओं के कारण करदाताओं का पैसा क्यों बर्बाद किया जाना चाहिए ?इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर ने उनकी खिंचाई की और पूछा कि वह किस देश में रह रहे हैं ?“यह भारत है, जिसकी “मूल भाषा” संस्कृत रही है इसीलिए हमने सिर्फ संस्कृत नहीं बल्कि 22 भाषाओं का जिक्र किया। आपको संस्कृत से दिक्कत क्यों है?” - नयी दिल्ली। सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के कारण भारत में स्वच्छता अभियान के कारण तीन लाख बच्चों की जान बची है। जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। स्वच्छता अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक 12 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं और करीब 60 करोड़ लोग उन शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं। पाटिल ने कहा कि शौचालयों के निर्माण से महिलाओं को विशेष रूप से फायदा हुआ है और उन्हें अब अंधेरे की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती जिससे उनकी सुरक्षा भी बढ़ी है वहीं उनके स्वास्थ पर भी अच्छा असर हुआ है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में स्वच्छता अभियान के कारण तीन लाख बच्चों की जान बची है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान एक सतत अभियान है।
- बलिया । उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के खेजुरी क्षेत्र में एक कोचिंग संचालक और उनकी पत्नी की धारदार हथियार से कथित तौर पर हत्या कर दी गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि रविवार रात खेजुरी थाना क्षेत्र के मासूमपुर गांव में कोचिंग संचालक श्याम लाल चौरसिया (55) और उनकी पत्नी बासमती चौरसिया (50) की धारदार हथियार से हत्या कर दी गयी। उन्होंने बताया कि देर रात करीब 10 बजे पुलिस को मासूमपुर गांव में सड़क के किनारे एक घर में एक पुरुष और एक महिला का शव पड़े होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर देखा तो चौरसिया और उसकी पत्नी के शव घर के बाहर पड़े थे। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक ऐसा लगता है कि दोनों पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिये हैं। सिंह ने कहा कि पुलिस हत्या के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। इस मामले में मृतक के भाई राधेश्याम चौरसिया की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि श्याम लाल चौरसिया अपने मकान में कोचिंग चलाते थे। मामले की जांच की जा रही है।
- हैदराबाद,। तेलंगाना के सड़क व भवन मंत्री कोमाटीरेड्डी वेंकट रेड्डी ने सोमवार को प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में डुबकी लगाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार व राज्य के लोगों की कल्याण के लिए प्रार्थना की। उन्होंने प्रयागराज में संगम की अपनी यात्रा का एक वीडियो पोस्ट कर 'एक्स' पर लिखा, "तेलंगाना के लोगों की खुशी, समृद्धि और कल्याण तथा गरीबों की सेवा करने के लिए हमारी सरकार की शक्ति के लिए गंगाम्मा से प्रार्थना की।" उन्होंने यह भी कहा कि यह एक गहन आध्यात्मिक अनुभव था जिसने उन्हें इसमें भाग लेने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों की तरह भक्ति से भर दिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने छह दिसंबर 2024 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी से मुलाकात कर उन्हें महाकुंभ में आने का निमंत्रण दिया था।
- बेंगलुरु,। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि युद्ध की तेजी से बदल रही प्रकृति के चलते लगातार समाधान अपनाने और उनमें सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रक्षा विनिर्माण में प्रयासों को उभरते क्षेत्रों के लिए जवाबी उपाय बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से आगे आने और विस्तारित भारतीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा पेश किए गए अवसरों का उपयोग करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ये अवसर रक्षा उत्पादन में हमारी आत्मनिर्भरता की नीतियों से प्रेरित हैं एवं अनुकूल नीति व्यवस्था द्वारा सुगम बनाए गए हैं।'' रक्षा मंत्री ने ‘एयरो इंडिया' के 15वें संस्करण के तहत सीईओ गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। सिंह ने कहा, ‘‘इस सम्मेलन का सार यह है कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी रक्षा निर्माता और सेवा प्रदाता बनाने के लिए कैसे हाथ मिलाया जाए। यह सब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और अन्य नयी तकनीकी क्रांतियों की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है, इसलिए हमें लगातार समाधान अपनाने और उनमें सुधार करने की जरूरत है।'' सिंह ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, पहले विशुद्ध सैन्य उपकरण आधारित प्रणालियों पर निर्भरता थी। अब सॉफ्टवेयर आधारित प्रणालियां इसकी जगह ले रही हैं। आज, सैन्य अभियानों में संचार और डेटा साझा करने की प्रकृति बहुत अधिक जटिल होती जा रही है। अंतरिक्ष आधारित दिशासूचक प्रणाली, अंतरिक्ष आधारित संचार और निगरानी पर हमारी निर्भरता का अर्थ है कि अंतरिक्ष आधारित परिसंपत्तियों को हमारी परिचालन योजनाओं में एकीकृत करना होगा।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि हाल के संघर्षों में ड्रोन के इस्तेमाल से यह संकेत मिलता है कि भविष्य मानवयुक्त, मानवरहित और स्वायत्त युद्ध प्रणालियों के एकीकृत प्रयासों पर निर्भर करेगा, इसलिए रक्षा विनिर्माण में हमारे प्रयासों को इन उभरते क्षेत्रों के लिए जवाबी उपाय बनाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
- नयी दिल्ली,। सरकार ने सोमवार को संसद में कहा कि पिछले तीन साल में एयरलाइनों द्वारा 255 यात्रियों को विभिन्न कारणों से 'नो फ्लाई लिस्ट' में रखा गया है। इन कारणों में दुर्व्यवहार, झगड़े और चालक दल के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं शामिल हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 82 लोगों को इस सूची में रखा गया था, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 110 और वर्ष 2022 में यह संख्या 63 थी। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में कहा कि यात्रियों को अन्य कारणों के अलावा दुर्व्यवहार, झगड़े और चालक दल के सदस्यों के साथ मारपीट की घटनाओं के कारण 'नो फ्लाई लिस्ट' (उड़ान नहीं भरने देने वाली सूची) में रखा गया था। ऐसा व्यक्ति जिसे इस प्रकार की सूची में शामिल किया गया है, वह आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर मंत्रालय द्वारा गठित अपीलीय समिति के समक्ष अपील कर सकता है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने सोमवार को संसद में कहा कि देश भर में करीब 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि में से करीब 10,249 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उनसे देश में रक्षा भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सवाल किया गया था। मंत्री ने अपने उत्तर में कहा, ‘‘देश भर में करीब 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि में से करीब 10,249 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है।'' उन्होंने रक्षा भूमि पर अतिक्रमण का राज्यवार विवरण भी साझा किया।
एक अन्य प्रश्न में सरकार से पूछा गया था कि क्या उसे इस तथ्य की जानकारी है कि रक्षा भूमि निजी और अन्य संस्थाओं को पट्टे पर दिए गए हैं या उन पर अतिक्रमण है। सेठ ने कहा कि छावनी के भीतर रक्षा भूमि के पट्टे ऐतिहासिक रूप से 1899 और 1912 की छावनी संहिताओं के तहत विभिन्न उद्देश्यों के लिए लोगों, संस्थानों और सरकारी निकायों को दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा छावनी भूमि प्रशासन नियम 1925 और 1937 के तहत भूमि दी गयी। उन्होंने अपने जवाब में कहा, ‘‘ये पट्टे आम तौर पर या तो हमेशा के लिए या कुल 90 साल की पट्टा अवधि के लिए दिए गए थे।'' मंत्री ने कहा कि इस संबंध में आगे के कदम के लिए मंत्रालय ने 10 मार्च, 2017 को एक अंतरिम नीति जारी की थी, जिसे 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दिया गया है।












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