एम्स के अगले 10 वर्षों के विकास का खाका संस्थान में ही तैयार हो : मांडविया
ऋषिकेश . केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा कि एम्स ऋषिकेश में अगले 10 वर्षों के लिए विकास का खाका संस्थान में ही फैकल्टी, प्रशासन एवं छात्रों के समेकित विचार विमर्श के बाद तैयार होना चाहिए । ऋषिकेश में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तीसरे दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुये मांडविया ने कहा, ‘‘विकास का खाका तैयार करने के लिए चाहे जितने भी ब्रेन स्टार्मिंग सेशन करने पड़ें, किए जाने चाहिए।'' इस संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एम्स ऋषिकेश का बाल्य काल पूरा हो गया है और अब इसे वर्तमान के साथ भविष्य की चुनौतियों को राष्ट्रहित सर्वोपरि मानकर अपने विकास व क्षमता विकास का खाका तैयार कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री या निदेशक तो आते— जाते रहेंगे, लेकिन यदि एम्स की 10 वर्षीय कार्य योजना का खाका एक बार बन गया तो वह आने वाले हर मंत्री व निदेशक के समक्ष स्थाई रूप से अस्तित्व में रहेगा। मांडविया ने इस अवसर पर 34 पदक भी बांटे जिसमें 30 स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल थे। एम्स ऋषिकेश 2012 में स्थापित हुआ था । पदक विजेताओं को बधाई देते हुए मांडविया ने कहा कि एक डॉक्टर को पांच साल की डिग्री की पढ़ाई कराने में जनता का दो करोड़ रुपया खर्च होता है और इसलिए सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़कर निकले चिकित्सकों से जनता का उम्मीद रखना बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करके निकलने वाले चिकित्सक जनता के प्रति अपने दायित्वों का आजीवन पालन करें और समाज को स्वस्थ रखने में सदैव अपना योगदान दें । इस संबंध में उन्होंने याद दिलाया कि स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। इस मौके पर मांडविया ने रिमोट का बटन दबाकर एम्स ऋषिकेश परिसर में बनने वाले क्रिटिकल केयर अस्पताल का शिलान्यास भी किया । कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रवीण भारती पंवार भी मौजूद रहीं ।
इससे पहले एम्स ऋषिकेश की अधिशासी निदेशक मीनू सिंह ने बताया कि एम्स में रोजाना तीन हजार मरीज ओपीडी में उपचार कराते हैं।









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