मूक-बधिर मरीज के गुर्दा प्रतिरोपण के लिए डॉक्टर ने सांकेतिक भाषा सीखी
नयी दिल्ली। पेशे के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए यहां एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने 21 वर्षीय मूक-बधिर मरीज की गुर्दा प्रतिरोपण सर्जरी के दौरान और उसके बाद मदद के लिए सांकेतिक भाषा सीखी। फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तेजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मामले का चुनौतीपूर्ण पहलू मरीज की सुनने और बोलने में असमर्थता थी। इस वजह से मरीज के लिए खासकर प्रतिरोपण प्रक्रिया के दौरान अपनी समस्याओं और दर्द को बताना मुश्किल था। उन्होंने कहा, ‘‘मरीज और डॉक्टर के बीच का बंधन विशेष होता है। जब कोई मरीज किसी बीमारी से पीड़ित होता है और संवाद में कठिनाई होती है, तो डॉक्टर की चुनौती कई गुना बढ़ जाती है।''
मरीज 2017 से हेमोडायलिसिस पर था लेकिन कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ। मरीज को पिछले महीने अस्पताल लाया गया। उसकी मां का रक्त समूह मिलान हो गया और वह तुरंत अपना गुर्दा दान करने के लिए तैयार हो गईं। प्रतिरोपण 22 जून को चौहान और यूरोलॉजी एवं गुर्दा ट्रांसप्लांट निदेशक डॉ. अनूप गुलाटी द्वारा किया गया था। हालांकि, मरीज के मूक-बधिर होने के कारण उसके लिए अपने दर्द और आवश्यकताओं को बता पाना मुश्किल था। सांकेतिक भाषा की मदद से, चौहान ने मरीज की सर्जरी से पहले और बाद की प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाया। मामले की जानकारी देते हुए, चौहान ने कहा, ‘‘गुर्दा प्रतिरोपण सफल रहा और प्रत्यारोपित गुर्दा बेहतर ढंग से काम कर रही है। मामले का चुनौतीपूर्ण पहलू यह था कि मरीज सुनने और बोलने में असमर्थ था।'' मरीज के अभिभावक सांकेतिक भाषा में कुशल हैं, जिससे प्रभावी संचार संभव हो सका। चौहान ने कहा, ‘‘इसके अतिरिक्त, मैंने सांकेतिक भाषा सीखने की पहल की। चूंकि पूर्ण दक्षता की जरूरत नहीं थी, इसलिए सरल संवाद सीखने में केवल एक सप्ताह लगा।''









.jpg)
Leave A Comment